ईरान युद्ध से झुलसने लगी दुनिया, फिलीपींस ने लागू की एनर्जी एमरजेंसी, कई और देशों का भी बुरा हाल

Updated on 26-03-2026 12:29 PM
नई दिल्ली: ईरान युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। इस लड़ाई के कारण दुनिया में एनर्जी की लाइफलाइन कही जाने वाली होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही बंद है। इसे दुनिया के इतिहास में तेल और गैस का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि दुनिया का 20 फीसदी तेल और एक तिहाई गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से अब दुनिया में हाहाकार मचने लगा है। सबसे ज्यादा मुश्किल एशियाई देशों को हो रही है जिनका ज्यादातर तेल और गैस इसी रूट से आती है।

इसका पहला शिकार फिलीपींस हुआ है। इस देश ने नेशनल एनर्जी एमरजेंसी लागू कर दी है। साफ है कि देश में फ्यूल सप्लाई की स्थिति लगातर बद से बदतर होती जा रही है। फिलीपींस अपना 98 फीसदी तेल पश्चिम एशिया से मंगाता है। देश के राष्ट्रपति फर्निडाड मार्कोस जूनियर ने मंगलवार को एक एग्जीक्यूटिव आदेश जारी करते हुए नेशनल एनर्जी एमरजेंसी लागू कर दी। उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा स्थिरता, आर्थिक गतिविधियों और जरूरी सेवाओं के लिए ऐसा करना जरूरी था।

कई देशों का बुरा हाल

फिलीपीस में केवल 45 दिन की सप्लाई बाकी रह गई है। देश में पेट्रोल की कीमत 28 फरवरी से अब तक 100 फीसदी चढ़ चुकी है। फिलीपींस के अलावा वियतनाम, सिंगापुर, साउथ कोरिया, ताइवान, मलेशिया और थाईलैंड का भी 70 फीसदी से ज्यादा तेल वहीं से आता है। वियतनाम के 90 फीसदी कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आता है। इसके अलावा भारत और चीन भी पश्चिम एशिया से आने वाले तेल के बड़े खरीदार हैं।
भारत का 55 फीसदी तेल खाड़ी देशों से आता है जबकि चीन के मामले में यह 50 फीसदी है। हालांकि दोनों देशों ने हाल में दूसरे देशों खासकर रूस के खरीदारी बढ़ाई है। भारत ने इस महीने रूस से 60 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा और अगले महीने के लिए भी इतना ही कॉन्ट्रैक्ट किया है। साथ ही भारत वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल की खरीद कर रहा है। लेकिन अगर होर्मुज की खाड़ी में लंबे समय तक तनाव रहता है तो इससे भारत और चीन की इकॉनमी गड़बड़ा सकती है।

यूरोपीय देश फायदे में

इसकी वजह यह है कि कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है और रूस प्रीमियम पर तेल बेच रहा है। ईरान युद्ध से पहले रूसी तेल डिस्काउंट पर मिल रहा था। एशियाई देशों की तुलना में बाकी देश मिडिल ईस्ट से कम तेल खरीदते हैं। मसलन तुर्की, साउथ अफ्रीका, ट्यूनीशिया तथा सेंट्रल और ईस्टर्न यूरोप के देश मिडिल ईस्ट से 20 फीसदी से भी कम तेल खरीदते हैं।

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी जो 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। हालांकि हाल में इसमें कई उतारचढ़ाव आए हैं लेकिन यह लगातार 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। अभी ब्रेंट क्रूड करीब तीन डॉलर की गिरावट के साथ 101.5 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 08 September 2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, बिकवाली समेत अन्य वजहों से घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। आज मंगलवार को…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत में घरेलू कोयले से गैस और औद्योगिक ईंधन बनाने की योजना को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी सामने आई है। केंद्र सरकार की कोयला गैसीकरण योजना के पहले…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल कब होगा, इसकी जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को दी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने की दिशा में बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों…
 05 September 2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। शुक्रवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क…
 05 September 2026
नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी के फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीआई ने चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ…
 05 September 2026
नई दिल्ली: आपने कई बार देखा होगा कि जरूरत पड़ने पर जब किसी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस क्लेम (बीमा दावा) किया जाता है तो वह कई बार रिजेक्ट भी हो…
 05 September 2026
नई दिल्‍ली: एग्रीकल्चर एनालिस्ट देविंदर शर्मा ने भारत की कृषि नीति पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इथेनॉल, फर्टिलाइजर प्रोडक्शन और ट्रेड…
 31 August 2026
नई दिल्ली: देश में करोड़ों की संख्या में लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब फेस्टिव सीजन की शुरुआत भी हो रही है। इसको देखते हुए क्रेडिट कार्ड…
Advt.