नवनीत राणा की जाति पर सवाल-सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित:अमरावती सांसद पर आरोप- फर्जी दस्तावेज देकर बनवाया था कास्ट सर्टिफिकेट

Updated on 29-02-2024 12:31 PM

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (28 फरवरी) को लोकसभा की अमरावती सीट से सांसद नवनीत कौर राणा के जाति प्रमाण पत्र से जुड़े केस में फैसला सुरक्षित रख लिया। नवनीत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करने के लिए याचिका लगाई थी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून 2021 को कहा था कि नवनीत ने मोची जाति का प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से हासिल किया था। कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह सिख-चमार जाति से थीं। हाईकोर्ट ने उन पर 2 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया था।

केस जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की बेंच में था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सांसद राणा के जाति प्रमाण पत्र को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट ने 6 महीने में सर्टिफिकेट सरेंडर करने कहा था
दरअसल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से समर्थित प्राप्त राणा ने 2019 में अमरावती से जीत हासिल की थी। उन्होंने दावा किया था कि वह मोची जाति से आती हैं। बॉम्बे HC ने राणा को 6 हफ्ते के अंदर जाति प्रमाणपत्र सरेंडर करने कहा था। साथ ही महाराष्ट्र कानूनी सेवा प्राधिकरण को 2 लाख रुपए का जुर्माना देने को कहा था।

हाईकोर्ट का कहना था कि अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र लेने के लिए मोची जाति से जुड़े होने का राणा का दावा फर्जी था। कोर्ट ने कहा था कि ये जानते हुए भी कि वे उस जाति से नहीं है, उन्होंने SC कैटेगरी के उम्मीदवार मिलने वाले लाभ हासिल करने के इरादे से फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जानबूझकर किया गया था ताकि राणा अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए रिजर्व सीट पर सांसद का चुनाव लड़ सकें।

2013 में जारी हुआ था राणा का कास्ट सर्टिफिकेट
राणा को मोची जाति का कास्ट सर्टिफिकेट मुंबई के डिप्टी कलेक्टर ने 30 अगस्त 2013 को जारी किया था। राणा की जाति पर सवाल उठाते हुए शिवसेना नेता आनंदराव अडसुल ने मुंबई जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति में शिकायत दर्ज की थी। हालांकि, समिति ने राणा के पक्ष में फैसला सुनाया और प्रमाणपत्र को मान्य किया।

इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की। अडसुल ने दलील दी थी कि राणा ने जाली दस्तावेजों केआधार पर प्रमाणपत्र बनवाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस काम के लिए नवनीत राणा के पति रवि राणा ने अपने पद का इस्तेमाल किया था।

हाईकोर्ट ने माना था कि जांच समिति ने जो आदेश दिया वह पूरी तरह से विकृत था, बिना दिमाग लगाए और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के विपरीत था। बेंच ने कहा था कि नवनीत राणा के मूल जन्म प्रमाण पत्र में मोची जाति का उल्लेख नहीं है।



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