हॉस्पिटल चलाने वाली फर्म से थी 'रोपवे' चलाने की तैयारी? मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो टेंडर ही रद्द हो गया
Updated on
12-06-2025 02:19 PM
नई दिल्ली: रोपवे (Ropeway) चलाना टेक्निकल काम माना जाता है। इसमें जरा सी चूक जा जाए तो लोगों की जान का खतरा हो जाता है। लेकिन हरिद्वार के मनसा देवी रोपवे (Mansa Devi Temple Ropeway) को चलाने के लिए ऐसे फर्मों या कंपनियों से निविदा मंगा ली गई, जो हॉस्पिटल चला रहे थे, सड़क और पुल बना रहे थे या कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहे थे। तभी तो सुरक्षा और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट की तीखी आलोचना मिली। इसके बाद निविदा मंगाने वाले हरिद्वार नगर निगम ने मनसा देवी मंदिर के लिए अपने नवीनतम रोपवे टेंडर को ही रद्द (Scrapped) कर दिया।
फैसला आने से पहले ही टेंडर वापस
इस मामले का फैसला कुछ ही दिन में आने वाला था। मंगलवार को इस पर नियमित सुनवाई हुई थी। इस सुनवाई में निगम के वकील संदीप कोठारी ने मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ को बताया कि टेंडर वापस ले लिया गया है।
क्यों मामला पहुंचा कोर्ट
विवाद बीते अप्रैल में तब शुरू हुआ जब नगर निगम ने 44 साल पुराने मनसा देवी रोपवे (Mansa Devi Temple Ropeway) के संचालन और रखरखाव के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) जारी किया। पहले की निविदाओं के विपरीत, इस बार रोपवे के क्षेत्र में अनुभव न रखने वाली सड़क और निर्माण फर्मों को भी बोली लगाने की अनुमति दी गई। इसने गंभीर चिंताएं पैदा कर दीं, विशेष रूप से उषा ब्रेको लिमिटेड की ओर से, जो वास्तविक रोपवे विशेषज्ञता वाली एकमात्र कंपनी है। मूल रूप से, निविदा प्रक्रिया रोपवे चलाने में अनुभव रखने वाली कंपनियों तक ही सीमित थी। लेकिन मार्च में, पात्रता मानदंड को चुपचाप बढ़ा दिया गया और इसमें राजमार्ग, पुल, सुरंग, दूरसंचार और यहां तक कि अस्पताल जैसे क्षेत्रों की फर्मों को भी शामिल कर लिया गया। चार शॉर्टलिस्ट किए गए बोलीदाताओं में से केवल एक उषा ब्रेको के पास वास्तव में रोपवे का अनुभव था। वह इस केबल कार की शुरूआत (1981) से ही इस परियोजना का प्रबंधन कर रही है। आलोचकों ने निगम पर एक खास बड़ी निर्माण फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए निविदा को तैयार करने का आरोप लगाया। आगे विवाद तब शुरू हुआ जब यह पता चला कि ये बदलाव नगर आयुक्त नंदन कुमार ने नगर निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना किए थे, जिससे प्रक्रियागत खामियों और पारदर्शिता पर सवाल उठे। राज्य समिति की रिपोर्ट को 'आंख में धूल झोंकने वाला' बताया गया।
समिति का हुआ था गठन
इस विरोध के बाद राज्य सरकार ने टेंडर की शर्तों की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की। समिति ने 3 जून को अपनी रिपोर्ट पेश की। न्यायालय को इस रिपोर्ट की समीक्षा करनी थी, लेकिन ऐसा होने से पहले ही टेंडर रद्द कर दिया गया।
रोपवे क्या होता है
रोप वे में दो चीजें शामिल हैं, रोप और वे। रोप का मतलब होता है रस्सी,और वे का मतलब होता रास्ता। लोहे के मोटे-मोटे तारों या रस्सों पर फिट एक ट्रॉली में बैठकर लोग नीची जगह से ऊपर की तरफ जाते हैं। इसका संचालन बिजली से होता है। इसे ही आम आदमी की भाषा में रोपवे कहा जाता है। रोपवे की एक ट्रॉली में पर्याप्त जगह होती है। इसमें एक साथ 8-10 लोग आराम से बैठ सकते हैं। यह सुविधा अधिकतर उन मंदिरों में होती है जो बहुत ऊंचाई पर हैं। वहां पहुंचने के लिए वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालु इसकी मदद लेते हैं। क्योंकि वे सीढ़ियों से ऊपर नहीं जा सकते हैं। यह बिजली से चलती है और कई किलोमीटर के रास्ते को मात्र 2 से 5 मिनट में पूरा कर लेती है।
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