उधारी के विमानों से शुरू की एयरलाइन और हवाई चप्पल वालों को दे दी बड़ी सौगात!

Updated on 29-06-2023 07:57 PM
इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन है। कंपनी का मार्केट कैप भी एक लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है। पहली बार देश की किसी एविएशन कंपनी को यह उपलब्धि हासिल हुई है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी और आज देश के घरेलू बाजार में इसकी 58 फीसदी हिस्सेदारी है। यानी देश के आधे से अधिक यात्री इंडिगो के विमानों में सफर करते हैं। दूर-दूर तक कोई इसकी टक्कर में नहीं है। एविएशन जैसी इंडस्ट्री में सफलता पाना आसान नहीं है। सुब्रत रॉय, नरेश गोयल (Naresh Goyal) और विजय माल्या जैसे दिग्गज इसमें अपने हाथ जला चुके हैं। फिर राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने इंडिगो को कैसे सफलता इस मुकाम तक पहुंचाया?

कैसे हुई शुरुआत

राहुल भाटिया दिल्ली के रहने वाले हैं जबकि उनके दोस्त राकेश गंगवाल अमेरिका में रहते हैं। राकेश कई बड़ी एयरवेज कंपनियों में काम कर चुके थे और उन्हें इस सेक्टर का काफी अच्छा नॉलेज था। राहुल ने राकेश के सामने एयरलाइन शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इस तरह इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत 2004 में हुई। उस समय देश की एविएशन इंडस्ट्री भारी नुकसान से जूझ रही थी। इसके बावजूद दोनों ने इस सेक्टर में उतरने की ठानी। उसी साल उन्हें एयरलाइन शुरू करने का लाइसेंस भी मिल गया। लेकिन कंपनी 2006 तक अपनी सेवाए शुरू नहीं पाई क्योंकि उसके पास विमान नहीं थे। गंगवाल ने अपनी जान-पहचान के चलते कंपनी को एयरबस से उधारी पर 100 विमान दिलाए। आखिरकार चार अगस्त 2006 से कंपनी ने अपनी उड़ान शुरू की।

सफलता का राज

जब इंडिगो ने अपना सफर शुरू किया तो एविएशन इंडस्ट्री मुश्किल दौर से गुजर रही थी। कई दिग्गज एयरलाइन के बीच अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। ऐसे में कंपनी ने सबसे पहले कंपनी ने उन लोगों को अपना कस्टमर बेस बनाया जो हवाई सफर तो करना चाहते थे लेकिन उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे। इससे इंडिगो के अधिक से अधिक टिकट बिके और उसे नुकसान न के बराबर हुआ। कंपनी ने देश के प्रमुख शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने का काम किया और कम कीमत पर लोगों को हवाई यात्रा देने का सपना पूरा किया। इंडिगो के जरिए ही हवाई चप्पल पहने लोगों का भी प्लेन में बैठने का सपना पूरा हुआ। हवाई जहाज में घूमना एक मिडिल क्लास परिवार के लिए केवल सपना होता है। इंडिगो ने उनके इस सपने को पूरा किया।

​रोजाना 1300 फ्लाइट

आज इंडिगो सफलता के शिखर पर है। देश में हर दो में से एक हवाई यात्री आज उसके प्लेन से उड़ान भर रहा है। इंडिगो ने हाल में एयरबस को 500 विमानों का ऑर्डर दिया है। कंपनी के पास अभी 304 विमान हैं और उसने इससे पहले 480 विमानों का ऑर्डर दिया है। ये विमान कंपनी को आने वाले दिनों में मिलेंगे। इस तरह कंपनी को अगले दशक तक कुल करीब 1000 विमान मिलेंगे। इससे कंपनी को अपना ऑपरेशनल कॉस्ट कम रखने, तेल बचाने और दूसरे लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। कंपनी रोजाना 1300 से ज्यादा फ्लाइट्स ऑपरेट करती है। इंडिगो में करीब 25,000 लोग काम करते हैं। दुनिया भर के 60 शहरों में इसके 126 ऑफिस हैं।

​दोनों में विवाद

2020 में राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया के बीच विवाद पैदा हो गया था। गंगवाल ने कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के नियमों में बदलाव की मांग की थी। गंगवाल ने फरवरी 2022 में कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था। गंगवाल का परिवार कंपनी में पांच से आठ फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। इसकी कीमत 7,500 करोड़ रुपये हो सकती है। 31 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक गंगवाल और उनकी पत्नी शोभा गंगवाल की इंटरग्लोब एविएशन में क्रमशः 13.23 फीसदी और 2.99 फीसदी हिस्सेदारी है। साथ ही उनके ट्रस्ट Chinkerpoo Family Trust की भी कंपनी में 13.5 फीसदी हिस्सेदारी है। शोभा गंगवाल ने फरवरी में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाई थी।

​एयरलाइन कंपनियों की कब्रगाह

इंडिगो ने ऐसे समय सफलता पाई जबकि कई दिग्गज कंपनियां धराशायी हो गई। शराब कारोबारी विजय माल्या ने किंगफिशर एयरलाइन शुरू की थी जो 2012 में दिवालिया हो गई। इसमें बैंकों के एक अरब डॉलर से अधिक डूब गए। भगोड़े घोषित किए जा चुके माल्या के खिलाफ फाइनेंशियल फ्रॉड का मामला चल रहा है। वह फिलहाल ब्रिटेन में हैं और उन्हें भारत लाने की कोशिश की जा रही है। सहारा ग्रुप के चेयरमैन सुब्रत रॉय ने भी एयरलाइन सेक्टर में कदम रखा था। उन्होंने एयर सहारा शुरू की थी। लेकिन कई साल तक नुकसान झेलने के बाद उन्होंने 2007 में इसे नरेश गोयल की जेट एयरवेज को बेच दिया। जेट एयरवेज ने भी 2019 में दम तोड़ दिया। स्पाइसजेट भी मुश्किलों में घिरी है जबकि गो फर्स्ट की उड़ानें फिलहाल बंद हैं। सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया की टाटा में घर वापसी हो चुकी है।


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