धर्मांतरण कराने पर उम्रकैद, मददगारों को भी होगी जेल

Updated on 20-03-2026 12:20 PM
रायपुर, छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 पास हो गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।

पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से हो, तो सजा बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल और न्यूनतम 10 लाख जुर्माना देना होगा। वहीं, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास होगी। कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना लगेगा।

गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा पेश किया गया यह नया विधेयक वर्ष 1968 के पुराने कानून की जगह लेगा, जिसे सरकार ने वर्तमान तकनीक और सामाजिक परिस्थितियों के लिहाज से नाकाफी माना है। इस विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए गृहमंत्री और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने 50 से ज्यादा मैराथन बैठकें की थी।

सरकार के अनुसार इस बिल का मकसद बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। सदन में बिल पास होते ही BJP विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए।

वहीं विपक्ष ने इस बिल का विरोध किया और वॉकआउट कर दिया था। विपक्ष का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के साथ-साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जानी चाहिए। सदन में यह बिल ध्वनि मत से पास हुआ।

दोबारा धर्म परिवर्तन कराने वालों को आजीवन कारावास

धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के तहत अगर कोई व्यक्ति एक बार धर्म परिवर्तन करवाते हुए पकड़ा जा चुका है और सजा काट चुका है। वहीं व्यक्ति दोबारा किसी व्यक्ति के अवैध धर्मांतरण के मामले में दोषी बनता है, तो उसे आजीवन कारावास के लिए दंडित किया जाएगा। लेकिन न्यायालय किन्हीं भी पर्याप्त या विशेष कारणों से कारावास की अवधि को काम कर सकेगा।

मददगारों पर भी एक्शन

अवैध धर्मांतरण प्रक्रिया में कोई भी व्यक्ति मददगार बनता है, तो उसे न्यूनतम 6 महीने और अधिकतम 3 साल की सजा और 2 लाख रुपए जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

60 दिन पहले कलेक्टर को देना होगा आवेदन

विधेयक के मुताबिक, अब छत्तीसगढ़ में स्वेच्छा से धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले कलेक्टर को आवेदन देना होगा। नियम केवल धर्म बदलने वाले पर ही नहीं, बल्कि अनुष्ठान कराने वाले पादरी, मौलवी या पुजारी पर भी लागू होगा।

उन्हें भी 2 महीने पहले प्रशासन को सूचित करना होगा। बिना सूचना के धर्मांतरण कराया गया, तो इसे 'अवैध' माना जाएगा और तत्काल गिरफ्तारी होगी।

शादी के लिए धर्म परिवर्तन माना जाएगा अवैध

विधेयक में 'लव जिहाद' जैसी साजिशों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान हैं। कोई विवाह केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया है, तो कोर्ट उसे 'शून्य' घोषित कर देगा। शादी के इच्छुक जोड़ों को 2 महीने पहले अपने धर्म परिवर्तन के इरादे की घोषणा करनी होगी, जिसकी जांच खुद जिला मजिस्ट्रेट करेंगे।

विदेशी फंडिंग और संस्थाओं पर शिकंजा

धर्मांतरण के खेल में शामिल विदेशी फंडिंग पर सरकार ने पूरी तरह रोक लगा दी है। कोई संस्था प्रलोभन या सामूहिक धर्मांतरण में शामिल पाई गई, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द होगा और उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

विशेष अदालतों में होगी सुनवाई

विधेयक के तहत हर जिले में विशेष अदालत गठित की जाएगी, जहां ऐसे मामलों की सुनवाई होगी। सरकार का लक्ष्य है कि मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए।

छत्तीसगढ़ में कानून की जरूरत क्यों पड़ी?

छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में खासकर बस्तर, जशपुर, रायगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आदिवासियों को ईसाई धर्म में शामिल करवाया जा रहा है। यह विवाद का विषय बना हुआ है। बस्तर के नारायणपुर क्षेत्र में तो यह गुटीय संघर्ष में तब्दील हो चुका है।

आदिवासी और धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों के बीच कई बार गंभीर विवाद हो चुका है। कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है। इस कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसे विवाद को टालने और धर्मांतरण पर एक कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा आबादी OBC वर्ग की

इसमें से 2,38,19,789 हिंदू, 5,14,998 मुस्लिम, 4,90,542 ईसाई और 68,979 सिख थे। हालांकि 2021 में छत्तीसगढ़ की अनुमानित जनसंख्या 3 करोड़ के करीब आंकी गई थी, जो अब करीब 3 करोड़ 30 लाख पार हो गई है। इनमें सबसे ज्यादा आबादी OBC वर्ग की है। हालांकि ये आंकड़े अनुमानित हैं।



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