200 रुपये तक पहुंची टमाटर की कीमत, कैसे कम होगा भाव? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Updated on 03-07-2023 07:25 PM
नई दिल्ली: इस बार प्याज नहीं बल्कि टमाटर लोगों की आंखों में आंसू ला रहा है। देश के कई शहरों में टमाटर की कीमत 100 रुपये के पार पहुंच चुकी है। दिल्ली में तो कई स्थानों पर टमाटर की कीमत 200 रुपये किलो पहुंच चुकी है। वीकली मार्केट में भी खराब क्वालिटी का टमाटर 120 रुपये किलो मिल रहा है। देश में आलू, प्याज और टमाटर मुख्य सब्जियों में शामिल हैं। इसमें से किसी एक कीमत बढ़ने से सरकारों के भी हाथपांव फूल जाते हैं। रिसर्च फेलो रंजना रॉय और जाने माने प्रोफेसर अशोक गुलाटी की एक रिसर्च के मुताबिक किसान पिछली फसल को मिली कीमत के आधार पर टमाटर की बुवाई करते हैं। अप्रैल-मई में टमाटर की कीमत 1-2 रुपये किलो तक गिर गई थी। इस कारण किसानों ने इस बार टमाटर की खेती से परहेज किया। इससे टमाटर की कीमत अचानक से आसमान पर पहुंच गई।


रॉय और गुलाटी ने टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक लेख में कहा कि देश में पूरे साल टमाटर की फसल होती है। मुख्य रूप से इसकी खेती मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में होती है। देश होने वाली टमाटर की कुल खेती में इन राज्यों की हिस्सेदारी 46 परसेंट है। भारत दुनिया में टमाटर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है लेकिन देश में प्रति हेक्टेयर उपज बहुत कम है। 2021-22 में यह प्रति हेक्टेयर 24.4 टन रही जबकि चीन में यह 58.4 टन प्रति हेक्टेयर है। इसका वैश्विक औसत 37 टन प्रति हेक्टेयर है। दुनिया में टमाटर का उत्पादन ग्रीनहाउसेज और पॉलीहाउसेज में होता है। लेकिन भारत में अब तक बड़े पैमाने पर इसे नहीं अपनाया गया है।

कैसे कम होगी कीमत

सरकार ने 2018-19 में टमाटर, प्याज और आलू की वैल्यू चेन को दुरुस्त करने के लिए ऑपरेशन ग्रीन्स चलाया था। इसका मकसद किसानों को टमाटर, प्याज और आलू की उचित कीमत दिलाना, नुकसान को कम करना और कीमतों में उतारचढ़ाव पर अंकुश लगाना था। इस योजना को लॉन्च हुए चार साल हो चुके हैं लेकिन इन सब्जियों की कीमत में उतारचढ़ाव जारी है। मई 2022 में टमाटर की खुदरा कीमत सालाना आधार पर 135.6 परसेंट अधिक थी जबकि जून 2022 में यह 158.6 परसेंट अधिक थी। जुलाई 2022 में सीपीआई महंगाई में टमाटर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा थी।

रॉय और गुलाटी के मुताबिक सरकार कुछ कदम उठाकर टमाटर की कीमत पर अंकुश लगा सकती है। कम से कम 10 परसेंट टमाटर की प्यूरी बनाई जानी चाहिए ताकि टमाटर की कीमत बढ़ने पर लोग इसका इस्तेमाल कर सकें। इससे किसानों को भी मदद मिलेगी। प्यूरी पर जीएसटी 12 परसेंट से घटाकर पांच परसेंट होना चाहिए। साथ ही डायरेक्ट मार्केटिंग, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और प्राइवेट मंडी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि आढ़तियों की भूमिका को कम से कम किया जा सके। इससे कंज्यूमर के लिए भी कीमत में कमी आएगी। इससे कंप्टीशन बढ़ेगा, मंडियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा और फसल को कम नुकसान होगा। साथ ही देश में टमाटर की खेती में पॉलीहाउसेज को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे देश में टमाटर की खुदरा कीमत कम करने में मदद मिलेगी।

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