अमेरिकी प्रतिबंधों का भी डर नहीं, रूस से पैंटसिर मिसाइल सिस्टम खरीद रहा सऊदी अरब, भारत की नकल पड़ेगी भारी?

Updated on 28-10-2024 01:43 PM
रियाद/मॉस्को: मध्य पूर्व में अमेरिका का एक करीबी सहयोगी रूस के पाले में जाता दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब और मॉस्को के बीच एक बड़ा रक्षा सौदा हो रहा है। यूक्रेनी डिफेंस आउटलेट ने डिफेंस एक्सप्रेस ने रूस में अनौपचारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब रूस से पैंटरिस एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल और आर्टिलरी सिस्टम खरीद रहा है। अगर इसकी पुष्टि होती है तो ये साफ है कि अब सऊदी अरब को भी तुर्की की तरह ही अमेरिकी प्रतिबंधों की परवाह नहीं है।

अमेरिकी F-35 कार्यक्रम से बाहर हो गया था तुर्की


रूसी हथियारों की खरीद के खिलाफ अमेरिका ने CAASTA कानून के तहत प्रतिबंधों की घोषणा कर रखी है। इसके पहले अमेरिका ने इसी कानून के तहत तुर्की के खिलाफ कार्रवाई की थी। अमेरिका ने रूसी S-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने पर तुर्की को एफ-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया था।

डिफेंस एक्सप्रेस ने रिपोर्ट में सऊदी सरकारी पत्रिका का हवाला दिया गया है, जिसमें सऊदी वायु रक्षा बलों के भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालने वाला लेख छपा है। इस लेख नई वायु रक्षा प्रणालियों की शुरुआत को लेकर विस्तार से चर्चा की गई है, जिसमें रूसी पैंटसिर मिसाइल भी शामिल है।

अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा


पैंटसिर को चीनी निर्मित साइंलेंट हंडर एंटी-ड्रोन लेजर हथियार, अमेरिका थाड मिसाइल सिस्टम, थेल्स शिकरा निगरानी रडार, एड्रियन सिग्नल इंटेलिजेंस कॉम्प्लेक्स और लाइटनिंग शील्ड एंटी ड्रोन गन के साथ सूचीबद्ध किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि रियाद की मॉस्को से हथियार खरीद निश्चित है। अगर ऐसा है तो सऊदी अरब के ऊपर अमेरिका के प्रतिबंधों का खतरा खड़ा हो जाता है।

रूस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तुर्की इसके पहले इन प्रतिबंधों का शिकार हो चुका है। अमेरिका तुर्की को F-35 देने पर विचार कर रहा था, लेकिन 2019 में मॉस्को से एस-400 खरीदने के लिए अंकारा को कार्यक्रम से हटा दिया गया। अगले साल अमेरिका ने CAASTA कानून को लागू किया, जिसके बाद तुर्की रक्षा उद्योग की प्रौद्योगिकियों पर प्रतिबंध, कर्ज पर प्रतिबंध और व्यक्तिगत प्रतिबंध शामिल थे।

भारत की बराबरी करना चाहता है सऊदी?


हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंध सबके लिए बराबर नहीं है। भारत ने भी रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा है, लेकिन अमेरिका ने इसे नजरअंदाज किया है। इस खरीद के बाद भी भारत और अमेरिका एक दूसरे के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत दक्षिण एशिया में चीन का प्रतिद्वंद्वी है। ऐसे में भारत को लेकर वॉशिंगटन के फैसले को अपवाद के रूप में देखा जा रहा है। अब सऊदी अरब भी ऐसा ही अपवाद बनना चाहता है।

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