रायपुर साहित्य महोत्सव में गूंजता रहा राजनांदगांव जिले का नाम

Updated on 29-01-2026 12:20 PM

राजनांदगांव।  राजधानी रायपुर में जनसंपर्क विभाग एवं साहित्य अकादमी-रायपुर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव के बहुरंगी विमर्शमयी वातावरण में राजनांदगांव जिले ने भी रेखांकनीय भागीदारी निभाकर यहां कि सृजनधर्मी परम्पराओं का सफल निर्वाहन किया। 23 से 25 जनवरी 2026 तक अटल नगर नया रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित इस साहित्योत्सव में एक ओर विशाल पंडालों में अलग अलग विषयों पर ख्यातिनाम लेखकों, साहित्यकारों, कवियों और संस्कृतिकर्मियों द्वारा विमर्श होते रहे, तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ लोकसंस्कृति, पुस्तक प्रदर्शनी, ओपन माइक, पारम्परिक व्यंजन के स्टॉल जनमानस के आकर्षण का केन्द्र रहे। संस्कारधानी राजनांदगांव के रचनाकारों ने इसमें शिरकत कर उत्सव का न केवल आनंद उठाया बल्कि संस्कारधानी का प्रतिनिधित्व भी किया।

त्रिवेणी परिसर की विशाल झांकी रही राजनांदगांव के साहित्य वैभव के साथ स्वागत-बिंदु

राजनांदगांव की साहित्यिक विरासत के प्रकाश स्तंभ त्रिवेणी परिसर स्थित मुक्तिबोध स्मारक व संग्रहालय पर केंद्रित विशाल झांकी पूरे उत्सव में आकर्षण का केंद्र रही। जनसम्पर्क विभाग द्वारा बनाई गई यह कृति प्रवेश द्वार पर राजनांदगांव के साहित्य वैभव के साथ स्वागत-बिंदु थी। एक विशाल किताब के आकार में बनी इस झांकी के एक भाग में चित्रित मुक्तिबोध संग्रहालय और उसके दूसरे भाग में लिखे विवरण ने हजारों आने वाले को प्रेरित किया।

प्रथम दिवस गोष्ठी में राजनांदगांव पर की कई चर्चा

साहित्यकार डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा ने हिंदी साहित्य के व्योम में छत्तीसगढ़ के नक्षत्र विषय पर दिया वक्तव्य

साहित्य उत्सव के प्रथम दिन राजनांदगांव के प्रख्यात इतिहासकार व साहित्यकार डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा को छत्तीसगढ़ के साहित्यिक अवदान पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण सत्र में अभिभाषण हेतु आमंत्रित किया गया था। डॉ. शर्मा ने हिंदी साहित्य के व्योम में छत्तीसगढ़ के नक्षत्र विषय पर श्याम लाल चतुर्वेदी पंडाल में अपना वक्तव्य दिया। इस सत्र में उन्होंने सूत्रधार की महती भूमिका भी निभाई। सत्र में कहानीकार डॉ. सरला शर्मा, कवि माणिक विश्वकर्मा, आलोचक डॉ. मनिकेतन प्रधान व छंद विशेषज्ञ अरूण कुमार निगम ने सहभागिता की। संस्कारधानी के डॉ. चंद्र शेखर शर्मा ने अपने वक्तव्य में राजनांदगांव के साहित्यिक योगदान के अलावा यहां के साहित्य सेवियों पर चर्चा कर पूरे पंडाल के समक्ष राजनांदगांव की मजबूत नींव का रहस्य बताया। अपने प्रवर्तन विषय हिंदी साहित्य के व्योम में छत्तीसगढ़ के नक्षत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी भाषाओं के प्रति उदार रही है। छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ हिंदी भाषा और साहित्य में छतीसगढ़ और उसमें भी राजनांदगांव का योगदान उल्लेखनीय है। राजनांदगांव साहित्य की तीन अलग-अलग धाराओं के संगम के कारण हिंदी साहित्य की त्रिवेणी है। यह डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी,  गजानन माधव मुक्तिबोध एवं डॉ. बल्देव प्रसाद मिश्र की प्रिय कर्मस्थली रही।  गजानन माधव मुक्तिबोध ने अपने जीवन का स्वर्णिम सृजन राजनांदगांव में ही कर पाए, क्योंकि यहां उनको उनके अनुकूल परिस्थितियां मिलीं। इसी प्रकार बिलासपुर में लोचन प्रसाद पाण्डेय ने छायावाद का प्रवर्तन किया। वे छायावाद के प्रवर्तक हैं। इसी श्रृंखला में हिंदी की पहली कहानी लिखने की प्रेरणा भी इसी धरती से माधवराव सप्रे को मिली। छतीसगढ़ का योगदान हिंदी साहित्य में विशेष उल्लेखनीय है।

दूसरे दिन किया काव्यपाठ

दूसरे दिन राजनांदगांव जिले के आमंत्रित कवियों ने  सुरजीत नवदीप मंडप के मंच पर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के कवियों हेतु सरस काव्य पाठ कर प्रशंसा बटोरी। इस कवि सम्मेलन का संयोजन डॉ. चन्द्र शेखर शर्मा ने किया था। संस्कारधानी राजनांदगांव के साहित्यकारों की सक्रिय भागीदारी रही। डॉ. चंद्रशेखर शर्मा के मंच संचालन में राजनांदगांव के दर्जनभर कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मुग्ध किया। काव्य पाठ करने वालो में डॉ. शंकर मुनि राय, अब्दुस्सलाम कौसर, प्रभात तिवारी, शत्रुघ्न सिंह राजपूत, नीलम तिवारी, डा. चंद्रशेखर शर्मा, डॉ. नीलम तिवारी, वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू, अनुराग सक्सेना, ओमप्रकाश साहू अंकुर, महेन्द्र कुमार बघेल मधु, राज कुमार चौधरी रौना, डॉ. इकबाल खान, डी.आर.सिन्हा, फक़ीर साहू शामिल थे। इस महती आयोजन में राजनांदगांव से अखिलेश तिवारी, डॉ. प्रवीण साव, सचिन निषाद, जितेंद्र कुमार पटेल, फकीर प्रसाद साहू फक्कड़,  हेमलाल सहारे, लखन लाल कलामे, जसवंत मंडावी, चंचल साहू, लीलाधर सिन्हा सम्मिलित हुए।

सम्मेलन के तीसरे दिन भी नगर के रचनाकारों की सक्रिय भागीदारी रही। इस दिन आत्माराम कोसा, अखिलेश मिश्रा, मैन सिंह मौलिक, प्रभास गुप्ता आदि ने उपस्थिति दर्ज कराई। राजनांदगांव जिले की भागीदारी पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष  शशांक शर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त कर आयोजन को सफल करने हेतु सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया है।



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