एलपीजी से शिफ्ट हों पीएनजी पर, आखिर सरकार ऐसा क्यों चाहती है छह बातों से समझिए

Updated on 26-03-2026 12:27 PM
यह कुछ साल पहले की बात है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की अगुवाई में साल 2016 में प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना (Pradhanmantri Urja Ganga Yojana) की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य यूपी-बिहार जैसे पिछड़े इलाकों में भी नेचुरल गैस की सप्लाई को सुनिश्चित करना है। विकसित राज्यों में तो गैस पाइपलाइन पहले ही आ चुकी है। इस योजना का असर दिखा है। अब देश के 300 से भी ज्यादा भौगोलिक क्षेत्रों में पाइप्ड गैस की पहुंच हो गई है। आज हम यहां बता रहे हैं कि सरकार इस योजना को क्यों पुश कर रही है?

सरकारी आदेश जारी हो गया

केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कहा है कि देश के वैसे इलाकों जहां पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas) का कनेक्शन उपलब्ध है, वहां के लोग तीन महीने के अंदर एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट हो जाएं। ऐसा नहीं करने पर उनकी एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। इस बारे में सरकार गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर चुकी है।

LPG से PNG शिफ्टिंग का आदेश क्यों जारी हुआ

आपको पता ही होगा कि हम अपने कुल खपत का 60 फीसदी एलपीजी गैस विदेशों से आयात करते हैं। इस समय पश्चिम एशिया में जो युद्ध छिड़ा है, उससे हमें भी दिक्कत हो गई है। हालांकि नेचुरल गैस का भी अधिकतर हिस्सा हम आयात ही करते हैं। लेकिन अपने यहां भी उतना नेचुरल गैस का उत्पादन हो जाता है, जिससे हमारे घरों में खाना बनाने के लिए पीएनजी की सप्लाई हो सके। यही नहीं, नेचुरल गैस हम खाड़ी देशों के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस, मोजाम्बिक आदि देशों से भी खरीदते हैं। वहां से गैस लाने के लिए जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरना होता है।

सरकार क्यों पुश कर रही है

एलपीजी विदेशों से लाकर पहले उसे रेल मार्ग, सड़क मार्ग या फिर पाइपलाइन से सिलेंडर बोटलिंग प्लांट में भेजना पड़ता है। उसके बाद उसे सिलेंडर में भर कर उसका लॉरी से ट्रांसपोर्टेशन होता है। भरे सिलेंडरों को बोटलिंग प्लांट से देश भर के एलपीजी डीलरों के गोदाम में भेजना होता है। वहां से ग्राहकों की मांग के अनुसार डीलर घर-घर एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई करते हैं। यदि लोग पीएनजी का कनेक्शन ले लेंगे तो सारी परेशानी दूर। एक बार गैस पाइप लाइन घर तक आ गई तो फिर महीने के तीसों दिन 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो जाएगी।

बाधाएं हुईं दूर

सामान्य तौर पर जो कंपनी किसी इलाके में गैस पाइपलाइन डालना चाहती है तो उसे विभिन्न विभागों और अथॉरिटी से मल्टीपल अप्रूवल लेना पड़ता है। इसके लिए फीस और चार्ज भी भरना होता है। कई बार एक्सेस ऑफ लैंड का डिनायल भी आ जाता है। कई आवासीय इलाकों में आरडब्ल्यूए भी अडंगा डालते हैं। लेकिन सरकार ने अभी जो आदेश जारी किया है, उसे सभी तरह की बाधाएं दूर हो गई हैं। अब गैस कंपनियों को कोई रोकने की हिम्मत नहीं कर सकेगा। जो रोकेगा, वह नप जाएंगे।

लोगों को होगा फायदा

एलपीजी के बदले पीएनजी पर शिफ्ट होने से सामान्य लोगों को भी फायदा होगा। इस समय एलपीजी का 14.2 किलो वाला एक घरेलू सिलेंडर करीब 1,000 रुपये का आता है। इसमें सरकारी सब्सिडी भी शामिल है। जबकि पीएनजी पर कोई सब्सिडी नहीं है। तब भी यह एलपीजी के मुकाबले सस्ता पड़ता है। दिल्ली एनसीआर के लोग तो बताते हैं कि पीएनजी की कीमत उन्हें एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले आधी पड़ती है। साथ ही सिलेंडर खत्म होने पर जल्दी डिलीवरी करवाने के झंझट, गैस एजेंसी के डिलीवरी मैन से गैस चोरी की शिकायत आदि से भी मुक्ति मिल जाती है।

सरकार को भी फायदा

इस फैसले से सरकार को भी भी फायदा है। अभी एलपीजी सिलेंडर के उज्ज्वला कनेक्शन पर सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी होती है। साथ ही घरेलू कनेक्शन के सिलेंडर पर भी सब्सिडी देनी होती है। इसका बोझ तो सरकारी खजाने पर पड़ता ही है। जब लोग एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट हो जाएंगे तो सरकार का इस मद में होने वाला खर्च बचेगा। उसका इस्तेमाल किसी और कार्य में हो सकेगा।


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