11 दिन से वेंटिलेटर पर डेढ़ साल की धानी:किडनी ने काम करना बंद किया, दिमाग तक पहुंचा जहर

Updated on 05-10-2025 07:22 PM

मेरी बेटी सिर्फ डेढ़ साल की है। 4 दिन तक डॉक्टर की बताई दवा पिलाई। अब वह 11 दिन से वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है।

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ये शब्द हैं छिंदवाड़ा जिले के जूनापानी गांव के नवीन देहरिया के। उनकी मासूम बेटी धानी जहरीले सिरप का शिकार हो गई। नवीन ने कहा कि धानी की किडनी काम करना बंद कर चुकी है और अब जहर उसके दिमाग तक पहुंच चुका है।

शरीर पर अब किसी भी दवा या गोली का असर नहीं हो रहा। यहां नागपुर में डॉक्टर कह रहे हैं कि बीमारी के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। अस्पताल के गलियारों का सन्नाटा और धानी की बिगड़ती सेहत हर बीतते पल के साथ हमारी उम्मीदें तोड़ रही हैं।

बता दें, नागपुर के परासिया क्षेत्र के ही चार और बच्चे भर्ती हैं। सभी बच्चों की हालत लगभग एक जैसी है। सभी के परिजन वहां असहाय बैठे हैं। छिंदवाड़ा जिले का यह मामला न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश की दवा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।

12 दिन में बदल चुके 4 अस्पताल नवीन देहरिया ने बताया कि सबसे पहले 24 सितंबर को बेटी को बुखार आया। वे इलाज के लिए परासिया के स्पेशलिस्ट डॉ. प्रवीण सोनी के पास गए। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। खांसी की शिकायत होने पर डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ सिरप दिया।

नवीन के अनुसार, चार दिन तक वही सिरप पिलाया और साथ में डेंगू के इंजेक्शन लगे। लेकिन, 28 सितंबर की रात अचानक बच्ची को उल्टी आने लगी। हमने फिर डॉ. सोनी को दिखाया, उन्होंने कहा कि किडनी में इन्फेक्शन है और हमें परासिया के सरकारी अस्पताल भेज दिया।

वहां से हमें छिंदवाड़ा भेज दिया गया। टेस्ट हुए और किडनी की समस्या पाई गई। इसके बाद धानी को छिंदवाड़ा से नागपुर रेफर कर दिया गया। तब से हम यहीं हैं लेकिन बच्ची को एक प्रतिशत भी आराम नहीं मिला है।

पिता का दर्द- ना नेता, ना अधिकारी ने पूछा हाल नवीन देहरिया का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अब तक किसी अधिकारी या नेता ने फोन तक नहीं किया। सरकार कह रही है कि फार्मा कंपनियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन हम जानते हैं कि दोषी लोग पैसे भरकर छूट जाएंगे और बच्चों की जान का कोई मोल नहीं रहेगा। सरकार को अब सिर्फ बयान नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने चाहिए।

गाइडलाइन 0.1%, लेकिन मिला 48.6% जहरीला केमिकल मध्यप्रदेश एफडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गाइडलाइन के अनुसार कफ सिरप में अधिकतम 0.1 प्रतिशत डाईथाइलीन ग्लॉयकाल की मौजूदगी स्वीकार्य है। लेकिन जांच में सामने आया कि कोल्ड्रिफ सिरप में यह मात्रा 48.6 प्रतिशत थी। यह बेहद घातक और जानलेवा स्तर है, जिससे किडनी फेल और ब्रेन डैमेज जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं।



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