ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश भारतीय बासमती चावल तक पहुंची, समंदर में ही अटके लाखों टन का कंशाइनमेंट

Updated on 03-03-2026 01:12 PM
नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पश्चिम एशियाई देश पूरी तरह से झुलस रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के बंद होने से खाड़ी के अधिकतर देशों में पानी के जहाजों का आवागमन अवरूद्ध हो गया है। इस वजह से भारत समेत दुनिया के अधिकतर देशों में क्रूड ऑयल (Crude Oil) और नेचुरल गैस (Natural Gas) की आपूर्ति तो रुक ही गई है। खाड़ी देशों को भारत से होने वाला चावल का निर्यात भी ठहर गया है।

करीब छह लाख टन चावल समंदर में

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया बताते हैं कि भारत से खाड़ी देशों को भेजा जाने वाला चावल का ट्रांजिट समय करीब 40 दिनों का है। इनमें भारतीय बंदरगाह पर लगने वाला समय, जहाजों पर रहने का समय और डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाह पर लगने वाला समय शामिल है। अभी तो चावल का एक्सपोर्ट रुक गया है, लेकिन इससे पहले भेजा गया करीब छह लाख बासमती चावल बंदरगाह में, समंदर में या डेस्टिनेशन कंट्री के बंदरगाहों पर अटके हैं।

निर्यातकों के फंसे हजारों करोड़ रुपये

सेतिया ने बताया कि इस समय विभिन्न बंदरगाहों और समंदर में जो भारतीय बासमती चावल के कंशाइनमेंट अटके हैं, उसका वैल्यू पांच से छह हजार करोड़ रुपये है। निर्यातकों का जब इतना ज्यादा माल अटक गया है तो उन्होंने नए कंशाइनमेंट भेजने के लिए बैगिंग या पैकिंग का काम पूरी तरह से रोक दिया है। जब हालात सुधरेंगे, तब यह काम फिर से शुरू होगा।

70% निर्यात खाड़ी देशों को

भारत से हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात होता है। इसमें से करीब 70 फीसदी निर्यात खाड़ी देशों को होता है। मतलब कि साल में करीब 45 लाख टन बासमती चावल हम खाड़ी देशों को ही बेचते हैं। इसमें से छह से सात लाख टन बासमती चावल का निर्यात तो ईरान को होता रहा है। ईरान को बासमती निर्यात का रिकॉर्ड 14 लाख टन का है। अब जबकि वहां युद्ध छिड़ गया है तो खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात का क्या होगा, आप समझ सकते हैं।

पिछले साल 60 लाख टन का निर्यात

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से कुल 60.65 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया। रुपये में इसकी वैल्यू 50,312 करोड़ रुपये और डॉलर में 5.94 अरब डॉलर थी। भारत में 2024-25 में कुल 15.01 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था। बासमती चावल का उत्पादन 70 से 75 लाख टन का था। चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से दिसंबर तक ही खाड़ी देशों को 32 लाख टन से ज्यादा बासमती चावल का निर्यात किया जा चुका है।

घटेंगे चावल के दाम?

विजय सेतिया का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है उसका असर जल्दी ही भारत में बासमती चावल की कीमतों पर भी दिख सकता है। इसके दाम गिर सकते हैं। फिलहाल तो निर्यातकों ने पैकिंग को रोक दिया है। वे वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।

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