विक्रम विश्वविद्यालय की पीएचडी चयन परीक्षा कराने से एनटीए का इंकार

Updated on 21-07-2023 03:28 PM
 उज्जैन। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कामन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूइटी) के माध्यम से विक्रम विश्वविद्यालय की पीएचडी चयन परीक्षा-2023 कराने से इंकार कर दिया है। अब विश्वविद्यालय ने परंपरागत रूप से अपने स्तर पर अक्टूबर में परीक्षा कराने का प्रस्ताव तैयार किया है। चयन के लिए लगभग 335 सीटों का निर्धारित किया है। कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांडेय ने नईदुनिया से कहा है कि परीक्षा ओएमआर शीट पर ली जाएगी। इस बार मूल्यांकन मैन्यूअली न कराकर मशीन के जरिये कराया जाएगा।

मालूम हो कि महीनेभर पहले विक्रम विश्वविद्यालय ने इस वर्ष की पीएचडी चयन परीक्षा सीयूइटी के माध्यम से कराने के लिए एनटीए को पत्र भेजा था। कारण, गत वर्ष विश्वविद्यालय द्वारा ली परीक्षा की ओएमआर शीट में काट-छांट कर अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों को उत्तीर्ण दर्शाने का मामला उजागर होना और कुलसचिव, सहायक कुलसचिव सहित पांच लोगों पर लोकायुक्त द्वारा एफआइआर दर्ज होना रही। हालांकि इस मामले में तीन विद्यार्थियों पर भी केस दर्ज होने से अब आरोपितों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। लोकायुक्त जल्द ही कोर्ट में चालान प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।


पिछले वर्ष मार्च में हुई थी परीक्षा

पिछले वर्ष विक्रम विश्वविद्यालय ने पीएचडी की रिक्त 422 सीटों पर दाखिले के लिए चयन परीक्षा 6 मार्च को करवा ली थी। तब 28 फरवरी तक परीक्षा आवेदन फार्म जमा करवाए गए थे। कुलपति के हस्ताक्षर होते ही पीएचडी चयन परीक्षा की अधिसूचना जारी होने की बात विश्वविद्यालय ने कही है।

ये बातें भी जानिये

- विक्रम विश्वविद्यालय रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 में 1250 सीटों पर प्रवेश के लिए परीक्षा हुई थी। इसके बाद निदेशकों की संख्या घटने से सीटों की संख्या घटती चली गई। वर्ष 2020 में 118, वर्ष 2021 में 216, वर्ष 2022 में 422 सीटों पर दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा हुई थी। अभी विश्वविद्यालय में रिसर्च गाइड की संख्या 136 के आसपास है।

- विश्वविद्यालय में पढ़ाने के लिए स्थायी प्रोफेसरों की भर्ती अंतिम बार वर्ष 2007 में हुई थी। उसके बाद आज तक नहीं हुई। स्थिति यह है कि कई प्रोफेसरों के सेवानिवृत्ति एवं दिवंगत होने से अब विश्वविद्यालय में स्वीकृत 161 प्रोफसरों के पद के मुकाबले 40 से भी कम प्रोफेसर विश्वविद्यालय में रह गए हैं। इंजीनियरिंग, एग्रीकल्चर सहित विभिन्न पाठ्यक्रम की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही चल रही है। इसका असर विश्वविद्यालय की साख पर पड़ रहा है।



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