डंकी रूट से जंगल-पानी के रास्ते मलेशिया ले जाकर छोड़ा:शिप, कंटेनरों में भरकर बॉर्डर पार कराए

Updated on 29-08-2024 12:48 PM

2023 में शाहरुख खान की मूवी डंकी सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज हुई थी। इसकी कहानी कुछ इस तरह है- पंजाब के गांव लाल्टू के कुछ युवा तंगहाली से परेशान हैं। वे लंदन जाकर पैसे कमाना चाहते हैं। गरीब घर से होने और अंग्रेजी नहीं आने की वजह से वीजा नहीं मिल पाता।

थक-हारकर वे गैरकानूनी तरीके से लंदन जाने की तैयारी करते हैं। एक फौजी के रूप में शाहरुख खान इस गांव में आते हैं और इन युवाओं के रहनुमा बनते हैं। फिल्म में शाहरुख के किरदार का नाम हार्डी है। हार्डी लंदन जाने वाले तीन-चार लोगों के ग्रुप का लीडर बनता है। सड़क और समुद्र मार्ग से इन लोगों को लेकर लंदन के लिए निकल पड़ता है। इस गैरकानूनी विदेश यात्रा को डंकी लगाकर जाना कहते हैं।

कुछ ऐसा ही जबलपुर के दो लोगों के साथ हुआ। फर्क सिर्फ इतना है कि दोनों को इस बात का पता बाद में चला। दलालों ने उन्हें मलेशिया में अच्छी जॉब का सपना दिखाया। मोटी रकम ऐंठी और गलत तरीके यानी डंकी लगाकर जंगल-पानी के रास्ते उन्हें मलेशिया छोड़ आए।

मलेशिया पहुंचकर जॉब नहीं मिली। फुटपाथ पर सोना पड़ा। भूखा रहकर छोटा-मोटा काम तलाशा।

ये कहानी जबलपुर शहर के रद्दी चौकी इलाके में रहने वाले 21 साल के मोहम्मद इमरान अंसारी और गोहलपुर में रहने वाले सरफराज अहमद की है। दोनों लौट तो आए लेकिन उनका कहना है कि कई युवा मलेशिया में फंसे हुए हैं। दलालों ने उन्हें अच्छी जॉब का कहकर भेजा, लेकिन छोटा-मोटा काम करना पड़ रहा है। जिंदगी जानवरों जैसी है। दलालों का नेटवर्क जबलपुर से चेन्नई, थाईलैंड के बैंकॉक और मलेशिया तक जुड़ा हुआ है।

पाकिस्तानी शख्स ने डंकी लगाकर मलेशिया पहुंचाया

मोहम्मद इमरान अंसारी ने दैनिक भास्कर को बताया- 15 जनवरी 2024 को मेरी दोस्ती जबलपुर के गोहलपुर में रहने वाले शाहनवाज से हुई। उसने बताया- मलेशिया में अच्छी नौकरियां हैं। जबलपुर के ही रहने वाले इश्तियाक और सलीम लोगों को मलेशिया भेज रहे हैं।

शाहनवाज मुझे साथ में जबलपुर से मुंबई, फिर मलेशिया के कुआलालम्पुर ले गया। शाहनवाज के पास वीजा था। वह मलेशिया में रुक गया, लेकिन मुझे वीजा न होने पर एयरपोर्ट से लौटा दिया गया। 48 घंटे में मलेशिया से वापस भारत लौट आया।

जबलपुर आकर इश्तियाक और सलीम से मुलाकात हुई। दोनों ने 90 हजार रुपए लिए। मुझसे कहा- कुआलालम्पुर के एक होटल में अच्छी नौकरी है। मलेशियाई करेंसी रिंगिट (MYR) में तनख्वाह मिलेगी, जो इंडियन करेंसी में महीने के 45 हजार रुपए होंगे।

25 मार्च 2024 को टूरिस्ट वीजा लेकर पीटीपी कंपनी में काम करने के लिए जबलपुर से मुंबई और फिर बैंकॉक पहुंचा। यहां वसीम मिला, जो पाकिस्तान का था। वसीम मुझे बैंकॉक से जंगल, सड़क और पानी के रास्ते मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर ले आया।

मेरे साथ अमृतसर और बिहार के दो-दो लड़के भी थे। हम पांचों को एक जगह ले जाया गया। न तो नौकरी मिली, न रहने की जगह। मुझे समझ आ गया कि मेरे साथ ठगी हुई है। वसीम ने एक मोबाइल और सिम दी थी। पैसे खत्म हुए तो पिता रहमान अंसारी को फोन लगाया।

दो बार अलग-अलग रूट से पहुंचा मलेशिया

13 जनवरी 2024 को इमरान, शाहनवाज के साथ जबलपुर से मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा। यहां से दोनों मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर आए। इमरान को वर्क वीजा नहीं होने पर एयरपोर्ट से भारत के लिए लौटा दिया गया।

25 मार्च 2024 को इमरान दूसरी बार जबलपुर से ट्रेन से चेन्नई पहुंचा। यहां से फ्लाइट से बैंकॉक गया। वहां जाकर सलीम के एजेंट से संपर्क किया। उसे कुछ दूर कार से ले जाया गया। फिर पानी के रास्ते शिप के अलावा कुछ दूर जंगल के रास्ते उस जगह पहुंचाया गया, जहां नौकरी देने की बात कही गई थी।

अच्छी जॉब के लालच देकर कई लोगों को फंसाया

मोहम्मद इमरान अंसारी ने कहा- मलेशिया में मेरे हालात बहुत खराब हो गए थे। वहां कई और लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें अच्छी जॉब का लालच देकर ले जाया गया है। उन्हें सड़क किनारे रहकर मजदूरी करना पड़ रही है। दलाल करेंसी बदलने से लेकर विदेश की सिम और टूरिस्ट वीजा तक उपलब्ध करवाते हैं। इसके लिए भी पैसे लिए जाते हैं।

जबलपुर लौटने पर मैं सलीम और इश्तियाक से उनके ऑफिस जाकर मिला। उन्होंने कहा- हमें बिना बताए लौट आए इसलिए पैसे वापस नहीं मिलेंगे। पैसों के लिए काफी चक्कर काटे। इसके बाद 27 अगस्त को गोहलपुर थाने में सलीम, इश्तियाक, वसीम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

पत्नी के जेवर बेचकर मलेशिया गया, नौकरी नहीं मिली

सरफराज अहमद ने बताया- पत्नी के जेवर बेचकर मलेशिया गया था। हार्ट का मरीज हूं। हल्का काम करना था, इसीलिए सलीम के जरिए मलेशिया जाने के लिए अप्लाई किया। उसने कहा था- आपका काम होटल में गेस्ट को उनके रूम तक पहुंचाने का होगा।

सलीम ने मुझसे 30 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कराए। ये पैसे मलेशिया पहुंचकर देने की बात कही। कुआलालम्पुर के एक होटल का पता देकर वहां रुकने और एजेंट को फोन करने के लिए बोला। मैं 28 फरवरी को जबलपुर से मलेशिया के लिए निकला था। 2 मार्च को पहुंचा। मैंने एजेंट रहीम को कॉल लगाया तो उसने बस में बैठकर केएल सेंटर आने का कहा।

यहां पहुंचा तो वह मुझे किराए के एक कमरे में ले गया। यहां चार दिन तक रखा। फिर बोला- होटल में किसी और को रख लिया गया है। वह मुझे मलेशिया के अलग-अलग शहरों में नौकरी के लिए घुमाता रहा। मेरे पास जितने भी पैसे थे, खत्म हो गए। परेशान होकर घरवालों से पैसे मंगवाए और जबलपुर लौट आया।

टूरिस्ट वीजा पर गया था सरफराज

28 मार्च 2024 को सरफराज अहमद टूरिस्ट वीजा लेकर एजेंट के जरिए मुंबई पहुंचा। यहां से फ्लाइट पकड़कर मलेशिया गया। रहीम ने उसे लोकल बस के जरिए केएल सेंटर बुलाया। केएल सेंटर पर रहीम ने उसे रिसीव किया। यहां एक कमरा लेकर चार दिन ठहराया। 2 अप्रैल से 6 अप्रैल तक सरफराज काम के लिए भटकता रहा। काम नहीं मिला तो 10 अप्रैल को वापस भारत आ गया।

अब जानिए, क्या होता है डंकी रूट

लोग जब गैरकानूनी तरीके से बिना वीजा और पासपोर्ट विदेश की यात्रा करते हैं, तो वहां तक जाने के लिए जिस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, उसे डंकी रूट कहते हैं। मान लीजिए कि आपके पास पासपोर्ट और वीजा नहीं है तो आप किसी भी कीमत में देश से बाहर (कुछ अपवादों को छोड़कर) नहीं जा पाएंगे।

कुछ ऐसी फ्रॉड कंपनियां होती हैं, जो यात्रियों को बिना किसी डॉक्यूमेंट्स के विदेश पहुंचाने का काम करती हैं। इसके बदले मोटी रकम ऐंठी जाती हैं। ये कंपनियां लोगों को हवाई मार्ग से न भेजकर सड़क और समुद्री रास्तों से भेजती हैं।

हर देश में इनके एजेंट मौजूद रहते हैं। वो गैरकानूनी यात्रा करने वाले लोगों को ट्रकों, शिप और कंटेनर में भरकर एक देश से दूसरे देश का बॉर्डर पार कराते हैं। ऐसी यात्राएं कई दिन चलती हैं। कई लोग बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। फिल्म डंकी में यही मुद्दा उठाया गया है।



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