न्यू लेबर कोड में बदल गई है 'परिवार' की परिभाषा, अब करीबी रिश्तेदार भी सरकारी योजनाओं में होंगे शामिल

Updated on 28-11-2025 03:16 PM
नई दिल्ली: आप इस बात से वाकिफ होंगे ही कि देश में चार नए श्रम संहिता (Labour Code) लागू हो गए हैं। इनमें वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्त संहिता शामिल हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता (CCS Code), 2020 में एक बड़ा बदलाव आया है। इसने परिवार की परिभाषा को बड़ा कर दिया है। इससे लाखों कामकाजी कर्मचारियों, खासकर महिलाओं को फायदा होगा।

बदल गई परिवार की परिभाषा

इस नए कानून के तहत, कर्मचारी लाभ के लिए 'परिवार' में कौन-कौन शामिल होंगे, इसकी परिभाषा को बड़ा किया गया है। यह बदलाव लाखों परिवारों के लिए वित्तीय योजना बनाने के तरीके को बदल सकता है। इससे बीमा कवरेज, ग्रेच्युटी लाभ और ESI की पात्रता में सुधार होगा।

कहां लागू होगी यह परिभाषा

यह बढ़ी हुई परिभाषा कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं पर लागू होंगी। इनमें Employees' State Insurance Corporation (ESIC), Employees' Provident Fund (EPF), ग्रेच्युटी और काम पर होने वाली दुर्घटनाओं के लिए मुआवजा शामिल हैं। सिरील अमरचंद मंगलदास Cyril Amarchand Mangaldas के पार्टनर अन्ना थॉमस ने हमारे सहयोगी ईटी को बताया कि यह बढ़ी हुई परिभाषा सभी योग्य कर्मचारियों के आश्रितों पर लागू होती है, चाहे वे स्थायी कर्मचारी हों या फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी। लेकिन, यह नए नियम केवल ऊपर वर्णित सरकारी योजनाओं पर ही लागू होते हैं

यहां लागू नहीं होगा

ईटी से बातचीत में लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन अटार्नी Lakshmikumaran and Sridharan Attorneys के एक्जीक्यूटिव पार्टनर नूरुल हसल (Noorul Hassan) बताते हैं, 'यह अपने आप नियोक्ता द्वारा संचालित लाभों जैसे ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस, मेडिक्लेम, मेडिकल रीइंबर्समेंट या वेलनेस प्रोग्राम पर लागू नहीं होगा, क्योंकि ये ज्यादातर स्वेच्छा से दिए जाते हैं।

वित्तीय जिम्मेदारी आगे तक फैली है

यह हालिया बदलाव इस बात को दर्शाता है कि भारत के श्रम कानून अब परिवार को किस तरह से देखते हैं। यह स्वीकार करता है कि भारतीय परिवारों में वित्तीय और देखभाल की जिम्मेदारियां सिर्फ एक छोटे से परिवार से कहीं आगे तक फैली हुई हैं। पुरानी व्यवस्था के तहत, कर्मचारी के परिवार लाभ में केवल कुछ खास रिश्तेदार ही शामिल हो सकते थे। आमतौर पर ये थे:
• जीवनसाथी (पति/पत्नी)
• बच्चे
• माता-पिता
• अविवाहित बेटियां
Hassan कहते हैं, 'परंपरागत रूप से, श्रम कानूनों के तहत परिवार के सदस्यों को एक खास समूह तक सीमित रखा गया था, जैसे पिता, माता, बेटा, अविवाहित बेटी और पत्नी। अदालतों ने अक्सर इस खास समूह से बाहर के करीबी रिश्तेदारों को भी अमान्य ठहराया है। इससे नामांकन का उद्देश्य पूरी तरह से विफल हो जाता था।'

अब परिवार के दायरे में कौन

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, जिसका उद्देश्य नौ केंद्रीय श्रम कानूनों को एक व्यापक ढांचे में कंसोलिडेट करना है, ने इस परिभाषा को काफी बड़ा कर दिया है। नई परिभाषा में अब सभी कर्मचारियों के नाना-नानी (maternal grandparents) को शामिल किया गया है। यही नहीं, कर्मचारी के ऐसे नाबालिग अविवाहित भाई या बहन जो कर्मचारी पर पूरी तरह से निर्भर हों, भी शामिल होंगे। खासकर महिला कर्मचारियों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। अब उनके सास-ससुर (parents-in-law) को भी आश्रितों के रूप में शामिल किया गया है।

महिला कर्मचारियों को हुआ फायदा

कर्मा मैनेजमेंट ग्लोबल कंसल्टिंग सॉल्यूशन (Karma Management Global Consulting Solutions) की एमडी और चीफ विजन ऑफिसर प्रतीक वैद्य कहते हैं कि पहले, महिलाएं केवल अपने माता-पिता को ही आश्रित के रूप में शामिल कर सकती थीं, अपने ससुराल वालों को नहीं। वह बताते हैं, 'अब अगर वह अपने ससुराल वालों का सहारा बनना चाहती हैं तो वह ऐसा कर सकती हैं।' वह आगे बताते हैं कि युवा कर्मचारी जरूरत पड़ने पर अपने भाई-बहनों का भी सहारा बन सकते हैं।

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