सिरपुर आस्था, कला और इतिहास का जीवंत संगम

Updated on 30-01-2026 12:50 PM

महासमुंद। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में पर्व, मड़ई और मेलों की परंपरा सदियों से रची-बसी है। इन्हीं परंपराओं में सिरपुर महोत्सव का विशेष स्थान है, जो प्रतिवर्ष पवित्र महानदी के तट पर माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित किया जाता है। इस वर्ष तीन दिवसीय सिरपुर महोत्सव 01 फरवरी 03 फरवरी 2026 तक भव्य रूप में आयोजित किया जा रहा है।

माघी पूर्णिमा की भोर में आस-पास के ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं द्वारा महानदी में पुण्य स्नान कर गंधेश्वर नाथ महादेव के अलौकिक दर्शन-पूजन के साथ महोत्सव की शुरुआत होती है। वहीं तीन दिनों तक महानदी सांध्य आरती किया जाता है। यह परंपरा सिरपुर की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करती है। हर वर्ष आयोजित होने वाला सिरपुर महोत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। इसमें देश-विदेश के कलाकार शास्त्रीय नृत्य, संगीत और नाट्य प्रस्तुतियाँ देते हैं। सिरपुर महोत्सव में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा आवागमन की विशेष व्यवस्था की जा रही है। महोत्सव अवधि के दौरान रायपुर से कुहरी मोड़ तक तथा जिले के सभी विकासखंड मुख्यालयों से सिरपुर तक बसों का प्रबंध किया गया है। निर्धारित रूटों पर बसें नियमित अंतराल में संचालित होंगी, जिससे अधिक से अधिक लोग महोत्सव के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों में सहभागी बन सकें।

सिरपुर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हेरिटेज स्थल के रूप में विकसित करने हेतु शासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की सरकार ने सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विजन 2047 के तहत आधुनिक बुनियादी ढांचा, सड़क, प्रकाश व्यवस्था और अंर्तराष्ट्रीय स्तर का पर्यटक कॉरिडोर विकसित करने प्रतिबद्ध है। सिरपुर की पुरातात्त्विक संरचनाओं को संरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकें अपनाई जा रही हैं। यहाँ के मंदिर, विहार, मूर्तियाँ और जीवंत परंपराएँ हमें यह सिखाती हैं कि भारत की संस्कृति, सहिष्णुता, कला और ज्ञान का संगम है। यहाँ ईको-ट्रेल, हस्तशिल्प बिक्री केंद्र और स्थानीय भोजनालय चलाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को रोजगार मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले।

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित सिरपुर (श्रीपुर) केवल एक पुरातात्त्विक स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का जीवंत प्रतीक है। यह नगर दक्षिण कोसल के पांडुवश के सबसे महान सम्राट महाशिवगुप्त बालार्जुन की राजधानी रहा है और अपनी स्थापत्य कला, बौद्ध धरोहरों तथा प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

सिरपुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों और अभिलेखों में मिलता है। यहाँ भगवान शिव, विष्णु, बुद्ध और जैन धर्म के उपासना स्थलों के अवशेष मिले हैं। 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी सिरपुर का उल्लेख अपनी यात्राओं में किया है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति सिद्ध होती है। यह नगर धार्मिक सहिष्णुता और कला का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यहाँ 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 3 जैन विहार और एक विशाल बौद्ध विहार के अवशेष प्राप्त हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सिरपुर में लगातार संरक्षण और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है जिससे इसकी ऐतिहासिक गरिमा बनी रहे। डिजिटल टूर, क्यूआर कोड आधारित जानकारी और थ्रीडी गाइडेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।


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