ओडिशा सरकार ऑर्गन डोनेट करने वालों को राजकीय सम्मान देगी : CM नवीन पटनायक ने कहा अंगदान का निर्णय लेना साहसी और महान कार्य

Updated on 16-02-2024 12:47 PM

ओडिशा के CM नवीन पटनायक ने गुरुवार (15 फरवरी) को बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा है कि राज्य में ऑर्गन डोनेट करने वाले लोगों का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

CM कार्यालय ने एक बयान में कहा कि सरकार की पहल का उद्देश्य दूसरों की जान बचाने के लिए ऑर्गन डोनेट करने वालों के साहस और बलिदान का सम्मान करना है।

ऑर्गन डोनेशन का सम्मान करने से समाज में अंग दान के महत्व के बारे में जागरूकता फैलेगी। समाज से ज्यादा से ज्यादा लोग इसके लिए आगे आएंगे।

उन्होंने कहा कि यह महान कार्य है। किसी के ब्रेन डेड होने पर उसके परिवार द्वारा संबंधित व्यक्ति के ऑर्गन डोनेट का निर्णय लेना साहसी होता है। यह फैसला कई लोगों को नई जिंदगी देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा सरकार ने पहले ही 2019 में राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO ) की स्थापना की है। सरकार ने साल 2020 में ऑर्गन डोनेशन करने वालों के लिए सूरज पुरस्कार की स्थापना की थी।

ब्रेन डेड के ऑर्गन डोनेट किए, 6 लोगों की जान बची
कुछ समय पहले ओडिशा के गंजम जिले के भंजनगर के सूरज नाम का युवक सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल हुआ था। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया था। परिवार ने सूरज के ऑर्गन डोनेट का फैसला लिया था। इसके बाद 6 लोगों को सूरज के ऑर्गन डोनेट किए गए थे।

इस घटना के बाद ही ओडिशा सरकार ने सूरज पुरस्कार की स्थापना की थी। वहीं, ओडिशा सरकार ऑर्गन डोनेट करने वाले लोगों के परिवार को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपए भी देती है।

मन की बात कार्यक्रम में PM मोदी ने भी ऑर्गन डोनेशन की बात कही
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम 'मन की बात' के वर्ष 2024 के पहले एपिसोड में अंगदान के बारे में बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हमारे बीच ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो जीवन के अंत के बाद भी समाज के प्रति अपने दायित्वों को निभाते हैं और इसके लिए उनका माध्यम अंगदान होता है। हाल के वर्षों में देश में एक हजार से अधिक लोग ऐसे रहे हैं, जिन्होंने मृत्यु के बाद अपने अंगों का दान कर दिया। आज देश में बहुत से संगठन भी इस दिशा में बहुत प्रेरक प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा था कि अंगदान एक तरह से जीवन दान है। दुनिया से जा रहा व्यक्ति अपने पीछे किसी और को जिंदगी देकर जाता है, लेकिन हमारे देश में अंगदान को लेकर जागरूकता अभी कम है। ऑर्गन डोनेशन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल 5,00,000 लोगों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत है, जबकि सिर्फ 52,000 ऑर्गन उपलब्ध हैं। हर साल 2,00,000 कॉर्निअल डोनेशन की जरूरत है, ताकि नेत्रहीनों के जीवन में उजाला हो सके, लेकिन उपलब्ध सिर्फ 50,000 हैं। प्रत्येक 4 में से 3 व्यक्ति आंखों की रोशनी पाने के लिए डोनेशन का इंतजार कर रहा है।

अंगदान या ऑर्गन डोनेशन क्या है?
हमारे शरीर के कुछ अंग ऐसे होते हैं, जिनके खराब होने पर उन्हें रीप्लेस करके उसकी जगह दूसरा अंग लगाया जा सकता है। जैसे हार्ट, लिवर, किडनी, पैंक्रियाज, आंखों का कॉर्निया।

अंगदान किसी जीवित या मृत व्यक्ति के शरीर से किसी अंग विशेष को लेकर उसे जरूरतमंद व्यक्ति के शरीर में ट्रांसप्लांट करना है। अंगदान कर रहा व्यक्ति डोनर और उसे प्राप्त कर रहा व्यक्ति रिसीवर कहलाता है।

हमारे शरीर के कुछ हिस्से जैसे पार्शियल लिवर (लिवर का कुछ हिस्सा) और एक किडनी जीवित रहते हुए भी डोनेट की जा सकती है। इसके अलावा शरीर के बाकी हिस्से मृत्यु के तुरंत बाद कुछ घंटों तक काम करते रहते हैं। यदि उस दौरान उन अंगों को निकालकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति के शरीर में ट्रांसप्लांट किया जाए तो कइयों को जीवनदान मिल सकता है।

लिविंग ऑर्गन डोनेशन

लिविंग ऑर्गन डोनेशन में अंगदान कर रहे व्यक्ति को इन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है-

सबसे पहले डोनर के कुछ मेडिकल टेस्ट किए जाते हैं। यह जानने के लिए व्यक्ति डोनेशन के लिए उपयुक्त है।

इन टेस्ट में सबसे महत्वपूर्ण दो पहलू हैं। डोनर और रिसीवर की कंपैटिबिलिटी और डोनर की मेडिकल कंडीशन यानी उसका शारीरिक रूप से स्वस्थ होना।

सारे टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव होने और डॉक्टर के सर्टिफिकेट के बाद डोनर की बॉडी से डोनेट किया जा रहा हिस्सा सर्जिकली रिमूव किया जाता है और उसे रिसीवर की बॉडी में ट्रांसप्लांट किया जाता है।

डोनर को भी ऑर्गन डोनेशन के बाद कई हफ्तों में मेडिकल सुपरविजन में रखा जाता है।

मृत्युपर्यंत अंगदान
किसी भी कारण से हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद मृत व्यक्ति का अंगदान किया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है डोनर के परिवार की सहमति। उसके बाद मेडिकल सुपरविजन में मृत व्यक्ति के ट्रांसप्लांट किए जा सकने वाले अंगों को सर्जिकली रिमूव करके बॉडी ससम्मान मृत व्यक्ति के परिवार को लौटा दी जाती है।


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