दिवाली के मौके पर स्विगी से मंगाया 'मटर मशरूम' डिलीवर हुआ 'तंदूरी चिकन क्लासिक' फिर जो हुआ...

Updated on 22-10-2025 02:36 PM
नई दिल्ली: आप शाकाहारी हैं। दिवाली के दिन आप किसी अच्छे रेस्टोरेंट का खाना मंगाना चाहते हैं। स्विगी (Swiggy) से आर्डर भी प्लेस कर देते हैं। लेकिन आपको डिलीवरी ब्वॉय जो खाना डिलीवर किया वह शाकाहारी नहीं मांसाहारी हो, तो फिर क्या हो? ऐसा ही कुछ कोलकाता में रहने वाले सुमित अग्रवाल के साथ हुआ। उन्होंने इस बावत लिंक्डइन पर एक पोस्ट लिखा है।

पूरा परिवार हिल गया

पश्चिम बंगाल के एक लिंक्डइन यूजर, सुमित अग्रवाल, ने दिवाली के मौके पर स्विगी से हुए एक ऑर्डर की गलती के बारे में बताया है। उसका कहना है कि स्विगी की यह गलती उनके परिवार को "हिलाकर" रख दिया। सुमित ने बताया है कि उन्होंने 'रंग दे बसंती ढाबा' से 'मटर मशरूम' ऑर्डर किया था। लेकिन, उन्हें 'तंदूरी चिकन क्लासिक' डिलीवर हुआ। सुमित ने यह भी बताया कि उनका परिवार मारवाड़ी है और उन्होंने बताया कि इस घटना से उनके परिवार वालों पर क्या बीती

सिर्फ डिलीवरी की गलती नहीं

उन्होंने लिखा, "यह सिर्फ एक डिलीवरी की गलती नहीं है। यह भावनात्मक आघात है। मेरी मां, जो शादी के बाद से शुद्ध शाकाहारी रही हैं, वे बुरी तरह हिल गईं। सोचिए, पूजा के बाद आप अपना खाना खोलें, एक शाकाहारी व्यंजन की उम्मीद कर रहे हों - और आपको मांस मिले। वह सदमा। वह अविश्वास। और उसके बाद की खामोशी।" सुमित ने इस बात पर जोर दिया कि यह घटना इसलिए गंभीर है क्योंकि खाना सिर्फ खाना नहीं होता। उन्होंने कहा, "हममें से कई लोगों के लिए, खाना सिर्फ खाना नहीं है। यह आस्था, पवित्रता और परंपरा की अभिव्यक्ति है। यह वह तरीका है जिससे हम अपनी मान्यताओं का सम्मान करते हैं। मैं समझता हूँ कि गलतियाँ होती हैं। लेकिन कुछ गलतियाँ बहुत अलग तरह से चोट पहुँचाती हैं - क्योंकि वे भावनात्मक और सांस्कृतिक सीमाओं को पार कर जाती हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मैं यह गुस्से में नहीं बता रहा हूं। मैं यह इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मुझे उम्मीद है कि स्विगी और रंग दे बसंती ढाबा इसे गंभीरता से लेंगे।"

भोजन बेहद व्यक्तिगत मामला

सुमित ने इस घटना को भारत में खान-पान और आहार संबंधी परंपराओं के बड़े संदर्भ से भी जोड़ा। उनके अनुसार, ऐसी गलतियों का व्यक्तिगत स्तर पर गहरा असर पड़ता है, जिसके कई कारण हैं। उन्होंने समझाया, "हम एक विविध देश में रहते हैं - जहाँ आस्था और भोजन बहुत व्यक्तिगत होते हैं, और उस विविधता का सम्मान करना महत्वपूर्ण है। समावेशिता (Inclusion) सिर्फ पहुंच (Accessibility) के बारे में नहीं है। यह सांस्कृतिक संवेदनशीलता (Cultural Sensitivity) के बारे में भी है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसा किसी और परिवार के साथ न हो। उन्होंने कहा, "क्योंकि कभी-कभी, जो आपकी प्लेट में परोसा जाता है, वह स्वाद से कहीं ज़्यादा चोट पहुंचा सकता है। यह सिर्फ़ खाने की बात नहीं है। यह आस्था और सम्मान की बात है।"

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