वह दौर जब जापान ने जमकर छापा था रुपया... आखिर क्या थी इसके पीछे वजह?

Updated on 07-12-2023 02:17 PM
नई दिल्ली : क्या कोई देश किसी दूसरे देश की करेंसी छाप सकता है। बिल्कुल नहीं। सिर्फ उस देश का सेंट्रल बैंक ही उस देश की करेंसी छाप सकता है। लेकिन एक दौर में भारत की करेंसी यानी रुपया किसी दूसरे देश ने जमकर छापा था। आइए जानते हैं कि इसकी क्या कहनी है। एक समय था जब जापान ने जमकर भारतीय रुपया छापा था। बर्मा पर जापान के कब्जे के बाद ये नोट खूब चलन में रहे थे। जापान ने बर्मा पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए रुपये के नोट छापे थे। जापानी सरकार ने अंडमान के लिए भी रुपये के नोट छापे थे।

जापान ने क्यों छापी थी हमारी करेंसी?

रुपया भारत की करेंसी है। लेकिन कभी जापान के सेंट्रल बैंक ने खूब रुपये के नोट छापे थे। जापान ने 1, 5, 10 और 100 रुपये के नोट छापे थे। इन नोटों पर जापानी सरकार लिखा हुआ था। कहानी कुछ यूं हैं कि दूसरे विश्‍व युद्ध के समय जापानी सेना ब्रिटिश साम्राज्‍य के अधीन क्षेत्रों की तरफ बढ़ रही थी। बर्मा पर जापानी सेना ने कब्‍जा कर लिया था। जापान ने बर्मा पर कब्‍जे के बाद वहां अपना प्रभुत्‍व स्थापित करना चाहा। इसी वजह से उसने अपनी करेंसी लॉन्‍च करने का फैसला किया और जमकर रुपया छापा

अंडमान निकोबार के लिए भी छापे थे नोट

बर्मा के बाद अब जापानी नौसेना की नजर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर थी। 22 मार्च, 1942 को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर भी जापान का कब्‍जा हो गया। यहां के लिए भी जापान ने रुपये के नोट छापे। रुपया यहां पहले से ही चलन में था। इसलिए करेंसी का नाम रुपया ही रखा गया।

कौन-कौन से नोट छापे

जापान ने आधा रुपये, 1, 5, 10 और 100 रुपये के नोट छापे थे। B सीरीज के इन नोट पर BA, BD जैसे कोड रहते थे। इन नोटों पर जापानी सरकार लिखा हुआ था। लेकिन इन्हें रुपया ही नाम दिया गया था।

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