होर्मुज में 'अंधे' होकर चल रहे तेल और LNG के टैंकर, भारत को गुप्त रास्ते से हो रही सप्लाई

Updated on 09-06-2026 01:42 PM
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार को ट्रैक करना अब बेहद मुश्किल हो गया है। विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला टैंकर ट्रैफिक युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में 90% से 95% तक गिर गया है।

हालांकि, इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से तेल की कुछ खेप अभी भी निकल रही हैं, लेकिन वे इतने गुप्त तरीके से जा रही हैं कि तेल और गैस के प्रवाह को ट्रैक करना और यह पता लगाना नामुमकिन हो गया है कि खरीदारों तक वास्तव में कितनी ऊर्जा आपूर्ति पहुंच रही है।

क्या है डार्क-मोड रणनीति?

शिपिंग डेटा के विश्लेषण के अनुसार, अधिकांश तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में काम कर रहे हैं। यानी वे होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते समय या फारस की खाड़ी में माल लादने के लिए प्रवेश करते समय अपने ट्रांसपोंडर (AIS - ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) को बंद कर देते हैं।
ऑयलप्राइस के मुताबिक पहले इस रणनीति का इस्तेमाल केवल ईरान से जुड़े जहाज प्रतिबंधों से बचने के लिए करते थे। लेकिन अब यह आम कमर्शियल जहाजों के लिए भी सामान्य बात हो गई है। मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57% जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे और मई में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 65.2% तक पहुंच गया।

भारत समेत कई देशों को गुप्त रूप से सप्लाई

  • इस संकट के बीच भी पाकिस्तान, भारत और चीन जैसे एशियाई खरीदारों के लिए गुप्त रास्तों से तेल की खेप लगातार भेजी जा रही है।
  • माना जा रहा है कि इसके लिए ईरान की ओर से स्वीकृत रास्तों और कॉरिडोर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • ऐसा इसलिए क्योंकि इस समुद्री रास्ते पर अब पूरी तरह से ईरान का नियंत्रण मजबूत हो चुका है।

सामान्य होने की उम्मीदें टूटीं

शुरुआत में बाजार के विश्लेषक मान रहे थे कि मई तक यह युद्ध समाप्त हो जाएगा और जून से होर्मुज जलडमरूमध्य का ट्रैफिक सामान्य होने लगेगा। लेकिन युद्ध अब चौथे महीने में प्रवेश कर चुका है और स्थिति सामान्य होने से कोसों दूर है। जानकारों का कहना है कि यह रूट अब वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए कभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाएगा, क्योंकि भविष्य में किसी भी समझौते के बाद भी ईरान इस रास्ते पर अपना परिचालन नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।

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