बलरामपुर के कोरंधा से पौने 2 करोड़ की अफीम जब्त:मसाले की आड़ में खेती

Updated on 13-03-2026 12:35 PM
बलरामपुर, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कोरंधा में पुलिस ने करीब ढाई एकड़ में लगी अफीम उखाड़कर जब्त की है। यहां से 285 बोरे अफीम के पौधे बरामद हुए, जिनका वजन 18 क्विंटल है। इनकी अनुमानित कीमत पौने दो करोड़ रुपए बताई जा रही है। मामला कोरंधा थाना क्षेत्र का है।

दरअसल, बुधवार शाम को खजूरी गांव में अफीम की खेती का पता चला था। गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फसल उखाड़कर जब्त की गई। तीन ट्रैक्टरों में 285 बोरे अफीम को कोरंधा थाना लाया गया। इस मामले में अफीम की खेती करने वाले 2 किसानों को हिरासत में लिया गया है।

फिलहाल, हिरासत में लिए गए किसानों से पुलिस पूछताछ कर रही है। उनका कहना है कि वे अफीम को नहीं पहचानते थे। इस कारण उन्हें नहीं पता था कि यह गैर कानूनी है। जांच में सामने आया कि किसान ने हर साल 6 हजार रुपए देने की शर्त पर जमीन ली थी। बता दें कि कुसमी के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है।

जानिए अफीम की खेती करने वाले किसानों ने क्या कहा ?

मामले में पुलिस ने अफीम की खेती करने वाले किसानों सहादुर नगेशिया और टुईला राम को हिरासत में लिया है। टुईला राम का अपना खेत नहीं है। उसने गांव के ही किसान रोपना से छह हजार रुपए में खेती के लिए जमीन बंधक पर ली थी।

दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चतरा निवासी भूपेंद्र उरांव ने उनसे संपर्क किया था। उसने कहा था कि वे मसाले की खेती करेंगे। टुईला राम ने बताया कि उसने पहले अपने खेत में मक्का बोया था, लेकिन मक्के की फसल नहीं हुई।

कुछ हिस्से में सरसों की खेती की थी, जिससे थोड़ा लाभ मिला था। इसी दौरान भूपेंद्र उरांव ने उनसे संपर्क कर मसाले की खेती करने का प्रस्ताव दिया और कहा कि इसमें अच्छी आमदनी होगी। फसल कटने के बाद मुनाफे का हिस्सा उन्हें दिया जाएगा।

इस भरोसे पर वे तैयार हो गए। सहादुर नगेशिया का अपना खेत है। उसे भी मसाले की खेती बताकर तैयार किया गया। दोनों किसानों का कहना है कि उन्हें अब तक इस खेती के बदले कोई पैसा नहीं मिला है।

झारखंड के मजदूर करते थे पहरेदारी

अफीम की फसल दो किस्तों में बोई गई थी। इनमें सहादुर नगेशिया के खेत में लगी अफीम की फसल सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है, उसके खेत में लगे अफीम के डोडों पर छह से सात चीरे लगे हुए मिले, जिससे स्पष्ट है कि उनसे काफी मात्रा में अफीम निकाली जा चुकी थी।

टुईला राम के खेत में बोई गई अफीम की फसल में अभी डोडे लगे हुए हैं और कुछ पौधों में डोडे लग रहे हैं। कई डोडों में चीरा भी लगाया गया था और उनसे अफीम निकालने का काम किया जा रहा था। हालांकि, यहां से निकाली गई अफीम बरामद नहीं हो सकी है।

दोनों किसानों ने बताया कि झारखंड के चार से पांच लोग अफीम की पहरेदारी सहित अन्य काम करते थे। खेतों में काम भी वही लोग करते थे। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे मौके से फरार हो गए। किसानों का कहना है कि वे अफीम की फसल को पहचानते नहीं थे, इसलिए उन्हें यह भी पता नहीं था कि इसकी खेती गैरकानूनी है।

इसके अलावा अफीम की खेती के लिए पास के प्राकृतिक जल स्रोत से पानी खेतों तक पहुंचाया जाता था। इसके लिए पाइप लगाकर खेतों में सिंचाई की व्यवस्था की गई थी।

पहाड़ की तराई में जंगल के बीच खेती

खजुरी के तुर्रीपानी में जहां अफीम की खेती की गई थी, वहां से झारखंड की सीमा मात्र डेढ़ किलोमीटर दूर है। खजुरी से पहाड़ पर चढ़ने के बाद दूसरी ओर तराई में उतरकर करीब डेढ़ किलोमीटर चलने पर किसानों के खेत स्थित हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इलाका काफी दूर और दुर्गम होने के कारण वहां आमतौर पर लोगों का आना-जाना नहीं होता। गांव की पटवारी भी महिला हैं, जो अब तक उस क्षेत्र में नहीं गई हैं। राजस्व विभाग की गिरदावरी में इन जमीनों पर किसी अन्य फसल का उल्लेख किया गया है।

झारखंड के लोगों की संलिप्तता की भी जांच

इस पूरे मामले में बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। अफीम की खेती में झारखंड के लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

झारखंड में सैटेलाइट से निगरानी, छत्तीसगढ़ में कराई खेती

बलरामपुर के त्रिशुली में 3.67 एकड़ और कोरंधा के खजुरी में करीब ढाई एकड़ में अफीम की फसल जब्त की गई है। दोनों ही इलाके झारखंड की सीमा से लगे हुए हैं। झारखंड में पिछले कई वर्षों से अफीम की खेती के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और वहां सैटेलाइट के जरिए भी निगरानी की जाती है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी सख्ती के कारण तस्करों ने सरहद से लगे बलरामपुर जिले के दूरस्थ इलाकों को अफीम की खेती के लिए चुना। अब जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अफीम की खेती की आशंका को देखते हुए सर्वे कराया जा रहा है।


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