WHO से अलग हुआ अमेरिका, दोबारा शामिल होने से इनकार, 260 मिलियन डॉलर का बकाया भी हड़पा

Updated on 23-01-2026 12:28 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका गुरुवार 22 जनवरी को आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अलग हो गया है। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा है कि अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से अपना नाम वापस लेने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लंबे समय से चला आ रहा लक्ष्य पूरा हो गया है। ट्रंप ने एक साल पहले अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के पहले दिन ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए अमेरिका के इस संगठन से बाहर निकलने के लिए नोटिस दिया था। इसके साथ ही अमेरिका ने संगठन का बकाया चुकाने से भी इनकार कर दिया है।

अमेरिकी कानून के मुताबिक, अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन को छोड़ने से एक साल पहले नोटिस देना होता है और सभी बकाया फीस चुकानी होती है। अमेरिका पर वर्तमान में डब्ल्यूएचओ का लगभग 260 मिलियन डॉलर (करीब 2380 करोड़ रुपये) का बकाया है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस पैसे के चुकाने की संभावना कम है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के संगठन से बाहर निकलने से दुनिया भर में पब्लिक हेल्थ को नुकसान होगा।

अमेरिकी सरकारी फंडिंग खत्म

गुरुवार को अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग ने कहा कि WHO में तैनात सभी अमेरिकी सरकारी फंडिंग खत्म कर दी गई है और संगठन में तैनात सभी कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टरों को वापस बुला लिया गया है। इसने यह भी कहा कि अमेरिका ने WHO की स्पॉन्सर कमेटियों, लीडरशिप बॉडी, गवर्नेंस ढांचे और तकनीकी वर्किंग ग्रुप में आधिकारिक भागीदारी बंद कर दी है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, 'हमारा ऑब्जर्वर के तौर पर हिस्सा लेने का कोई प्लान नहीं है और न ही दोबारा शामिल होने की योजना है।'

संयुक्त राष्ट्र को कमजोर कर रहे ट्रंप?

रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गुरुवार को जिनेवा में WHO के मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया था। हाल के हफ्तों में अमेरिका कई अन्य संयुक्त राष्ट्र संगठनों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि हाल ही गठित ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र को कमजोर कर सकता है।

WHO के बकाया का क्या होगा?

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में ग्लोबल हेल्थ कानून के एक्सपर्ट डॉ. लॉरेंस गोस्टिन ने CNN को बताया कि 'कानून के हिसाब से यह बहुत साफ है कि अमेरिका तब तक WHO से आधिकारिक तौर पर अलग नहीं हो सकता, जब तक वह अपना बकाया वित्तीय भुगतान नहीं कर देता। लेकिन WHO के पास अमेरिका को बकाया चुकाने के लिए मजबूर करने की कोई ताकत नहीं है।' WHO एक प्रस्ताव पास कर सकता है कि अमेरिका तब तक अलग नहीं हो सकता जब तक वह भुगतान नहीं करता, लेकिन वह शायद तनाव पैदा करने का जोखिम नहीं लेगा।

सहयोग के लिए खुला छोड़ा रास्ता

हालांकि, HHS ने संगठन के साथ सहयोग के लिए दरवाजा खुला रखा है। जब पूछा गया कि क्या अमेरिका अगले साल फ्लू वैक्सीन की संरचना तय करने के लिए WHO के नेतृत्व में होने वाली आगामी बैठक में हिस्सा लेगा तो प्रशासन ने कहा कि बातचीत अभी भी जारी है। HHS के प्रवक्ता ने कहा कि इस संगठन की वजह से अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान हुआ। गुरुवार को पत्रकारों से एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका को निवेश के बदले में ज्यादा कुछ नहीं मिल रहा है। अधिकारी ने बताया कि अमेरिका इस संगठन को सबसे ज्यादा फंड देने वाला देश था, लेकिन कभी WHO का कोई महानिदेशक अमेरिकी नहीं रहा।

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