नागपुर कैसे टॉयलेट का पानी बेच कर साल में 300 करोड़ कमा रहा है, नितिन गडकरी ने बताया

Updated on 28-03-2025 01:43 PM
नई दिल्ली: टॉयलेट (Toilet) का इस्तेमाल सभी करते हैं। लेकिन इसके पानी से कमाई का विचार कभी आपके मन में आया? नहीं आया ना। लेकिन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के दिमाग में यह विचार कौंधा और इसे मूर्त रूप दे दिया। अब इस टॉयलेट के पानी से नागपुर शहर को हर साल करीब 300 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है।

मथुरा में हुआ पहला प्रयोग


गडकरी ने बीते दिनों यहां एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि टॉयलेट के पानी से कमाई का पहला प्रोजेक्ट यूपी के मथुरा में शुरू किया गया था। वहां गंदे पानी को साफ किया गया। फिर उस साफ पानी को इंडियन ऑयल (IOC) की मथुरा रिफाइनरी को 20 करोड़ रुपये में बेच दिया। गडकरी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में सरकार ने 40% पैसा लगाया था और निवेशकों ने 60%। उन्होंने कहा, "मथुरा में 90 MLD (मिलियन लीटर पर डे) गंदा पानी था। जब मैं जल संसाधन मंत्री था, तब हमने एक प्रोजेक्ट शुरू किया। इसमें 40% पैसा सरकार का था और 60% निवेशकों का। हमने गंदे पानी को साफ किया और उसे इंडियन ऑयल रिफाइनरी को बेच दिया।

इंडियन ऑयल से बात हुई

उन्होंने आगे बताया, "मैंने इंडियन ऑयल (Indian Oil) के चेयरमैन से पूछा कि आपको कितना पानी चाहिए और आप कितना पैसा देंगे? उन्होंने बताया कि वे उत्तर प्रदेश सरकार से पानी लेते हैं और उन्हें हर साल 25 करोड़ रुपये देते हैं।" गडकरी ने कहा कि उन्होंने इंडियन ऑयल के चेयरमैन को उतना ही साफ पानी 20 करोड़ रुपये में देने का प्रस्ताव दिया। जबकि कंपनी वही पानी उत्तर प्रदेश सरकार से 25 करोड़ रुपये में खरीद रही थी

नागपुर में 300 करोड़ की कमाई

उन्होंने नागपुर शहर का जिक्र करते हुए कहा, "आपको विश्वास नहीं होगा, हम टॉयलेट का पानी बेचकर हर साल 300 करोड़ रुपये कमाते हैं। यह बहुत ही दिलचस्प है। अगर हर शहर में इस पानी को रीसायकल करके इंडस्ट्री इस्तेमाल करे, तो कचरा प्रबंधन बहुत अच्छे से हो सकता है।" उन्होंने यह भी कहा कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन होगा। उन्होंने कहा, "कचरे को अलग करके, जैसे कांच, धातु, प्लास्टिक को रीसायकल किया जाएगा। ऑर्गेनिक कचरे को बायो डाइजेस्टर में डाला जाएगा। इससे मीथेन गैस निकलेगी। मीथेन से CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) को अलग किया जाएगा और हाइड्रोजन निकलेगा।"

हाइड्रोजन कार में चलते हैं


गडकरी ने यह भी बताया कि वे हाइड्रोजन कार में चलते हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पास जो हाइड्रोजन कार है, उसका नाम मिराई (Mirai) है।" उन्होंने मिराई का मतलब भी समझाया। "मिराई एक जापानी शब्द है। मिराई का मतलब होता है भविष्य। इसलिए, हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। अगर हम हाइड्रोजन को सफलतापूर्वक और सस्ते में बना लेते हैं, तो आज हम जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) आयात करने में 22 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं, वह बच जाएगा।"


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