दुनिया बेहाल, रूस मालामाल! ईरान युद्ध से रोजाना हो रही $150 मिलियन की अतिरिक्त कमाई

Updated on 14-03-2026 01:30 PM
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी तेजी आई है। हाल में यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था और अब भी 100 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा है। ईरान और अमेरिका/इजरायल के बीच चल रही जंग के कारण होर्मुज की खाड़ी से जहाजों का आवाजाही बंद है। दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है। सप्लाई टाइट होने के कारण कच्चे तेल की कीमत में तेजी आई है। इससे दुनिया बेहाल है लेकिन रूस जमकर कमाई कर रहा है। वह प्रीमियम पर अपना तेल बेचकर रोजाना 150 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त कमाई कर रहा है। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक उसकी अतिरिक्त कमाई 4 अरब डॉलर पहुंच सकती है।

ईरान युद्ध से पहले रूस का तेल डिस्काउंट पर मिल रहा था। लेकिन होर्मुज की खाड़ी से तेल की सप्लाई बंद होते ही रूसी तेल की डिमांड बढ़ गई। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दे दी। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का दावा है कि इससे रूस के ज्यादा वित्तीय फायदा नहीं होगा। लेकिन जानकारों का कहना है कि रूस को तेल और गैस से 10 अरब डॉलर की अतिरक्त कमाई हो सकती है और इससे वह यूक्रेन युद्ध की फंडिंग कर सकता है।

रूस की कमाई

शिपिंग डेटा और तेल की कीमतों में उछाल से रूस की तेल और गैस से कमाई मार्च में फरवरी के मुकाबले दो-तिहाई बढ़ सकती है। रूस के यूराल क्रूड की कीमत ईरान युद्ध शुरू होने के बाद करीब 50 फीसदी बढ़ चुकी है। Kpler के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में रूस समुद्र के रास्ते रोजाना 3.18 मिलियन बैरल तेल भेज रहा था। मार्च में यह आंकड़ा बढ़कर 4.56 मिलियन डॉलर पहुंच गया।
इससे पहले अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूस के एनर्जी रेवेन्यू में गिरावट आई थी। फरवरी में रूस को अपना तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले 10 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर बेचना पड़ रहा था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। रूस तेल अब 5 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर मिल रहा है। ईरान में युद्ध के कारण एशिया के कई देशों में तेल की समस्या हो गई है। इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और थाईलैंड जैसे देश भी अब रूसी तेल खरीदने की तैयारी में हैं। अब तक रूस का 93 फीसदी तेल केवल तीन देशों चीन, भारत और तुर्की को जाता था।

कच्चे तेल की कीमत

यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूसी तेल और गैस पर पाबंदी लगाई तो रूस ने भारत और चीन को डिस्काउंट पर तेल बेचना शुरू किया था। देखते-देखते रूस भारत का सबसे बड़ा क्रूड सप्लायर बन गया। लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने हाल में रूसी तेल की खरीद कम की थी लेकिन वह अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर है। अमेरिकी छूट के बाद से भारतीय कंपनियां 30 मिलियन बैरल से अधिक रूसी क्रूड खरीदा है।

शुक्रवार को कच्चा तेल तेजी के साथ बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड 2.68 डॉलर यानी 2.67 फीसदी तेजी के साथ 103.1 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.11 फीसदी तेजी के साथ 98.71 डॉलर पर पहुंच गया। इस बीच अमेरिका ने ईरान के खर्ग आइलैंड में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान नहीं माना तो उसके तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सकता है। इससे आगे तेल की कीमत और बढ़ सकती है।

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