रात में आसमान में दिखी टूटते तारों की बरसात जेमिनिड मीटियोर शावर पीक पर रहा

Updated on 15-12-2023 01:38 PM

जेमिनिड मीटियोर शावर गुरुवार रात में अपने पीक पर रहा। इसे 15 दिसंबर की सुबह तक आसमान में देखा गया। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत भी नहीं पड़ी।

मीटियोर शावर तब होते हैं जब एस्टेरॉयड या कॉमेट के छोटे अवशेष हाई स्पीड से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं जिससे आकाश रोशन हो जाता है।

इन द स्काई के अनुसार, नई दिल्ली में मीटियोर शावर 14 दिसंबर को शाम 6.53 बजे के आसपास दिखाई देना शुरू हुए, जब इसके रेडिएंट पॉइंट पूर्वी क्षितिज से ऊपर उठे। अपने पीक पर आकाश में प्रति घंटे 150 मीटियोर्स तक दिखाई दिए। यानी, 2-3 मीटियोर हर मिनट दिखाई दिए।

जेमिनिड को उसका नाम जेमिनी तारामंडल से मिला है, क्योंकि उनका रेडिएंट पॉइंट इसके भीतर स्थित है। आकाश में रेडिएंट की पोजिशन मीटियोर शावर की स्ट्रेंथ को प्रभावित करती है। आप जितना दूर उत्तर में होंगे, चमक उतनी ही अधिक होगी। शावर के दौरान मूनलाइट की अनुपस्थिति भी इसे देखने के एक्सपीरियंस को बढ़ा देती है। यानी डार्क स्काई में ये अच्छा दिखाई देता है।

बेहतर एक्सपीरियंस अंधेरे में

  • बेस्ट विजिबिलिटी वहां रही जहां लाइट और प्रदूषण से दूर एक अंधेरी जगह रही।
  • जेमिनी कॉन्स्टिलेशन में रेडिएंट ओरियन बेल्ट के करीब रहा।

जेमिनी कॉन्स्टिलेशन को पहचानने का सबसे आसान तरीका है ओरियन की बेल्ट का पता लगाना, फिर उस लाइन को फॉलो करना जो रिगेल (ओरियन का दाहिना पैर और सबसे चमकीला सितारा) से ऊपर की तरफ बेटेलगेस (ओरियन के बाएं कंधे) की ओर जाती है। यहां आपको कैस्टर और पोलक्स दिखेंगे। इससे कॉन्स्टिलेशन की पहचान हो जाएगी।

'3200 फेथॉन' के मलबे से होता है जेमिनिड मीटियोर शावर
जेमिनिड मीटियोर शावर तब होता जब पृथ्वी एस्टोरॉयड '3200 फेथॉन' के मलबे (डेब्री) से होकर गुजरती है। '3200 फेथॉन' को 'रॉक कॉमेट' भी कहा जाता है। फेथॉन के धूल के कण लगभग 34 किमी प्रति सेकेंड की गति से पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर आकाश में चमक पैदा करते हैं। इसे आम भाषा में टूटता तारा या शूटिंग स्टार भी कहा जाता है।

एस्टेरॉयड, कॉमेट और मीटियरॉयड में अंतर

  • एस्टेरॉयड छोटे रॉकी ऑब्जेक्ट होते हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
  • कॉमेट भी सूर्य की परिक्रमा करते हैं, लेकिन ये बर्फ से बने होते हैं।
  • एस्टेरॉयड या कॉमेट से अलग हुए छोटे टुकड़े को मीटियोरॉयड कहते हैं।

हरे रंग के दिखते हैं जेमिनिड शावर
नासा के मीटियोरॉयड एक्सपर्ट बिल कुक के अनुसार, ज्यादातर मीटियोर्स अपनी रासायनिक संरचना के आधार पर रंगहीन या सफेद दिखाई देते हैं। जेमिनिड का रंग हरा होता है। हरा आमतौर पर ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और निकल से आता है।


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