पाकिस्तान में बेरहम आर्थिक संकट, भूखे बच्चों का मुंह देखने के बजाय मौत को गले लगा रहीं गरीब मांएं‍!

Updated on 11-04-2023 09:06 PM
इस्लामाबाद : पाकिस्तान में रमज़ान के आने के बाद खाना बांटने वाले स्थलों पर भारी भीड़, जो कभी-कभी भगदड़ में बदल जाती है, एक आम नजारा हो गया है। कराची में हाल ही में 12 लोग मारे गए जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल थे। उनका दोष सिर्फ इतना था कि वे मुफ्टे आटे की बोरी हासिल करना चाहते थे। आटा पाकिस्तान में इतना महंगा हो चुका है कि लोगों के लिए इस तरह की कतारों में खड़े होना और भगदड़ का जोखिम उठाना इकलौता रास्ता बचा है। आंकड़े पाकिस्तान की गरीब अवाम पर बोझ को और सटीकता से बयां कर रहे हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (consumer price index) के अनुसार, एक साल पहले की तुलना में मार्च में वस्तुओं की कीमतों में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जो 1965 के बाद से सबसे ज्यादा थी।

पाकिस्तानी मूल की अमेरिकी पत्रकार राफिया जकारिया ने अपने एक लेख में लिखा है कि पाकिस्तान को 1 अरब डॉलर की किश्त जारी करने के लिए फंड की सख्त जरूरत है। इस फंड के बिना पाकिस्तान डिफॉल्ट हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप मुल्क और बदतर परिस्थितियों में डूब जाएगा। अगर अभी गरीब आटे और तेल के लिए कतारों में खड़े हैं तो डिफॉल्ट होने का मतलब है हर चीज के लिए कतार में खड़े होना।

अस्पतालों में मरीजों का बुरा हाल

जकारिया ने लिखा, अस्पतालों में मरीज मर रहे हैं क्योंक देश में जीवनरक्षक दवाओं का अकाल पड़ा है। दवाओं की सप्लाई पहले से ही कम है जिसे लेकर फार्मास्यूटिकल्स गंभीर चेतावनी दे रहे हैं। लोगों को कुछ भी हासिल करने के लिए ब्लैक मार्केट का रुख करना पड़ रहा है। उन्होंने अपने लेख में लिखा कि आटे के लिए भगदड़ में मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं हैं। यह महिलाएं ही हैं जिन्हें बच्चों की भूख से जूझना पड़ता है और चूल्हे पर खाली बर्तन देखना पड़ता है।

बच्चों का सामना करने के बजाय स्वीकार की मौत

उन्होंने लिखा कि रमज़ान के महीने में दिन के दौरान भूख और प्यास आध्यात्मिक पर ध्यान केंद्रित करने की अवधि का हिस्सा है। लेकिन कल्पना कीजिए, एक अंतहीन उपवास का तेज दर्द और पीड़ा जहां खाने की गैर-मौजूदगी का मतलब है कि उपवास अनंत है और भूख स्थिर है। वे कह रहे हैं कि भूख की पीड़ा से ज्यादा दर्दनाक कुछ नहीं है। यह उनका भीषण धैर्य है जिसके चलते हाल ही में कराची भगदड़ में कई मांओं की मौत हो गई। ये वे माताएं थीं जो अपने भूखे बच्चों की निराश आंखों का सामना करने के बजाय मर गईं। राफिया जकारिया ने लिखा, 'माताओं का अपने बच्चों को निराश करने के बजाय मर जाना मानवता की एक नई गहराई है।'

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