50 हजार रुपए देकर भी नहीं मिला पीएम आवास:महिला ने जिसे रिश्वत दी, उस कर्मचारी ने किया सुसाइड, दूसरा नगर निगमकर्मी ही नहीं

Updated on 22-07-2024 01:35 PM

‘मैं पीएम आवास योजना में बने फ्लैट में किराए से रहती थी। नगर निगम ने किराए से रह रहे लोगों से मकान खाली करवा लिए। जिस दिन मुझसे मकान खाली करवाया जा रहा था, उस दिन नगर निगम के कर्मचारियों ने मुझसे कहा- तुम यहीं पर रहो, तुम्हें मकान दे देंगे। उन्होंने इसके एवज में मुझसे 50 हजार रु. लिए। कहा- जल्द ही आवंटन के कागज भेज देंगे। पिछले एक साल से मुझे आवंटन पत्र नहीं मिला तो मैंने कलेक्टर और सीएम को शिकायत की है।'

ये आपबीती सीमा प्रजापति की है। सीमा देवास के चाणक्यपुरी (मेंढकी) में पीएम आवास योजना में बनी एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट में रहती है। सीमा ने जिन लोगों को फ्लैट के आवंटन के बदले रिश्वत दी थी, उनमें से एक पिछले महीने खुदकुशी कर चुका है। वहीं, सीमा जिस अशोक दुबे पर मकान का आवंटन न करने का आरोप लगा रही है, वह खुद सीमा के खिलाफ एसपी और कलेक्टर को शिकायत कर चुका है।

इस कर्मचारी का ये भी कहना है कि वह नगर निगम के अधिकारियों के कहने पर सीमा का मकान खाली करवाने पहुंचा था। सीमा उसी के खिलाफ शिकायत कर छवि धूमिल करने की कोशिश कर रही है। इधर, सीमा की शिकायतों के बाद नगरीय प्रशासन संचालनालय दो बार देवास नगर निगम कमिश्नर को मकान आवंटन के लिए पत्र लिख चुका है।

 800 में से 230 फ्लैट्स में किराएदार रह रहे थे

सीमा प्रजापति अस्पताल में सफाईकर्मी है। उसका 17 साल का बेटा है। पति साथ में नहीं रहता है। देवास नगर निगम ने पीएम आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत चाणक्यपुरी (मेंढकी) में हितग्राहियों के लिए मल्टीस्टोरी बिल्डिंग का निर्माण करवाया है। यहां 800 से ज्यादा फ्लैट बने हुए हैं।

कई हितग्राहियों ने यहां फ्लैट किराए से दे दिए थे। इन्हीं में से एक फ्लैट में साल 2022 में सीमा भी किराए से रहती थी। कुछ दिन बाद नगर निगम के अधिकारी यहां निरीक्षण करने पहुंचे तो उन्होंने पाया कि 800 में से 230 फ्लैट्स में किराएदार रह रहे थे। अधिकारियों ने इन फ्लैट्स में रहने वाले किराएदारों को मकान खाली करने के लिए नोटिस दे दिया।

सीमा का आरोप- निगम कर्मचारियों ने संपर्क किया, 50 हजार रु. लिए

सीमा के मुताबिक, नगर निगम के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर पुनीत शुक्ला ने किराएदारों से कहा था कि वे पीएम आवास योजना के लिए वे आवेदन कर सकते हैं। जिन लोगों के आवंटन निरस्त किए गए हैं उनकी जगह मकान मिल जाएंगे। सीमा ने भी मकान के लिए आवेदन किया था।

सीमा के मुताबिक कुछ दिनों बाद उसके पास नगर निगम के कर्मचारी जसवंत सिंह उर्फ राहुल सेंधव, और मिथिलेश दुबे आए। उन्होंने मुझसे कहा कि हम पीएम आवास योजना में मकान आवंटित कर देंगे इसके लिए पचास हजार रु. देना पडेंगे। सीमा ने 6 मार्च 2023 को मिथिलेश दुबे के फोन पे नंबर 8305870882 पर दो बार में 20 हजार रु. ट्रांसफर किए। इसके बाद 10 मार्च को भी 4 हजार रु. ट्रांसफर किए।

पूरा पैसा देने के बाद कर्मचारियों ने बिना तारीख की रसीद दी

सीमा के मुताबिक, उसने 27 मार्च को जसवंत सिंह सेंधव के rahuldewas4122@ybl फोन पे अकाउंट पर पर 25 हजार रु. ट्रांसफर किए। 1 हजार रु. नगर निगम के कर्मचारियों ने नकद लिए। इसके बाद दोनों कर्मचारियों ने उसे फ्लैट नंबर KG08 की चाबी दे दी।

सीमा ने अपना सामान फ्लैट में शिफ्ट कर दिया। उससे कहा गया कि मकान आवंटन से संबंधित कागजी प्रक्रिया जल्द ही पूरी की जाएगी। 8 मार्च को मिथिलेश दुबे ने सीमा के वॉट्सऐप पर एक रसीद भेजी।

जिसमें लिखा था कि मकान आवंटित करने के एवज में 25 हजार रु. मिले और बाकी के 1 लाख 69 हजार रु. देने की प्रक्रिया बैंक लोन के माध्यम से होगी। इस रसीद पर न तो किसी के साइन है और न ही तारीख दर्ज है।

सीमा ने सीएम और मुख्य सचिव को की शिकायत

मकान देने के बदले पैसा लेने वाले नगर निगम के कर्मचारी सीमा को भरोसा देते रहे कि 10-15 दिन में कागज मिल जाएंगे। मगर, जब कुछ नहीं हुआ तो सीमा ने 11 जनवरी 2024 को देवास कलेक्टर को पत्र लिखकर शिकायत की। इसके बाद सीमा ने 19 जनवरी को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखा।

लेटर लिखने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग एक्शन में आया

19 जनवरी को सीएम को पत्र लिखने के बाद नगरीय प्रशासन विभाग एक्शन में आया। 25 जनवरी को नगरीय प्रशासन विभाग के ओएसडी मनोज श्रीवास्तव ने नगरीय प्रशासन आयुक्त को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

एक महीने बाद 27 फरवरी को नगरीय प्रशासन आयुक्त ने देवास नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर सीमा को मकान आवंटित करने और उसे परेशान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा।

घर का सामान नगर निगम कर्मचारियों ने बाहर फेंका

सीमा का आरोप है कि मैंने सीएम और सीएस के अलावा सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की है। जब दबाव बढ़ा तो 22 जून को नगर निगम कर्मचारियों ने उसका सामान फ्लैट से निकालकर सड़क पर फेंक दिया।

उन्हें लगातार धमकी दी जा रही है और फ्लैट खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। सीमा कहती हैं कि नगरीय प्रशासन विभाग ने 5 जुलाई को एक बार फिर देवास नगर निगम कमिश्नर को रिमांइडर लेटर भेजा है कि मकान आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाए लेकिन देवास कमिश्नर ने अभी तक कोई एक्शन ही नहीं लिया है।

अशोक दुबे ने कहा- सीमा के सारे आरोप झूठे हैं

सीमा ने जिस जसवंत सेंधव को 25 हजार रु. दिए थे, उसने पिछले ही महीने सुसाइड कर लिया है। बताया जा रहा है कि जसवंत सेंधव ने केवल सीमा ही नहीं बल्कि बाकी और भी लोगों से मकान आवंटित करने के एवज में पैसा लिया था। पीड़ितों ने उसके खिलाफ थाने में भी शिकायत की थी। उसने कुछ लोगों के पैसे वापस भी लौटाए थे। जसवंत सेंधव ने सुसाइड क्यों किया, इसका पता नहीं चला है।

वहीं, सीमा ने मिथिलेश दुबे को भी 24 हजार रु. दिए थे। दैनिक भास्कर ने मिथिलेश दुबे से बात की तो उसने इस बात को कबूल किया उसने सीमा से पैसा लिया था, लेकिन वो पैसा जसवंत के अकाउंट में ट्रांसफर कर चुका है। अब जसंवत की मौत हो चुकी है तो उसने इस पैसे का क्या किया उसे नहीं मालूम। दूसरी तरफ सीमा का आरोप है कि जसवंत और मिथिलेश ने अशोक दुबे के कहने पर पैसा लिया था।

भास्कर ने अशोक दुबे से बात की तो दुबे ने कहा कि वह तो नगर निगम का कर्मचारी ही नहीं है। पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन के लिए सेंटर फॉर सोशल एंड एनवायरन्मेंटल डेवलपमेंट नाम की संस्था को काम सौंपा है। वह उसका प्रतिनिधि है।

उससे पूछा कि सीमा हर शिकायत में उसका नाम क्यों ले रही है, तो दुबे ने कहा कि पहली बार जब सीमा का मकान खाली करने के लिए निगम का रिमूवल दस्ता गया था तो मैं उनके साथ था। नगर निगम का कर्मचारी न होते हुए भी मकान खाली करने का जिम्मा मुझे दिया गया है।

मैं इसे लेकर अधिकारियों को कई बार कह चुका हूं। रिश्वत के सवाल पर दुबे ने कहा कि सीमा झूठे आरोप लगा रही है। उन्होंने जसवंत सेंधव को पैसा दिया था। उससे मेरा कोई लेना देना नहीं था।

कलेक्टर बोले- मकान आवंटित करने का अधिकार नगर निगम का

इस मामले में देवास नगर निगम कमिश्नर रजनीश कसेरा से दैनिक भास्कर ने दो बार संपर्क किया, लेकिन वे भोपाल में बैठक में हिस्सा लेने गए थे। इस मामले में भास्कर ने कलेक्टर ऋषभ गुप्ता से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि पीएम आवास योजना में मकान आवंटन का काम नगर निगम सक्षम एजेंसी है।

नगर निगम पात्रता के आधार पर आवंटन करता है। अगर कोई पात्र नहीं है तो मकान आवंटित नहीं किया जाता। अगर इस मामले में किसी ने रिश्वत ली है तो कमिश्नर को कार्रवाई के निर्देशित किया जाएगा।



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