IPL से तय होगी टी-20 वर्ल्डकप की टीम- सबा करीम

Updated on 05-12-2023 02:39 PM

पूर्व क्रिकेट सबा करीम ने कहा कि टी-20 वर्ल्ड कप की टीम इंडिया IPL फॉर्म के आधार पर चुनी जाएगी। टी-20 फॉर्मेट का ICC टूर्नामेंट हर 2 साल में होता है, इसलिए टीमें इसे लेकर ज्यादा टेंशन नहीं लेतीं।

वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में टीम इंडिया की हार पर सबा ने कहा, भारत ने 30-40 रन कम बनाए। कोहली और राहुल अगर थोड़ा और तेज खेलते तो नतीजा बदल सकता था।

सबा करीम UAE में होने वाली ILT-20 के ट्रॉफी टूर के लिए भोपाल आए थे।  उन्होंने लीग और क्रिकेट से जुड़े कई रोचक सवालों के जवाब दिए। जानते हैं सबा करीम ने क्या कहा...

सवाल- टी-20 वर्ल्ड कप की स्ट्रैटजी के लिए ILT-20 कितनी इम्पॉर्टेंट है?
सबा करीम- कई टॉप प्लेयर्स लीग में खेलेंगे। बड़ी टीमों की नजरें टूर्नामेंट पर रहती हैं क्योंकि यहां बेस्ट के खिलाफ बेस्ट प्लेयर्स उतरते हैं। खिलाड़ी भी इन लीग्स में अच्छा परफॉर्म करने पर फोकस करते हैं ताकि वे अपनी नेशनल टीम में सिलेक्ट हो सके। यहां क्वालिटी कॉम्पिटिशन नजर आता है, इसलिए वर्ल्ड कप में प्लेयर्स के खिलाफ स्ट्रैटजी बनाने के लिए भी लीग इम्पॉर्टेंट है।

सवाल- आप दिल्ली कैपिटल्स में टैलेंट स्काउट का हिस्सा रहे, तब घरेलू खिलाड़ियों का सिलेक्शन कैसे करते थे?
सबा करीम- IPL टीमें मिनी और मेगा ऑक्शन को ध्यान में रखते हुए टैलेंट स्काउट करती है। ऑक्शन से पहले टीम में खाली स्लॉट के हिसाब से ही स्ट्रैटजी बनती हैं। टैलेंट स्काउट हर लीग पर नजर रखता है, ताकि बेस्ट प्लेयर्स को शामिल कर अपनी टीम को स्ट्रॉन्ग बना सके। फ्रेंचाइजी सभी घरेलू प्लेयर्स पर भी नजर रखती हैं। बेस्ट प्लेयर्स को अपने यहां ट्रायल्स के लिए बुलाती हैं और उन्हें टीम में शामिल करती है। फिर भी इंटरनेशनल प्लेयर्स ज्यादा अहम रहते हैं, इसलिए ज्यादातर टीमें बड़े प्लेयर्स को शामिल करने पर फोकस करती हैं।

सवाल- ILT-20 की एक टीम में 9 विदेशी खेलते हैं। 6 टीमों में अगर UAE के 12 ही प्लेयर्स रहेंगे तो बाकी घरेलू प्लेयर्स कहां जाएंगे?
सबा करीम- टीमों में 2 लोकल प्लेयर्स UAE के भी खेलते हैं और 5 से 6 घरेलू प्लेयर्स स्क्वॉड का हिस्सा रहते हैं। प्लेइंग-11 में खेलने वाले 2 खिलाड़ी बहुत क्वालिटी वाले होते हैं, अगर इनकी लिमिट बढ़ाएंगे तो लीग की क्रिकेट क्वालिटी पर असर हो सकता है। एक टीम में 9 विदेशी यानी एक मैच में 18 बेस्ट विदेशी प्लेयर्स खेलते हैं। इससे कॉम्पिटिशन बढ़ता है और बेहतर क्रिकेट देखने को मिलता है।

फ्रेंचाइजी टीम में रहने से ही घरेलू प्लेयर्स का गेम सुधरता है। वे इंटरनेशनल प्लेयर्स के साथ प्रैक्टिस करते हैं, इससे उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वे नेशनल-इंटरनेशनल लेवल पर बेहतर परफॉर्म कर पाते हैं। अभी शुरुआती सीजन है, मुझे यकीन है आने वाले टाइम में UAE के ज्यादा प्लेयर्स टीमों में शामिल किए जाएंगे।

सवाल- ILT-20 दो देशों की लीग के साथ क्लैश करता है। एक साथ इतना ज्यादा टी-20 क्रिकेट क्यों जरूरी है?
सबा करीम- ILT-20 प्लेयर्स को ऑप्शन देता है, खिलाड़ी अगर बाकी लीग में नहीं खेलना चाहें तो वह यहां आकर खेल सकते हैं। बाकी जगह 3-4 विदेशी ही खेल सकते हैं लेकिन ILT-20 में 9 ओवरसीज प्लेयर्स को मौका मिल सकता है। एक एथलीट का करियर ज्यादा लम्बा होता भी नहीं है और इस तरह की फ्रेंचाइजी लीग में पैसा कमाकर वह अपना करियर सेटल कर सकते हैं।

सवाल- BCCI अपने प्लेयर्स को विदेशों की फ्रेंचाइजी लीग क्यों नहीं खेलने देता?
सबा करीम- भारत के प्लेयर्स भी इंग्लैंड और बाकी देशों में क्रिकेट खेलने जाते हैं, बस उन्हें फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेलने की परमिशन नहीं है। 20 साल पहले भी क्रिकेटर काउंटी खेलने इंग्लैंड जाते थे। प्लेयर्स को टी-20 की परमिशन नहीं देने के पीछे BCCI की अपनी वजहें हैं। भारत में IPL और घरेलू क्रिकेट भी 12 में से 8 महीने तक चलता है, इस बीच 4 महीने खिलाड़ी काउंटी खेलने चले जाते हैं। फिर भी खिलाड़ियों को विदेशी लीग खेलना है तो वे रिटायरमेंट के बाद खेल सकते हैं। रॉबिन उथप्पा, अंबाती रायडु और युसुफ पठान जैसे प्लेयर्स विदेशी लीग में इस तरह खेल ही चुके हैं।

सवाल- क्या टीम इंडिया फियर ऑफ फेल्योर के कारण वर्ल्ड कप फाइनल हारी?
सबा करीम- जरूर, मुझे भी लगता है कि टीम पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा परफॉर्म करने के बाद नॉकआउट में बिखर जाती है। ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसके पीछे कोई क्रिकेटिंग रीजन नहीं है। कुछ को समस्या है जिसे हम आइडेंटिफाई नहीं कर पा रहे। 2019 और 2015 में भी हम शुरुआत में बहुत अच्छा खेले लेकिन सेमीफाइनल में हार गए। हमारे पास खिलाड़ी इतने अच्छे हैं कि हमें अगले 10 साल तक डॉमिनेट करना चाहिए, लेकिन दबाव या हार का डर या पता नहीं क्या रीजन है जिस कारण हम ICC टूर्नामेंट नहीं जीत पा रहे।

सवाल- वर्ल्ड कप फाइनल में भारत की हार के 3 कारण क्या मानते हैं?
सबा करीम- पिच को हम समझ नहीं सके। स्ट्रैटजी में ऑस्ट्रेलिया ने हमसे बेहतर परफॉर्म किया और तीसरा कारण हमारी बैटिंग। ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों ने धीमी पिच होने के बावजूद अच्छी गेंदबाजी की। हमारी टीम ने 30-40 रन कम बनाए। दूसरी पारी में बैटिंग आसान हो गई और हमारे गेंदबाजों को विकेट निकालने के ज्यादा मौके नहीं मिले।

अगर मैं कप्तान होता तो विराट-राहुल की पार्टनरशिप में 3-4 ओवर के बाद थोड़ी और तेज रन की उम्मीद करता। उनकी साझेदारी थोड़ी और तेज होनी चाहिए थी। हमारे बल्लेबाज उस मैच में एग्रेसिव नहीं खेल पाए और हम हार गए।

19 नवंबर 2023 को वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 6 विकेट से हराया था। विराट कोहली और केएल राहुल ने 3 विकेट जल्दी गिरने के बाद 109 बॉल पर 67 रन की धीमी पार्टनरशिप की। विराट ने 63 बॉल पर 54 और राहुल ने 107 बॉल पर 66 रन बनाए थे।

सवाल- क्या कोहली और रोहित को टी-20 वर्ल्ड कप खेलना चाहिए?
सबा करीम- मुझे नहीं लगता अभी टीम सिलेक्शन पर सोचने की जरूरत है। भारत का टीम सिलेक्शन पूरी तरह से IPL के फॉर्म के आधार पर निर्भर करेगा। टी-20 वर्ल्ड कप हर 2 साल में एक बार होता है, इसलिए उस पर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर टीमें इसी हिसाब से सोचती हैं। जो टूर्नामेंट से पहले अच्छे फॉर्म में रहेंगे, उन्हें ही टीम में चुना जाएगा।

अभी की टीम में भी ज्यादा सीनियर्स नहीं हैं लेकिन ये सिलेक्टर्स पर निर्भर करता है कि वह आगे किन्हें मौके देते रहना चाहते हैं। ट्रांजिशन का फेज तो चल ही रहा है लेकिन ICC टूर्नामेंट में युवाओं के साथ सीनियर प्लेयर्स का अनुभव होना भी बहुत ज्यादा जरूरी है।

सवाल: साउथ अफ्रीका दौरे पर 3 फॉर्मेट में 3 अलग कप्तान हैं। क्या यही टीम इंडिया का भविष्य है?
सबा करीम- वर्कलोड मैनेजमेंट के लिए इतने ज्यादा प्लेयर्स को मौके दिए जा रहे हैं और इसीलिए तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग कप्तान भी चुने गए। भारत बाकी देशों के मुकाबले इस वक्त सबसे ज्यादा क्रिकेट खेल रहा है। खिलाड़ियों पर ज्यादा प्रेशर न आए, इसीलिए युवा खिलाड़ियों को मौके मिल रहे हैं।

सवाल- आप टीम इंडिया के प्लेयर और सिलेक्टर दोनों रहे। सिलेक्टर के रूप में आप प्लेयर्स के इमोशन को किस तरह समझते हैं?
सबा करीम- प्लेयर के रूप आप हमेशा सोचते हैं कि मैंने अच्छा परफॉर्म किया है तो मेरा सिलेक्शन हो ही जाना चाहिए। लेकिन सिलेक्टर के रूप में आपकी कोशिश होती है कि आप बेस्ट प्लेयर्स को ही टीम में चुनें। पहले मैच कम होते थे और प्लेयर्स बड़े शहरों से ही निकलते थे लेकिन आज ब्रॉडकास्टिंग की सुविधा हो गई। अब मैच बहुत ज्यादा होते हैं और सिलेक्टर हर मैच पर नजर रखते हैं। अब छोटे शहरों से भी रिंकू सिंह और यशस्वी जायसवाल खिलाड़ी निकलते हैं। ज्यादा ऑप्शन होने से सिलेक्टर्स बेस्ट टीम चुनते हैं और टीम टॉप क्लास ही होती है।



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