अमेरिका-चीन जिस 'खजाने' के लिए लड़ रहे, उसने बना दिया इस महिला को रानी, बहुत पहले भांप ली थी ताकत

Updated on 06-11-2025 03:09 PM
नई दिल्‍ली: जीना राइनहार्ट ऑस्ट्रेलिया की सबसे अमीर महिला हैं। चीन पर रेयर अर्थ मिनरल (दुर्लभ-पृथ्वी खनिज) की निर्भरता कम करने की कोशिशों से वह मालामाल हो गई हैं। वाशिंगटन और बीजिंग के बीच चल रहे ट्रेड वॉर से दूर राइनहार्ट ने रेयर अर्थ के वैश्विक खेल को अपने फायदे में बदल दिया है। वह अब चीन के बाहर रेयर अर्थ में सबसे बड़े निवेश वाली शख्सियत बन गई हैं। दो दशक पहले आयरन ओर यानी लौह अयस्क से बेशुमार दौलत बनाने वाली राइनहार्ट की कुल संपत्ति अब 32.9 अरब डॉलर है। सिर्फ चार सूचीबद्ध रेयर अर्थ कंपनियों में उनके निवेश का मूल्य 1.8 अरब डॉलर है। इस दौलत के साथ वह दुनिया की दस सबसे अमीर महिलाओं में शामिल हो गई हैं। उन्‍हें अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप का बड़ा समर्थक माना जाता है।

यह सब तब हो रहा है जब दुनिया चीन पर अपनी मिनरल सप्‍लाई को लेकर निर्भरता घटाने की कोशिश में जुटी है। चीन अभी भी दुनिया के 70% रेयर अर्थ का उत्पादन करता है। इन खनिजों से बनने वाले 90% मैग्नेट पर उसका कंट्रोल है। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों और आधुनिक हथियारों के लिए बहुत जरूरी हैं। जब चीन ने इस साल की शुरुआत में अमेरिकी टैरिफ के जवाब में रेयर अर्थ के निर्यात पर रोक लगा दी थी तो दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई थी। इससे यह साफ हो गया था कि दुनिया चीन पर कितनी ज्‍यादा निर्भर है।

बहुत पहले भांप ली थी ताकत

राइनहार्ट ने इन व्यापारिक तनावों से सालों पहले ही रेयर अर्थ में निवेश करना शुरू कर दिया था। अब वह इस बदलाव का चेहरा बन गई हैं। सिडनी की टेरा कैपिटल के डाइलन केली ने ब्लूमबर्ग को बताया, 'वह इस क्षेत्र को किसी और से बेहतर समझती हैं।'
अपनी कंपनी हैनकॉक प्रोस्पेक्टिंग के जरिए राइनहार्ट पश्चिमी रेयर अर्थ उद्योग में एक अहम हस्ती बन गई हैं। वह एमपी मटेरियल्स कॉर्प में सबसे बड़े निवेशकों में से एक हैं। एमपी मटेरियल्स अमेरिका की एकमात्र रेयर अर्थ खदान का संचालन करती है। इसके अलावा, वह ऑस्ट्रेलिया की लीनास रेयर अर्थ्स लिमिटेड में दूसरी सबसे बड़ी शेयरधारक हैं। लीनास दुनिया की दूसरी प्रमुख गैर-चीनी रेयर अर्थ उत्पादक कंपनी है। एमपी मटेरियल्स को हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग से 40 करोड़ डॉलर का निवेश मिला है। इससे राइनहार्ट का व्यवसाय अमेरिका के रणनीतिक खनिज कार्यक्रम से जुड़ गया है।
यह समय उनके लिए एकदम सही है। ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, ब्राजील और अमेरिका में रेयर अर्थ कंपनियों में उनके निवेश का मूल्य इस साल जनवरी से तीन गुना से ज्‍यादा बढ़ गया है। सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीस ने महत्वपूर्ण खनिजों में कम से कम 1 अरब डॉलर का सह-निवेश करने पर सहमति व्यक्त की। इस घोषणा ने इस क्षेत्र में तेज़ी ला दी।

राइनहार्ट की इस क्षेत्र में रुचि तब शुरू हुई जब यह इतना लोकप्रिय नहीं था। हैनकॉक प्रोस्पेक्टिंग का कहना है कि उसने 2020 में लीनास में निवेश करना शुरू कर दिया था। यह चीन की ओर से निर्यात प्रतिबंधों को फिर से शुरू करने और रेयर अर्थ की मांग बढ़ने से सालों पहले की बात है। तब से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अराफुरा रेयर अर्थ्स से लेकर ब्राजील की ब्राजीलियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड तक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इससे वह ग्‍लोबल रेयर अर्थ नेटवर्क में सबसे बड़ी निजी निवेशक बन गई हैं।

हालांकि, उन्होंने जिन सब चीजों में निवेश किया है, वे सब सोने में नहीं बदली हैं। उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग में गिरावट और सप्‍लाई की अधिकता के कारण लिथियम में उनका निवेश प्रभावित हुआ है। लायनटाउन रिसोर्सेज में, जिसमें हैनकॉक की 16% हिस्सेदारी है, शेयर की कीमत अपने चरम से 60% से ज्‍यादा गिर गई है। इसके बावजूद राइनहार्ट का विविधीकरण जानबूझकर लगता है। लोहे के अयस्क से होने वाली कमाई शायद स्थिर हो गई हो। लेकिन, महत्वपूर्ण खनिज अब विकास की एक नई कहानी पेश करते हैं।

राइनहार्ट कर रही हैं व‍िस्‍तार

रेयर अर्थ अपने नाम के उलट दुर्लभ नहीं हैं। लेकिन, उन्हें निकालना मुश्किल और महंगा है। चीन इसलिए हावी रहा क्योंकि उसने जल्दी निवेश किया, पर्यावरणीय लागतों को सहन किया और विशाल प्रोसेसिंग क्षमता का निर्माण किया। राइनहार्ट समर्थित लीनास मलेशिया में एक बड़ी रिफाइनरी चलाती है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक और रिफाइनरी लगाने की योजना बना रही है। एमपी मटेरियल्स कैलिफोर्निया और टेक्सास में अपनी प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार कर रही है।

राइनहार्ट का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी चीन के प्रभाव से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन ने एमपी मटेरियल्स और अराफुरा में सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश किया है। वहीं, ऐपल जैसी कंपनियों ने अमेरिकी सप्‍लायर्स से रेयर अर्थ मैग्नेट खरीदने के लिए लंबी अवधि के अनुबंध किए हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स अराफुरा के लिए एक और 300 मिलियन डॉलर पर विचार कर रहा है। अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया समझौते के बाद राइनहार्ट ने अराफुरा में अपनी हिस्सेदारी दोगुनी करके 15% कर ली थी।

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