पत्नी को टिकट दिलाने को बेकरार रिटायर्ड IAS मंत्री बनने के लिए बदला 'दरवाजा', राजनीति में एंट्री के लिए ससुराल से जुगाड़

Updated on 24-02-2024 12:07 PM

2024 का चुनाव नजदीक आ रहा है। यूपी में रैलियां, भाषणबाजी, रोड शो और यात्राएं शुरू हो गईं हैं। जो नेता हैं, वह नेता बने रहे, इस जद्दोजहद में लगे हैं। जो नहीं हैं वह बनने के लिए आतुर हैं। कहीं पावरगेम चल रहा है, तो कोई सेटिंग और जुगाड़ में लगा है। इस फेहरिस्त में नौकरशाहों के नाम सबसे ज्यादा हैं। एक पावरफुल रिटायर्ड आईएएस अपनी पत्नी को सांसदी का टिकट दिलाने के लिए बेकरार हैं।

वहीं, सभी सरकारों के खासमखास रहे एक दूसरे रिटायर्ड आईएएस हैं जो राजनीति में एंट्री के लिए अपनी ससुराल तक से जुगाड़ लगवा रहे हैं। इसके अलावा, एक नेताजी हैं जिनका मंत्री बनने का इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा है। परेशान होकर उन्होंने दरवाजा बदल दिया। पहले दिल्ली जाकर खटखटाते थे अब लखनऊ में ही बार-बार नॉक कर रहे हैं।

1- पत्नी को सांसद बनाने की चाह....मंदिर में भंडारा...मनौती
एक रिटायर्ड आईएसएस पत्नी को राजनीति में एंट्री कराने के लिए हर जतन कर रहे हैं। एक तरफ वह भाजपा नेताओं से जुगाड़ लगा रहे हैं। दूसरी तरफ मंदिर में भी हाजिरी लगा रहे हैं। हर मंगलवार को पनकी धाम मंदिर में जाकर भंडारा और पूजा-पाठ करवा रहे हैं। चर्चा है कि वह पत्नी को सांसद बनाने की मनौती माने हैं। इन साहब की पत्नी भी सामाजिक क्षेत्र में काफी पॉपुलर हैं। इसलिए, वह पूरी उम्मीद लगाए हैं।

इतना ही नहीं, चर्चा यह भी है कि रिटायरमेंट के बाद भी साहब, 'सरकार' के खास बने थे। इसलिए, उनके लिए नया पद तक बना दिया गया था। इसी महीने उनके पद के सेवा विस्तार का समय भी खत्म हो जाएगा। दूसरा सेवा विस्तार मिलने की उम्मीद भी कम लग रही है। ऐसे में साहब को लग रहा है कि 'पावर' खत्म न हो, इसलिए पत्नी की राजनीति में एंट्री करवा दी जाए। यही नहीं, वह कई भाजपा नेताओं से भी मुलाकात कर चुके हैं। आईएएस थे तो गुणा-गुणित में भी माहिर हैं। उनकी पत्नी जातीय गणित में कितनी फिट बैठती हैं, यह भी वह उनको समझा चुके हैं।

खैर साहब की पत्नी को टिकट मिलेगा या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। क्योंकि, वह जिस पार्टी से टिकट के जुगाड़ में लगे हैं। वहां एक अनार, सौ बीमार वाला हाल है। लेकिन, उनकी जद्दोजहद आजकल चर्चा में है।

2-पसंदीदा पोस्टिंग नहीं मिली तो डेपुटेशन पर दिल्ली रवाना
सबको बढ़िया चाहिए। यूपी कैडर के ही एक आईएएस हैं, उन्हें भी बढ़िया पोस्टिंग चाहिए थी। काम से ज्यादा इनका फोकस लंबे समय से अच्छी पोस्टिंग के जुगाड़ पर था। लेकिन, बार-बार जुगाड़ फेल हो रहा था। थक-हारकर इतना परेशान हो गए कि अब उन्होंने डेपुटेशन पर दिल्ली जाने का फैसला कर लिया।

दरअसल, इनको उम्मीद थी कि अपने विभाग में ही पावरफुल पोस्ट मिल जाए। लेकिन, वहां उनका काम बस एक मिडिएटर तक ही सीमित रह गया था। हाथ में कोई मजबूत बजट भी नहीं था, जो इनके सिग्नेचर से निकल जाए। ऐसे में जब यहां कुछ नहीं हुआ तो उन्होंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ ली है।

यह साबह मैनपुरी के रहने वाले हैं। अखिलेश सरकार की गुड लिस्ट में इनका नाम भी रहा है। यही वजह है कि इनकी सेटिंग-जुगाड़ ज्यादा काम नहीं आई। इससे पहले भी यूपी कैडर के कई आईएएस यूपी छोड़कर या तो इंटरकॉर्डर डेपुटेशन पर चले गए हैं। कुछ ने तो वीआरएस तक ले लिया है।

3-राजनीति में एंट्री के लिए ससुराल तक से जुगाड़...नहीं बन पा रहा काम
बसपा, सपा और योगी सरकार में अहम जिम्मेदारी निभा चुके रिटायर्ड आईएएस अफसर राजनीति में एंट्री को बेचैन हैं। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा से पहले मंदिर के स्वच्छता अभियान में डिप्टी सीएम के साथ फोटो आने के बाद इसकी चर्चा तेज हो गई।

लंबे समय तक यह साहब ब्यूरोक्रेसी में पावरफुल पोजिशन में रहे हैं। अब यह यूपी से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं। करीबियों से पैरवी और अपने मैनेजमेंट के किस्से बताने के लिए स्क्रिप्ट भी तैयार कर चुके हैं। इनकी दिल्ली में ससुराल है। वहां से भी राजनीति में उतरने के लिए जमीन तैयार करने में दिन रात जुटे हैं। पीलीभीत से भी इनका कनेक्शन है। चर्चा है कि यह पीलीभीत से ही टिकट चाहते हैं। वहां के जातीय समीकरण में भी यह खुद को जगह-जगह फिट बता रहे हैं।

हालांकि, अंदरखाने की खबर यह भी है कि इस बार यानी 2024 के चुनाव में उनकी एंट्री संभव नहीं है। कुछ विश्वस्त ने उनको बता दिया है कि इस बार ज्यादा कोशिश मत कीजिए। कुछ होना नहीं है। इसके बाद भी इन्होंने अभी हार नहीं मानी हैं...टिकट के जुगाड़ में लगे हुए हैं।

4-लखनऊ में तैनाती के लिए IPS का 'पावरगेम'
केंद्र से एक सीनियर IPS अफसर हाल ही में लखनऊ आए हैं। जाहिर है दिल्ली से आए हैं तो ख्वाहिशें भी बड़ी होंगी। यूपी पुलिस का दूसरे सबसे ताकतवर पद पर पोस्टिंग के लिए अपना नाम बढ़ा दिया। क्योंकि, वह पद अभी खाली पड़ा हुआ है। अतिरिक्त प्रभार से काम चलाया जा रहा है। लेकिन, उनकी मन्नत पूरी नहीं हुई और वह पद नहीं मिला। साहब! अड़ गए। उनको लखनऊ में ही पोस्टिंग चाहिए। यहां-वहां, जहां-तहां से ताकतवर लॉबिंग करवा दी।

फिर क्या था। उनके लिए लखनऊ में जगह खाली करवाई गई। पंचम तल के पसंदीदा एक अफसर को लखनऊ से काशी शिफ्ट किया गया। फिर दिल्ली से आए साहब को उनकी जगह पर तैनाती दी गई। पुलिस विभाग में इन साहब की खूब चर्चा हो रही है। जैसे तेवर दिखाएं हैं चर्चा है कि वह जल्दी ही यूपी पुलिस के अहम पद की कमान संभाल सकते हैं। यह भी वजह है कि कई मातहत ने उनकी शरण में जाना शुरू कर दिया। यही नहीं, साहब की तैनाती का यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले की सरकारों में भी इनकी तैनाती चर्चा में रही है।

5-मंत्री बनने के लिए दिल्ली से अब 'लखनऊ रिर्टन्स'
सत्तारुढ़ पार्टी में शामिल अति पिछड़ों के दो चर्चित नेताओं को दिल्ली के चक्कर लगाते-लगाते 7 महीने बीत चुके हैं। लेकिन मंत्री बनने की इच्छा पूरी नहीं हुई है। उन्हें यह बात समझ में आ चुका है कि दिल्ली के चक्कर लगाने से अब काम नहीं बनेगा। यही वजह है कि जहां से मंत्रिमंडल विस्तार होना है अब वहां पहुंचकर हाजिरी लगाई जाए।

हालांकि, नेताजी शुरू में फुल कॉफिडेंस में थे। दावे करते रहे की 15 दिन में मंत्री बनेंगे...अब बनेंगे...तब बनेंगे...लेकिन आज तक नहीं पता चला कि कब बनेंगे...। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव से पहले इन दोनों नेताओं ने 'सरकार' के दरवाजे पर अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी। अब माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले इन्हें मंत्री बना ही दिया जाएगा।



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