एम्स भोपाल के डॉक्टर को नेशनल रिसर्च ग्रांट:​​​​​​​अब रूमेटाइड आर्थराइटिस मरीजों के लिए तैयार होगा पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट मॉडल

Updated on 22-10-2025 01:49 PM

एम्स भोपाल के डॉक्टर सुनील पाटीदार को रूमेटाइड आर्थराइटिस के मरीजों के लिए एक नई दिशा तय करने वाले रिसर्च के लिए भारतीय रूमेटोलॉजी एसोसिएशन से दो लाख रुपए का राष्ट्रीय रिसर्च अनुदान मिला है। उनका यह रिसर्च इस बात पर केंद्रित है कि कौन-से मरीजों पर "मेथोट्रेक्सेट" नामक दवा सबसे अधिक असरदार साबित होती है।

यह दवा आर्थराइटिस के उपचार में सबसे सामान्य रूप से दी जाती है, लेकिन हर मरीज पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। इस रिसर्च से डॉक्टरों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन मरीजों को यह दवा देना अधिक प्रभावी रहेगा, जिससे भविष्य में पर्सनलाइज्ड और सटीक इलाज का रास्ता खुलेगा। यह अध्ययन एम्स भोपाल के जनरल मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर वैभव कुमार इंगले के मार्गदर्शन में किया जाएगा।

रूमेटाइड आर्थराइटिस के इलाज में नई दिशा एम्स भोपाल के जनरल मेडिसिन विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. सुनील पाटीदार का चयन भारतीय रूमेटोलॉजी एसोसिएशन द्वारा “नेशनल रिसर्च ग्रांट” के लिए किया गया है। उन्हें दो लाख रुपए का अनुदान “Metabolomic Profiling for Predicting Methotrexate Response in Rheumatoid Arthritis Patients: A Prospective Cohort Pilot Study” शीर्षक वाले रिसर्च के लिए प्रदान किया गया है।

रिसर्च से तय होगा कौन-से मरीज पर दवा कारगर डॉ. पाटीदार का रिसर्च इस दिशा में है कि रूमेटाइड आर्थराइटिस के मरीजों में “मेथोट्रेक्सेट” दवा का असर हर व्यक्ति पर क्यों अलग होता है। इसके लिए ‘मेटाबोलोमिक प्रोफाइलिंग’ तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जो शरीर में मौजूद सूक्ष्म रासायनिक तत्वों का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाएगी कि मरीज की बॉडी दवा पर कैसी प्रतिक्रिया देगी।

लाखों मरीजों को मिलेगा फायदा रूमेटाइड आर्थराइटिस एक पुरानी सूजन संबंधी बीमारी है, जो जोड़ों में दर्द, सूजन और चलने-फिरने की क्षमता में कमी का कारण बनती है। इस रिसर्च के नतीजे आने वाले समय में इस बीमारी के मरीजों को सटीक और व्यक्तिगत इलाज की सुविधा देंगे। यानी हर मरीज के शरीर की स्थिति के अनुसार उपचार तय किया जा सकेगा। इससे न केवल दवा के दुष्प्रभाव कम होंगे बल्कि इलाज के परिणाम भी अधिक प्रभावी होंगे।

एम्स भोपाल की रिसर्च दिशा में उपलब्धि प्रो. वैभव इंगले ने कहा कि यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गर्व का विषय है बल्कि मध्यप्रदेश में उच्च स्तरीय चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने वाला उदाहरण भी है। यह अध्ययन मेडिकल साइंस में ‘प्रिसिजन मेडिसिन’ (Precision Medicine) की दिशा में अहम योगदान देगा।



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