संभावित ग्लोबल मंदी को देखते हुए सरकार छोटे उद्योगों को वित्तीय सहायता के मामले में राहत दे सकती है। उनके लिए कर्ज लेने का रास्ता आसान बनाया जा सकता है तथा कर्ज की अदायगी को लेकर उन्हें छूट दी जा सकती है।
बजट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य
- बजट शब्द कहां से आया? भारत का पहला बजट कब पेश किया गया था?
बजट शब्द पहली बार 1773 में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री सर रॉबर्ट वालपोल ने इस्तेमाल किया। बजट शब्द बज से आया है, जिसका मतलब होता है बैग या छोटा पर्स। ईस्ट इंडिया कंपनी 1833 में चार्टर एक्ट लाई। इस एक्ट के तहत भारत में गवर्नर जनरल को राजस्व के नियंत्रण का अधिकार दिया गया। 1857 की क्रांति के बाद देश में केंद्रीय वित्तीय व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई। 18 फरवरी 1869 को गवर्नर जनरल इन काउंसिल के फाइनेंस मेंबर सर जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट पेश किया। - संविधान के किस अनुच्छेद में बजट का उल्लेख?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद-112 में भारत के केंद्रीय बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में बताया गया है, जो कि भारतीय गणराज्य का वार्षिक बजट होता है। अगर हम भारतीय संविधान में बजट शब्द को ढूंढ़ेंगे तो हमें ये शब्द कहीं नहीं मिलेगा, क्योंकि भारतीय संविधान में बजट शब्द का उल्लेख कहीं भी नहीं किया गया है। बजट के बदले संविधान के अनुच्छेद 112 में सरकार हर साल आय-व्यय का एक लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगी, जिसमे यह उल्लेख रहेगा कि ‘सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में किस मद में कितना व्यय करेगी। साथ ही इस व्यय को पूरा करने के लिए सरकार आय कहां से प्राप्त करेगी’ का उल्लेख किया गया है। बजट को लागू करने से पहले इसे संसद द्वारा पास करना आवश्यक होता है। सीडी देशमुख रिजर्व बैंक के एकमात्र ऐसे गवर्नर हैं जिन्होंने 1951-52 में अंतरिम बजट प्रस्तुत किया था। - 11 बजे ही क्यों पेश होता है बजट?
1924 से लेकर 1999 तक बजट फरवरी के अंतिम कार्यकारी दिन शाम पांच बजे पेश किया जाता था। यह प्रथा सर बेसिल ब्लैकैट ने 1924 में शुरु की थी, इसके पीछे का कारण रात भर जागकर वित्तिय लेखा-जोखा तैयार करने वाले अधिकारियों को अराम देना था। 2000 में पहली बार यशवंत सिन्हा ने बजट सुबह 11 बजे पेश किया। इतने वर्षों में बजट पेश किए जाने के समय से लेकर तौर तरीकों में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ। कई नई परंपराएं अस्तित्व में आईं और कई कीर्तिमान भी स्थापित हुए। - 2000 से पहले क्यों शाम में पेश होता था बजट?
साल 2000 तक अंग्रेजी परंपरा से अनुसार, बजट शाम को 5 बजे पेश किया जाता था। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस परंपरा को तोड़ा। इसे सुबह 11 बजे संसद में बजट पेश करने की शुरुआत की गई। इसके पीछे का कारण था कि यह समय ब्रिटिश संसद के आधार पर तय किया गया था और उनके टाइम के अनुसार भारत ने इसे शाम को 5 बजे पेश करना शुरू किया। 2017 से पहले बजट फरवरी माह के अंतिम कार्य दिवस में पेश किया जाता था, लेकिन 2017 से इसे 1 फरवरी या फरवरी के पहले कार्य दिवस में पेश किया जाने लगा। 2017 के बजट से ही केंद्र की नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने रेल बजट को आम बजट में समायोजित कर एक और प्रयोग किया। - बजट पेपर की कहां होती थी छपाई?
बजट पेपर पहले राष्ट्रपति भवन में ही छापे जाते थे, लेकिन 1950 में पेपर लीक हो जाने के बाद से इन्हें मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में छापा जाने लगा। 1980 से बजट पेपर नॉर्थ ब्लॉक से प्रिंट होने लगे। शुरुआत में बजट अंग्रेजी में बनाया जाता था, लेकिन 1955-56 से बजट दस्तावेज हिन्दी में भी तैयार किए जाने लगे। 1955-56 में ही बजट में पहली बार कालाधन उजागर करने की स्कीम शुरू की गई थी। हालांकि, नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा फैसला करते हुए बजट को पेपरलेस कर दिया। यानी अब बजट पेपर की छपाई नहीं होती। इसे टैब के माध्यम से पेश किया जाता है।
