जनता का उपयोग भी कर लेते हैं कुछ लोग...

Updated on 14-06-2024 06:32 PM

संगठन चाहे राजनीतिक हो,सामाजित हो,वह अच्छा काम करने के लिए बनाए जाते हैं।समाज सेवा, देश सेवा की बड़ी बड़ी बातें करते हैं। इसी आधार पर अपने संगठन से जनता को जोड़ते हैं। कई संगठनोंॆ से जनता जुड़ जाती है, वह सोचती है कि यह संगठन तो अचछा काम करने वाला है। यह तो समाज के हित में काम करने वाला संगठन है।यह कोई बैठक आयोजित करता है या कहीं पर किसी घटना के विरोध में प्रदर्शन का आयोजन करता है तो यह समाज के लिए ही तो करता है, यह हमारे लिए ही तो करता है, इसलिए कोई सामाजिक संगठन जब कोई बैठक बुलाता है, प्रदर्शन का आयोजन करते हैं तो समाज  के लोग उसमेें समाज का काम है सोच कर शामिल हो जाते हैं।

बलौदाबाजार में हुई तोड़फोड़ व आगजनी की जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि प्रदर्शन के लिए लोगों की भीड़ यह कहकर नहींं जुटाई गई कि बलौदाबाजार में प्रदर्शन करना है, यह भी नहीं बताया गया कि योजना कलेक्टर व एसपी आफिस में तोड़फोड़ व आगजनी करने की है। ऐसा पता होता तो बहुत सारे लोग तो आते नहीं क्योंकि आम लोग तो हमेशा तोड़फोड़ व आगजनी के खिलाफ होते हैं,वह जानते हैं कि यह गलत बात है,यह तो एक तरह से अपराध है। सामान्य आदमी अपराध करने से डरता है। अपने संगठन के आयोजन के लिए भीड़ जुटाने वाले भी जानते हैं कि वह अपने आयोजन के नाम पर बुलाएंगे तो जनता आएगी नहीं, इसलिए वह समाज का सहारा लेते हैं। समाज के लिए उन्हें बुलाते हैॆ. बलौदाबाजार में भीड़ जुटाने के लिए गांव गाव में मुनादी कराई गई, पंपलेट बंटवाया गया, और सामाजित बैठक के नाम पर बुलाया गया।

समाज की बैठक के नाम पर बडी भीड़ बलौदाबाजार में जुटा ली गई। आगजनी व तोड़फो़ड़ करनेव वालों ने तो अपनी तैयारी पूरी कर ली ती, उन्हें तो बस भीड़ की आड़ की जरूरत थी। जनता व भीड़ का उपोयग अपने गलत काम के लिए करने वाले लोग जानते हैं कि भीड़ को उकसाना बहुत आसान होता है, एक बार भीड़ भड़क गई तो जो माहौल बनता है, उसमें तोढ़फोड़ व आगजनी करने वालों के लिए अपना काम करना बहुत आसान होता है। बलौदाबाजार में आगजनी व तोड़फोड़ करने वाले लोग तो संख्या में कम होंगे लेकिन उन्होंने बलौदाबाजार जिले की जनता का अपने गलत काम के लिए उपयोग कर लिया है।बलौदाबाजार की जनता तो यह पता नहीं था कि कुछ लोग उनका उपयोग कर रहे हैं और इसका खामियाजा उनको बाद में भुगतना पड़ेगा।अब जब बलौदाबाजार में इतनी बड़ी घटना हो गई तो स्वाभाविक है कि इसकी बड़े पैमानंं पर जांच होगी। बड़े पैमाने पर लोगों से पूछताछ होगी, बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा।

बहुत लोग तो ऐसे होंगे जो भीड़ में शामिल होंगे लेकिन उन्होंने कुछ किया न हो। सीसीटीवी में उनकी फोटो है तो पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है,उनको भी गिरफ्तार कर सकती है। पुलिस व जांंच एजेंसी के लिए तो इतना ही काफी होता है कि जो भी भीड़ में शामिल है,उसने गलत किया है या कुछ गलत करने के लिए भीड़ में आया हो। भीड़ में शामिल आदमी कितना भी कहे कि उसने कुछ नहीं किया है. पुलिस उसकी बात यकीन तो करने से रही। इसका परिणाम तो यही होना है कि बलौदाबाजार में तोढ़फोड़करने वाले तो अपना काम कर कहीं आराम से हैं और बलौदाबाजार की जनता को इसका खामियाजा भुगतना प़ड़ रहा है।

अब तक बलौदाबाजार मामले में १०० से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, बहुत सारे लोग जेल भेजे जा चुके हैं। कुछ संगठनों ने बलौदाबाजार के एक समाज के लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। समाज प्रमुख तो कह चुके हैं कि बलौदाबाजार में जो कुछ हुआ है वह असामाजिक तत्वो ने किया है। अब राजनीतिक दल बलौदाबाजार की घटना का राजनीतिक लाभ उठाने सामने आएंगे। एक राजनीतिक दल के नेता अब कह रहे हैं कि प्रशासन को बलौदाबाजार मामले में जांच करते समय, लोगों की गिऱफ्तारी करते समय समाज के लोगोें व दंगाइयों मे फर्क करना चाहिए। कुछ दिन बाद राजनीतिक दल के नेता कहेंगे कि हम बलौदाबाजार में तोड़ेफोड़ व आगजनी करने वालों का समर्थन नहीं कर रहे हैं लेकिन पुलिस को निर्दोष लोगों को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए।वह समाज के लोगों को बता रही हैकि हम तो तुम्हारे साथ है,तुम्हारे साथ गलत हुआ है तो हम उसका विरोध करेंगे। साथ ही वह समाज को यह भी बता देंगे कि तुम्हें परेशान कौन कर रहा है,तुमको उसका विरोध करना चाहिए।इस तरह एक संगठन व कुछ संंगटन किसी समाज का उपयोग अपने राजनीतिक हित के लिए कर भी लेते है और सरकार के खिलाफ उसे खड़ा भी कर देते हैं। 

राजनीतिक दल किसी सरकार को बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनके लिए दंगा प्रायोतत करवाना आसान होता है तो बलौदाबाजार में तोडफोड़ व आगजनी कौन सी बड़ी बात है।  वह समाज के लोग हों या जिले के लोग हों, गांवों के लोग हों, उनकाे समझने की जरूरत है कहीं कोई उनका उपयोग अपने राजनीतिक फायदे के लिए तो नही कर रहा है, जिसका खाामियाजा उन्हें बाद में महज इसलिए भुगतना पड़ेगा कि वह किसी के बुलावे पर किसी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।



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