IC-814 हाईजैक के वो रहस्य, क्या नरेंद्र मोदी सरकार इस घटना के रिकॉर्ड करेगी सार्वजनिक?

Updated on 09-09-2024 05:12 PM
नई दिल्ली: नेटफिलिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई IC-814 द कंधार हाईजैक काफी विवादों में है। ये वेबसीरीज 24 दिसंबर 1999 को नेपाल से कंधार जा रही इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के हाईजैक पर आधारित है। 1999 में सरकार ने बंधकों के बदले तीन आतंकवादियों को रिहा किया था। आतंकियों को रिहा करने की घटना आज तक रहस्य और साजिशों के घेरे में हैं। इस घटना ने भारत सरकार की आतंकवाद के आगे नतमस्तक होने की छवि बनाई और देश की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए।

1999 में हुई हाईजैक की घटना नेटफिलिक्स पर आई सीरीज के बाद फिर से चर्चा में आई है। जिसके बाद उस समय के RAW प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत और उनके सहयोगी आनंद अरनी ने मीडिया में अपनी बात रखी। अरनी उस टीम का हिस्सा थे, जिन्होंने हाईजैकर्स के साथ नेगोशिएट किया था।

हाईजैकर्स ने 105 आतंकियों की रिहाई की मांग की


एचटी की एक रिपोर्ट ने दुलत के हवाले से दावा किया है कि उस समय के मुख्य वार्ताकार और वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल कंधार से लगातार संदेश भेज रहे थे कि मामला जल्द से जल्द सुलझाया जाए और हाईजैकर्स की मांगें मान ली जाएं। अरनी ने खुलासा किया कि जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर अल्वी के बड़े भाई अतहर इब्राहिम अल्वी के नेतृत्व में और उनके छोटे भाई रऊफ असगर अल्वी ने इस हाईजैक की योजना बनाई। हाईजैकर्स ने शुरुआत में 105 आतंकवादियों की रिहाई की मांग की थी।

तीन आतंकियों के रिहा करने पर बनी बात


भारतीय वार्ता दल ने इस मांग को कम करके 29 दिसंबर को केवल मसूद अजहर की रिहाई तक सीमित कर दिया था, लेकिन 30 दिसंबर को फिर से तीन आतंकवादियों मसूद अज़हर, उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद ज़रगर की रिहाई पर सहमति बनी। अरनी ने यह भी बताया कि रिहा किए गए आतंकवादियों और हाईजैकर्स को ले जाने से पहले वार्ता दल ने उनसे बात की थी।

किन अधिकारियों ने संभाला मोर्चा


गौरतलब है कि IC-814 अपहरण मामले को तत्कालीन एनएसए ब्रजेश मिश्रा ने संभाला था। उन्हें RAW प्रमुख दुलत और IB प्रमुख श्यामल दत्ता से खुफिया जानकारी मिल रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे थे। उस समय कैबिनेट सचिव प्रभात कुमार थे और इंडियन एयरलाइंस के सीईओ अनिल बैजल थे। कंधार भेजे गए वार्ता दल का नेतृत्व IB के अतिरिक्त निदेशक अजीत डोवाल कर रहे थे। डोवाल के साथ संयुक्त सचिव (पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान) विवेक काटजू, संयुक्त निदेशक (ऑपरेशन) नेहचल संधू भी थे। RAW का प्रतिनिधित्व सी डी सहाय और आनंद अरनी ने किया।

सरकार को रिकॉर्ड सार्वजनिक करने पर विचार करना चाहिए


यह ध्यान रखना जरूरी है कि डोवाल अब एनएसए हैं और संधू मीडिया से बात नहीं करते हैं। ऐसे में, मोदी सरकार को IC-814 हाईजैक मामले के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने पर विचार करना चाहिए, खासकर जब दुलत और अरनी ने अपनी बात रखी है।

IC-814 हाईजैक से जुड़े जरूरी तथ्य


  • अजीत डोवाल के नेतृत्व वाला वार्ता दल IC-814 के हाईजैकर्स या रिहा किए गए आतंकवादियों के सीधे संपर्क में कभी नहीं था। डोवाल की टीम तत्कालीन तालिबान विदेश मंत्री वकिल अहमद मुत्तावकिल और नागरिक उड्डयन मंत्री अख्तर मुहम्मद उस्मानी के साथ बातचीत कर रही थी।
  • ये दोनों तालिबानी नेता कंधार हवाई अड्डे से 25 किलोमीटर दूर तैनात तालिबान सुप्रीमो मुल्ला उमर से सीधे निर्देश ले रहे थे। यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि मुल्ला उमर किससे बात कर रहा था, क्योंकि हाईजैक के पीछे आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल महमूद अहमद का हाथ था। अहमद मुल्ला उमर के बेहद करीबी थे और 9/11 के आतंकी हमलों और अल-कायदा के आतंकी मोहम्मद अत्ता के नेतृत्व वाले हैम्बर्ग सेल को फंडिंग करने में उनकी भूमिका के लिए उन्हें आईएसआई से निकाल दिया गया था।
  • हाईजैकर्स की शुरुआती मांग हरकत-उल-अंसार के मारे गए आतंकवादी सज्जाद अफगानी के कफन और भारतीय जेलों में बंद 36 आतंकवादियों की रिहाई थी। अफगानी को मसूद अज़हर के साथ 1994 में श्रीनगर के बाहरी इलाके से आईबी ने गिरफ्तार किया था।
  • बाद में वार्ता दल ने इस मांग को घटाकर तीन आतंकी मसूद अज़हर, उमर सईद शेख और एक छोटे कैशमीरी आतंकवादी मुश्ताक अहमद ज़रगर तक सीमित कर दिया और किसी भी स्तर पर इस मांग को घटाकर केवल एक आतंकवादी तक सीमित नहीं किया गया।
  • कश्मीर का अतिरिक्त निदेशक रहते हुए पाकिस्तानी आतंकवादियों से निपटने के अपने अनुभव को देखते हुए, अजीत डोवाल तालिबान के साथ बातचीत के लिए और समय चाहते थे। उन्होंने यह बात तत्कालीन एनएसए ब्रजेश मिश्रा को बताई।
  • हालांकि, बंधकों के परिवारों, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं के दबाव में वाजपेयी सरकार ने डोवाल को स्पष्ट कर दिया कि वह नई सदी की शुरुआत से पहले बंधकों को वापस चाहती है। मीडिया भी लगातार सरकार पर दबाव बना रहा था। बंधकों को वापस लाने वाला विमान बोइंग 737 था, जिसने पाकिस्तान में झोब एयर ट्रैफिक कंट्रोल से मंजूरी मिलने के बाद अफगानिस्तान में प्रवेश किया था।
  • यही विमान, जिसमें बंधक बैठे थे और कुछ वार्ताकार कॉकपिट में खड़े थे, 20वीं सदी के आखिरी सूर्यास्त से पहले कंधार से उड़ान भरी।
  • कंधार हवाई अड्डे पर तालिबान शासन और मुल्ला उमर के नियंत्रण को देखते हुए, रिहा किए गए आतंकवादियों को एक टोयोटा लैंड क्रूजर में IC-814 विमान तक ले जाया गया ताकि हाईजैकर्स पुष्टि कर सकें कि अज़हर, शेख और ज़रगर को रिहा कर दिया गया है।
  • इसके बाद बंधकों और वार्ता दल को 31 दिसंबर, 1999 को आधी रात से पहले भारत वापस लाया गया। किसी को नहीं पता था कि रिहा किए गए आतंकवादियों या हाईजैकर्स को कहां ले जाया गया। ऐसी अटकलें हैं कि मसूद अज़हर मुल्ला उमर से मिलने गया और हाईजैकर्स बलूचिस्तान में झोब ATC क्रॉसिंग के रास्ते पाकिस्तान चले गए।
  • IC-814 हाईजैक के बाद भारत को अपमानित होना पड़ा। डोवाल ने सुझाव दिया कि शेष 33 आतंकवादियों, जिनकी रिहाई हाईजैकर्स ने मांगी थी को अलग-अलग जेलों में रखा जाना चाहिए और जल्द से जल्द उनका निपटारा किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे हाईजैक आगे भी हो सकते हैं।
  • इस प्रस्ताव को गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी और तत्कालीन IB निदेशक श्यामल दत्ता का समर्थन प्राप्त था। हालांकि, ब्रजेश मिश्रा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है कि उन्होंने किसकी सलाह पर ऐसा किया होगा।

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