UNSC में किसी नए देश को न मिले वीटो पावर, पाकिस्तान का भारत के खिलाफ हमला, सिंधु जल संधि पर रोया

Updated on 23-01-2026 12:24 PM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए बढ़ते समर्थन को देखकर पाकिस्तान बौखला गया है। अब पाकिस्तान खुलकर इसके खिलाफ अपनी नापाक चालें चलने में जुट गया है। पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में संभावित रूप से शामिल होने वाले देशों को वीटो पावर दिए जाने का विरोध किया है। इसके साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र के मंच से एक बार फिर सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने का मुद्दा उठाया और भारत के इस कदम को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। भारत ने पिछले साल कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल को सिंधु जल संधि पर रोक लगा दी थी।

गुरुवार को इंटरनेशल लॉ ईयर इन रिव्यू 2026 कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि संधियों का चुनिंदा पालन और अंतरराष्ट्रीय कानून का असमान अनुप्रयोग संयुक्त राष्ट्र की नींव को कमजोर कर रहा है। पाकिस्तानी दूत ने कहा कि संधियों को चुनिंदा रूप से मानने या कानूनी अपवाद के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

सिंधु जल संधि का उठाया मुद्दा

पाकस्तान प्रतिनिधि ने कहा कि बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते को न मानना संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के लिए सीधी चुनौती है। आसिम ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के कदम का जिक्र किया और कहा कि ऐसे काम एक परेशान करने वाले रुझान को दिखाते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून में विश्वास को कमजोर करते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा करते हैं।

नए सदस्यों को वीटो का विरोध

पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर बोलते हुए स्थायी सदस्यता के विस्तार और नए देशों को वीटो दिए जाने का विरोध किया। यह पाकिस्तान का नई दिल्ली के लिए सीधा विरोध था। हालांकि, उन्होंने भारत का नाम नहीं लिया। पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि कोई भी सुधार ऐसे नहीं होने चाहिए जो स्थायी सदस्यता और वीटो में निहित मौलिक दोषों को और खराब करेंगे। इस दौरान आसिम ने संयुक्त राष्ट्र को लेकर कहा कि यह संस्था अभी भी बड़े पैमाने पर वैधता रखती है।

स्थायी सदस्यता पर भारत की मजबूत दावेदारी

भारत लंबे समय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है और जिसमें अपने लिए स्थायी सदस्यता की मांग शामिल है। भारत ने लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे पर सवाल उठाए हैं। भारत का कहना है कि UNSC का मौजूदा ढांचा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वाले शक्ति संतुलन पर आधारित है, जबकि दुनिया अब पूरी तरह से बदल चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने तर्क दिया है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और दक्षिण एशिया का प्रमुख देश होने के नाते स्थायी सदस्यता उसे मिलनी चाहिए। भारत को स्थायी सीट के लिए ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के साथ ही अमेरिका का भी समर्थन हासिल है।

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