एमपी की सबसे महंगी और सबसे बड़ी झांकियां:भोपाल में 1.25 करोड़ की झांकी में जगन्नाथ धाम के दर्शन, इंदौर में 25 एकड़ का पंडाल

Updated on 27-09-2025 01:51 PM

नवरात्रि पर माता की भक्ति में लोग डूबे हुए हैं। व्रत और गरबा की धूम के साथ ही मां के विराट स्वरूपों के दर्शन झांकियों-पंडालोंं में कर रहे हैं। इस बार पूरे प्रदेश में अलग-अलग झांकियां सजाई गईं हैं।

हर पंडाल की अलग परंपरा और आस्था की कहानी है। कहीं सबसे महंगी झांकी बनाई है तो कहीं मंदिर को जीवंत बनाने की कोशिश की गई है। प्रदेश के ऐसे ही प्रमुख माता के पंडाल और झांकियों के बारे में दैनिक भास्कर बता रहा है।

भोपाल में प्रदेश की सबसे बड़ी झांकी बनाई गई है। यहां जगन्नाथ धाम मंदिर की भव्यता को सजीव किया गया है। आयोजकों का दावा है कि यह 1.25 करोड़ रुपए के बजट में 90 दिनों में तैयार की गई है।

इसी तरह इंदौर में 25 एकड़ के पंडाल में 12 ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति उभारी गई है। उज्जैन में सांसद पंडाल में गरबा के साथ ही गुफा बनाकर माता के दर्शन करवाए गए हैं तो ग्वालियर में 5 हजार स्क्वायर फीट का मां काली का पंडाल भक्तों को आकर्षित कर रहा है।

भोपाल: जगन्नाथ पुरी धाम मंदिर के दर्शन

भोपाल में प्रदेश के सबसे बड़ी झांकी बनाई गई है। दुर्गा उत्सव समिति संयोजक हरिओम खटीक के मुताबिक, झांकी का पंडाल पूरी तरह पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है।

सुदर्शन चक्र सहित इसकी ऊंचाई 111 फीट और क्षेत्रफल करीब 30 हजार वर्गफीट है। निर्माण में लकड़ी, बांस, कपड़ा, थर्माकोल, फेविकोल और रंगों का उपयोग किया गया है। झांकी को कोलकाता से बुलाए गए 62 कारीगरों ने बनाया है। 18-18 घंटे लगातार काम कर इन्होंने 90 दिन में झांकी तैयार की।

इन्हीं कलाकारों ने माता, हनुमान जी और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा बनाई हैं। सिर्फ भगवान जगन्नाथ स्वामी की प्रतिमा पुरी से लाई गई है। पूजा-विधि भी वही है जो जगन्नाथ धाम में होती है। इसके लिए पुरी से सात ब्राह्मण विशेष रूप से बुलाए गए हैं।

इंदौर: 25 एकड़ के पंडाल में मंत्र जाप

इंदौर में इस बार अब तक का सबसे बड़ा पंडाल 25 एकड़ में लगाया गया है। पंडाल में माता के अलावा 12 ज्योतिर्लिंग की प्रतिकृति बनाई गई है। इसे तीन महीने में 550 से ज्यादा कारीगरों और विशेषज्ञों ने तैयार किया है। यहां 11 हजार स्वर्ण-लेपित अष्टलक्ष्मी कलश को 1 करोड़ मंत्र जाप, 1 करोड़ कुमकुम अर्चन और 10 लाख आहूतियों से सिद्ध किया जाएगा।

सभी 11,000 कलशों में से हर कलश में महालक्ष्मी को आकर्षित करने के लिए विभिन्न थैलियों में दिव्य वस्तुएं रखी जाएंगी। इनमें दक्षिणावर्ती शंख, नव रत्न, 32 प्रकार के उपरत्न, 32 प्रकार के रत्न, दो दुर्लभ रुद्राक्ष, 999 शुद्धता वाला महालक्ष्मी मुद्रित 5 ग्राम का चांदी का सिक्का, पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल, कांसा), 154 प्रकार की दुर्लभ औषधियां और ऐसी कुल 451 दिव्य सामग्रियां शामिल होंगी।

उज्जैन : पंडाल के अंदर गुफा से ही दर्शन

उज्जैन आगर रोड सामाजिक न्याय परिसर में सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा अपने पिता की स्मृति में कराए जा रहे बीएफएफ गरबा के लिए 50 हजार स्क्वायर फीट में बड़ा पंडाल बनाया गया है। नवरात्र के दौरान 40 से 50 लाख रुपए तक का खर्च होने के अनुमान है।

समिति के पुनीत जैन ने बताया कि गरबा पंडाल में वैष्णोदेवी की तर्ज पर करीब 300 फीट लंबी गुफा बनाई गई हैं, जिसमें सोमवार को वैष्णो माता के साथ नवदुर्गा भी स्थापित की गई हैं। जबलपुर से आए कलाकारों ने 15 दिन में गुफा बनाई है।

यह गुफा विशेष मटेरियल से 20 कर्मचारियों ने 15 दिन मशक्कत कर बनाई है। पंडाल में 9 देवियों की प्रतिमा है। संस्था का उद्देश्य है कि कई लोग वैष्णो देवी नहीं जा पाते, इसलिए यहीं पर उन्हें माता के दर्शन कर यह अनुभूति हो।

पंडाल में रोजाना फलहारी खिचड़ी और एनर्जी ड्रिंक भी नि:शुल्क बांटे जा रहे हैं। पंडाल में आने वाली युवतियों की सुरक्षा के लिए 40 बाउंसर सहित अन्य महिला सुरक्षाकर्मी और सफाईकर्मी भी लगाए गए हैं।

ग्वालियर के मुरार स्थित खटीक मोहल्ले में बेहद बड़ा और आकर्षक पंडाल सजाया गया है। पंडाल 40x125 फीट (लगभग 5000 स्क्वायर फीट) का है, जिसमें एक साथ 200 से 250 भक्तों के बैठने की व्यवस्था है। माता जिस स्थान पर विराजमान हैं, वह मंच 30x30 फीट (900 स्क्वायर फीट) का है, जहां 9 फीट ऊंची मां काली की प्रतिमा विराजमान है।

जय मां काली खटीक उत्सव समिति के अध्यक्ष दीपक डंडा ने बताया कि यह आयोजन पिछले सात सालों से निरंतर किया जा रहा है। नवमी तिथि को विशाल भंडारे का आयोजन होता है। ज्यादातर जगहों पर प्रतिमाओं का विसर्जन नवमी को ही कर दिया जाता है, यहां मां काली की प्रतिमा का विसर्जन दशहरे के दिन किया जाता है।

यहां गरबा-डांडिया, मटकी फोड़ प्रतियोगिता और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों की धूम रहती है। जैसे ही दशहरे के दिन मां काली का विसर्जन होता है, मोहल्ला एकाएक सूना हो जाता है।



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