पर्सनल और गोल्ड लोन छोड़िए, Mutual Fund पर लोन है सबसे सस्ता, जानिए कितनी है ब्याज दर

Updated on 29-07-2023 02:37 PM

नई दिल्ली : Mutual Fund स्कीम कई लोगों के निवेश पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा होती हैं। लिहाजा कई सारे कर्जदाता बढ़-चढ़ कर इसके बदले लोन की पेशकश कर रहे हैं। इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक ओर जहां कर्जदाताओं ने ऐसे लोन तक पहुंचने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। वहीं, पर्सनल या गोल्ड लोन की तुलना में इसके इटरेस्ट रेट को भी कम रखा है। पब्लिक और प्राइवेट बैंक से यह लोन लिया जा सकता है लेकिन गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (NBFC) इस मोर्चे पर कहीं ज्यादा आक्रामक रही हैं। इस लोन का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए आपको मुनाफा देने वाली अपनी स्कीम को नहीं रोकना पड़ता है।

स्कीम की वैल्यू का अधिकतम 50% तक कर्ज

इक्विटी म्यूचुअल फंड के मामले में, स्कीम की वैल्यू का अधिकतम 50% तक कर्ज मिल सकता है। NBFC आपके क्रेडिट स्कोर के आधार पर इस लोन के लिए 9-10% इंटरेस्ट लेते हैं। इसकी तुलना में, गोल्ड के एवज में लिए जाने वाले लोन की दरें 9-24% हैं, जबकि लोगों को पर्सनल लोन के लिए 10-18% का भुगतान करना पड़ता है। म्यूचुअल फंड के बदले लिए जाने वाले ज्यादातर लोन की अवधि 12 महीने होती है और कर्ज की न्यूनतम रकम आम तौर पर ₹10,000 रुपये और इसकी ऊपरी सीमा ₹एक करोड़ रुपये होती है।

मिराए असेट फाइनैंशल सर्विसेज के CEO कृष्ण कन्हैया ने कहा, 'हमने देखा है कि कई बार इन्वेस्टर शॉर्ट टर्म इमरजेंसी को पूरा करने के लिए अपनी इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट को बेच देते हैं। इसकी वजह से वे अक्सर इक्विटी से उचित रिटर्न नहीं कमा पाते हैं और अपने लॉन्ग टर्म लक्ष्यों तक पहुंचने से चूक जाते हैं।'
 

आसान प्रक्रिया

कर्जदाताओं ने लोगों के लिए म्यूचुअल फंड के बदले उधार लेना आसान बना दिया है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सुगम बना दिया है। NBFC के इग्जेक्यूटिव्स ने कहा कि आम तौर पर, उपयोग की गई राशि पर उतने दिनों के लिए ही ब्याज लगाया जाता है जितने दिनों के लिए राशि का इस्तेमाल होता है और कोई EMI नहीं होती है। एक साल के लोन पीरियड के दौरान कभी भी कर्ज की रकम को चुकता किया जा सकता है और एक साल के बाद लोन को रीन्यू करने का विकल्प भी होता है। फाइनैंशल प्लानरों की राय है कि मेडिकल इमरजेंसी जैसी जरूरतों को इस तरह के लोन से पूरा किया जा सकता है।
 

नुकसान भी है

ऐसे लोन का एक बड़ा नुकसान यह है कि शेयर बाजार में तेज गिरावट की स्थिति में कर्जदार को को टॉप-अप लाना होगा। यानी कर्जदाता कर्जदार को उताना पैसा लाने के लिए कहते हैं जितना की इक्विटी म्यूचुअल फंड के मूल्य में गिरावट हुई है।

कहीं फंस तो नहीं रहे आप

प्राइमइन्वेस्टर की को-फाउंडर विद्या बाला कहती हैं, 'जब निवेशकों को इस तरह का लोन लेने की सलाह दी जाती है, तो उन्हें यह देखना चाहिए कि क्या ऐसी सलाह के पीछे कोई स्वार्थ तो नहीं है।' उदाहरण के लिए असेट मैनेजमेंट कंपनियां या डिस्ट्रीब्यूटर नहीं चाहेंगे कि उनके असेट में कमी आए, क्योंकि ऐसा होने पर उनकी इनकम कम हो जाएगी।'
 
 
 


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