आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित गोडबोले दंपत्ति

Updated on 07-07-2026 08:25 PM

रायपुर, बस्तर में पिछले 36 वर्षों से आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले की सेवा को देश ने पद्मश्री सम्मान देकर सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि बस्तर की जनता के लिए किए गए उनके समर्पित सेवा कार्यों का राष्ट्रीय सम्मान है। 

समाज सेवा के लिए चुना बस्तर

महाराष्ट्र के सातारा जिले के मूल निवासी डॉ. रामचंद्र गोडबोले आयुर्वेद चिकित्सक हैं, जबकि उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले समाज कार्य (एमएसडब्ल्यू) की विशेषज्ञ हैं। वर्ष 1990 में विवाह के बाद दोनों ने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। सेवा कार्य के लिए उन्हें मेघालय और बस्तर में से किसी एक क्षेत्र का चयन करना था। उन्होंने बस्तर को चुना और तभी से यहीं के लोगों के बीच रहकर सेवा कर रहे हैं।

आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित गोडबोले दंपत्ति

विश्वास जीतकर पहुंचाई स्वास्थ्य सेवाएं

शुरुआत में बस्तर की भाषा, संस्कृति और जीवनशैली उनके लिए नई थी। इसके बावजूद उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों के बीच रहकर उनका विश्वास जीता। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में हजारों जरूरतमंद आदिवासियों का निःशुल्क उपचार किया। जहां स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं थीं, वहां चिकित्सा शिविर लगाए और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने में भी सहयोग किया।

महिलाओं और बच्चों के लिए किया विशेष कार्य

श्रीमती सुनीता गोडबोले ने गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय बोलियां सीखकर आदिवासी महिलाओं और बच्चों के साथ सहज संवाद स्थापित किया। उन्होंने कुपोषण से मुक्ति, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बाल शिक्षा, सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता, बाल अधिकार संरक्षण और बालिकाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ और कई गांवों में पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी।

बनफूल के माध्यम से जारी है सेवा

वर्तमान में गोडबोले दंपत्ति बनफूल संस्था के माध्यम से जनजातीय बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि सेवा केवल ईलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी होती है।

सेवा कार्यों को मिला राष्ट्रीय सम्मान

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों पद्मश्री सम्मान प्राप्त करना गोडबोले दंपत्ति के तीन दशक से अधिक समय से किए जा रहे समर्पित सेवा कार्यों की राष्ट्रीय पहचान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भी उनके योगदान की सराहना की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

प्रेरणा की मिसाल बना समर्पण

गोडबोले दंपत्ति की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण के बल पर समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन बस्तर के आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित किया है। उनका कार्य आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।



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