ऑनलाइन बेटिंग ऐप ड्रीम 11 की शुरुआत तो हो गई, लेकिन फंड नहीं मिल रहे थे। हर्ष कंपनी में डिजाइन, टेक, प्रोडक्ट और मार्केटिंग का काम देखते थे तो भावित ऑपरेशन संभालते थे। दोनों ने काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन फंड नहीं मिल पा रहा था। 2 साल में उन्होंने करीब 150 से ज्यादा इंवेस्टर्स से संपर्क किया, लेकिन उन्हें ये आइडिया पसंद नहीं आता। वेंचर कैपिटलिस्ट ने उनके आइडिया को रिजेक्ट कर दिया। भले ही फंड नहीं मिल रहे थे, लेकिन ऐप पर यूजर्स की संख्या बढ़ती जा रही थी। साल 2014 में ड्रीम 11 के यूजर्स की संख्या 10 लाख के पार पहुंच गई। साल 2018 में ये 4.5 करोड़ को पार कर गई। साल 2019 आते-आते उनके यूजर्स 20 करोड़ के पार हो गए। कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 अरब डॉलर को पार कर गई। कंपनी को यूनिकॉर्न का दर्जा मिल गया। सफलता के साथ कंपनी को फंडिंग भी मिलने लगी। कंपनी ने साल 2014 में करीब 9 राउंड में 1.62 अरब डॉलर के फंड जुटाए।64000 करोड़ की कंपनी
तमाम मुश्किलों और असफलताओं के बाद हर्ष और भावित की कंपनी को बड़ी सफलता उस वक्त मिली, जब उन्हें साल 2020 आईपीएल की स्पांसरशिप राइट मिले। इसके बाद से कंपनी का नाम बच्चे-बच्चे के जुंबा पर चढ़ गया। भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी की स्पांसरशिप भी ड्रीम 11 के पास ही है। आज कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 64 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गई। कंपनी लगातार नई कामयाबी हासिल कर रही है। हर्ष और भावित की कहानी जीवन में असफलता के बाद भी हिम्मत न हारने की सीख देती है।