प्री-IPO में म्यूचुअल फंड की एंट्री पर सेबी ने लगाई रोक, एंकर राउंड में निवेश की इजाजत, जानें क्यों उठाया यह कदम

Updated on 22-11-2025 01:08 PM
नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर सेबी ( SEBI ) ने म्यूचुअल फंड्स को प्री-IPO (IPO आने से पहले शेयरों की खरीद-फरोख्त) में निवेश करने से रोक दिया है। हालांकि, सूत्र ने शुक्रवार को बताया कि उन्हें एंकर राउंड में निवेश करने की इजाजत दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बाजार में लिक्विडिटी बढ़े और IPO लाने वाली कंपनियों का वैल्यूएशन और ज्यादा पारदर्शी हो सके।

इसी महीने सेबी ने एंकर निवेशकों के लिए शेयर अलॉटमेंट के नियमों में बड़ा बदलाव किया था। इसका मकसद म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड जैसे घरेलू संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना था। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि मार्केट रेगुलेटर 'डिजिटल गोल्ड' या 'ई-गोल्ड' जैसे प्रोडक्ट्स को रेगुलेट करने पर विचार नहीं कर रहा है, क्योंकि ये उसके दायरे में नहीं आते हैं।

REITS मार्केट इंडेक्स में होंगे शामिल

मार्केट रेगुलेटर सेबी अब REITS (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) को मार्केट इंडेक्स में शामिल कराने के लिए इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम करेगा। तुहिन कांत पांडे ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

भारत InvITs असोसिएशन (BIA) और इंडियन REITS असोसिएशन (IRA) ने नई दिल्ली में Inv IT's और REITs पर अपने पहले नेशनल कॉन्क्लेव का आयोजन किया। यहां पांडे ने कहा कि एक बार जब ये इंडेक्स में शामिल हो जाएंगे, तो इनमें लिक्विडिटी अपने आप बढ़ जाएगी। सेबी चीफ ने कहा कि रेगुलेटर REITS और InvITs (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) के लिए कारोबार करना और आसान बनाने के लिए अन्य उपायों पर भी विचार कर रहा है।

क्या होते हैं REITs

ये ऐसी कंपनियां होती है जो बड़े-बड़े रियल एस्टेट (मॉल, ऑफिस बिल्डिंग) को चलाती हैं। ये निवेशकों को मौका देती हैं कि वे ऊंचे दाम वाले रियल एस्टेट में हिस्सेदारी खरीद सकें और समय के साथ डिविडेंड से कमाई करके अपनी पूंजी बढ़ा सकें।

इस नियम में भी किया था बदलाव

इसी महीने की शुरुआत में सेबी ने एंकर निवेशकों के लिए शेयर आवंटन के नियमों में बदलाव किया था। इसका मकसद घरेलू संस्थागत निवेशकों, जैसे म्यूचुअल फंड , बीमा कंपनियों और पेंशन फंड के लिए ज्यादा शेयर आरक्षित करना था। नए नियमों के तहत, एंकर निवेशकों के लिए कुल हिस्सेदारी 33% से बढ़ाकर 40% कर दी गई है। इसमें से 33% हिस्सा म्यूचुअल फंड के लिए है, और बाकी 7% बीमा और पेंशन फंड के लिए है। अगर बीमा और पेंशन फंड के लिए रखा गया 7% हिस्सा नहीं बिकता है, तो वह म्यूचुअल फंड को मिल जाएगा।

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