गधे पालने के लिए 50 लाख रुपये तक दे रही सरकार, इस फोकस की वजह जान लीजिए

Updated on 07-03-2026 12:30 PM
नई दिल्‍ली: डंकी फार्मिंग ( गधा पालन ) का बिजनेस आइडिया शायद आपको अजीब लगे। लेकिन, भारत सरकार का इस पर जबरदस्‍त फोकस है। वह डंकी फार्मिंग को बेहद आकर्षक बनाना चाहती है। और तो और इसके लिए सरकार बड़ी फाइनेंशियल मदद दे रही है। नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत, एंटरप्रेन्योर और किसान डंकी ब्रीडिंग फार्म लगाने के लिए 50 लाख रुपये तक की मदद पा सकते हैं। इस स्कीम का मकसद पशुधन बिजनेस को बढ़ावा देना है। साथ ही भारत में तेजी से घट रही डंकी पॉपुलेशन को फिर से बढ़ाने में भी मदद करना है।


क्‍या चाहती है सरकार?

  • इस पहल की मंशा देश में डंकी पॉपुलेशन में तेजी से हो रही कमी को देखते हुए पशुधन बिजनेस में दिलचस्पी फिर से जगाना है।
  • अधिकारियों का कहना है कि फाइनेंशियल मदद से ज्‍यादा लोग ब्रीडिंग फार्म में इन्वेस्ट करने के लिए बढ़ावा पा सकते हैं।
  • इससे देसी जानवरों की नस्लों को बचाने में मदद मिल सकती है।

डंकी फार्मिंग के लिए सब्सिडी सपोर्ट

  • फिशरीज, एनिमल हस्बैंड्री और डेयरी मिनिस्ट्री के तहत एनिमल हस्बैंड्री और डेयरी डिपार्टमेंट ने गाइडलाइंस जारी की है।
  • इसके मुताबिक, सरकार कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट पर 50% कैपिटल सब्सिडी देती है।
  • गाइडलाइंस कहती हैं कि इसकी लिमिट 50 लाख रुपये है।

कौन कर सकता है आवेदन?

  • यह मदद कई तरह के एप्लीकेंट के लिए है।
  • इस स्कीम के तहत लोग, किसान प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPOs), सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHGs), जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLGs), कोऑपरेटिव और सेक्शन 8 कंपनियां सभी अप्लाई कर सकते हैं।
  • डंकी ब्रीडिंग यूनिट के लिए क्‍वालिफाई करने को प्रोजेक्ट में कम से कम 50 गधी (फीमेल डंकी) और पांच गधे (मेल डंकी) होने चाहिए।

सब्सिडी दो किश्तों में दी जाती है:

  • पहली किश्त बैंक से प्रोजेक्ट के लिए लोन मंजूर होने के बाद दी जाती है।
  • दूसरी किश्त फार्म पूरा होने और अधिकारियों की ओर से वेरिफाई होने के बाद दी जाती है।
  • यह स्कीम सिर्फ देसी नस्लों को सपोर्ट करती है, जो सरकार की देसी जानवरों की किस्मों को बचाने की कोशिश का हिस्सा है।

सरकार डंकी फार्मिंग को क्यों बढ़ावा दे रही है?

अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद भारत में डंकी पॉपुलेशन में तेजी से आ रही गिरावट को रोकना भी है।20वीं लाइवस्टॉक सेंसस (2019) के डेटा से पता चलता है कि 2019 में देश में लगभग 1.23 लाख गधे थे, जो 2012 की तुलना में लगभग 60% कम है।

अर्थव्‍यवस्‍था में कैसे निभाई भूमिका?

  • दशकों से गधों ने ग्रामीण ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन के कामों में अहम भूमिका निभाई है।
  • हालांकि, मशीन वाले इक्विपमेंट के तेजी से फैलने से कई सेक्टर में गधों का इस्तेमाल कम हो गया है।
  • जैसे-जैसे डिमांड कम हुई, जानवरों की आबादी भी तेजी से कम हो गई।

सब्सिडी के जरिए ब्रीडिंग फार्म को सपोर्ट करके सरकार को उम्मीद है कि एंटरप्रेन्योर इन जानवरों को पालने और बचाने में वैल्यू देखेंगे।


डंकी फार्मिंग में क्‍या हैं बिजनेस संभावनाएं?

  • ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन के काम में गधों का पारंपरिक इस्तेमाल होता आया है।
  • इसके अलावा, डंकी फार्मिंग अब कई देशों में एक खास लाइवस्टॉक बिजनेस बन रहा है।
  • एंटरप्रेन्योर ब्रीडिंग जानवरों को बेचकर रूरल इंडस्ट्रीज के लिए काम करने वाले गधों की सप्लाई करके या गधे का दूध बनाकर इनकम कर सकते हैं।
  • इसे कुछ इंटरनेशनल मार्केट में एक प्रीमियम प्रोडक्ट माना जाता है।

डंकी मिल्‍क का बहुत है ड‍िमांड

  • डंकी मिल्‍क का इस्तेमाल खास हेल्थ प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक्स में किया जाता है।
  • इसमें ऐसे न्यूट्रिएंट्स होते हैं जिन्हें स्किन केयर के लिए फायदेमंद माना जाता है।
  • गधी से हर दिन बहुत कम मात्रा में दूध मिलता है।
  • ऐसे में यह प्रोडक्ट अक्सर खास मार्केट में ऊंची कीमतों पर बेचा जाता है।
  • इससे यह छोटे लेवल के पशुपालन बिजनेस के लिए एक उभरता हुआ मौका बन गया है।

ग्लोबल डिमांड और एक्सपोर्ट वैल्यू

  • दुनिया भर में डंकी फार्मिंग में दिलचस्पी बढ़ाने वाला एक और कारण गधे की खाल की डिमांड है।
  • इसका इस्तेमाल एजियाओ बनाने में होता है।
  • एजियाओ एक जिलेटिन प्रोडक्ट है।
  • इसका इस्तेमाल पारंपरिक चीनी दवा में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
  • यह प्रोडक्ट गधे की खाल को प्रोसेस करके तैयार किया जाता है।
  • कई एशियाई मार्केट में हेल्थ सप्लीमेंट के तौर पर इसे बेचा जाता है।

बढ़ती डिमांड के कारण कुछ देशों ने डंकी प्रोडक्ट्स से जुड़े ब्रीडिंग फार्म और एक्सपोर्ट के बारे में पता लगाया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि देसी गधों की ब्रीडिंग और देसी नस्लों के बचाव से किसानों को खास मार्केट तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। साथ ही देश में इनकी घटती आबादी को भी बचाया जा सकता है।

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