शहबाज ने कॉटन के आयात को नहीं दी मंजूरी
ताजा रिपोर्ट में खुलासा है कि टेक्सटाइल उद्योग से 70 लाख लोगों की नौकरियां गई हैं। यही नहीं पाकिस्तान की कंगाल सरकार ने कॉटन इंडस्ट्री की मदद की बजाय उसके ऊपर और ज्यादा टैक्स लगा दिया। पाकिस्तान में यह टेक्सटाइल उद्योग का संकट ऐसे समय पर आया है जब यह देश विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी और रेकॉर्ड महंगाई का सामना कर रहा है। कॉटन उद्योग कच्चा माल तक नहीं खरीद पा रहा है। इससे वह विदेशी कस्टमर की मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है।
कराची बंदरगाह पर हजारों की तादाद में शिपिंग कंटेनर खड़े हैं। पाकिस्तान उनको उतारने के लिए डॉलर तक नहीं दे पा रहा है। अब खतरा यह मंडरा रहा है आने वाले समय में करोड़ों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं। पाकिस्तान में आई बाढ़ ने हालात को और खराब कर दिया है। इससे पहले पिछले साल पाकिस्तान के कॉटन उद्योग ने भारत से आयात की मांग की थी। शहबाज सरकार ने इमरान खान के सियासी खतरे को देखते हुए इसकी मंजूरी नहीं दी थी। पाकिस्तान के पास बंपर निर्यात का ऑर्डर था लेकिन वह पूरा नहीं कर पा रहा है। पाकिस्तान में 25 फीसदी कॉटन की फसल बर्बाद हो गई है। इससे उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
