
पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर ने बताया कि शहर में अपराधों का ग्राफ और अधिक घटाने के लिए कमिश्नर कोर्ट के माध्यम से प्रतिबंधात्म धाराओं में की गई कार्रवाई और बोंड उल्लंघन करने वालों से बांड राशि की वसूली की जाएगी। इतना ही नहीं अदत्न अपराधियों की जमानत लेने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल पुलिस कमिश्नर कोर्ट में थाना प्रभारी इस्तगासा भेजते है। अनआवेदक से जवाब मांगकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है। अगर अपराध सिद्ध पाया जाता है तो उससे बॉन्ड भरावाया जाता है। अगर कोई बॉन्ड का उल्लंघन करता है तो उसको जेल भेज दिया जाता है। कमिश्नर कोर्ट में आरोपी को अपनी पैरवी करने के लिए वकील को लाने का अधिकार होता है।
हालांकि किसी भी विटनेस का क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं किया जाता है। एसीपी और डीसीपी कोर्ट समानांतर चलती है। इसकी अपील सीधे सेशन कोर्ट में रहती है। हमारा मकसद किसी को जेल भिजवाना नहीं है, हमारा उद्देश्य आपराधिक घटनाओं को रोकना है।
कमिश्नर आॅफिस से पूरे एक वर्ष में जेल में बंद कैदियों को अब तक महज नौ दी गई हैं। आदतन अपराधी और पॉक्सो एक्ट में सजा काट रहे कैदियों को कमिश्नर पैरोल नहीं दी जाती है। बाकि हत्या और हत्या के प्रयास मामले में पैरोल दे दी जाती है। साथ ही पहले ही अपराध में सजा काट रहे कैदियों को भी कमिश्नर पैरोल दे दी जाती है।