
फिर विभागों में संवर्गीय आधार पर संगठन गठित होने लगे जिससे सरकार पर दबाव कम होता गया क्योंकि एक संवर्ग के कर्मचारी अगर हड़ताल पर जाते है तो दूसरे संवर्ग के साथियों से काम करवा लिया जाता है और सरकार का काम नहीं रुकते ऐसे में सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए समान संवर्ग में भी एक से अधिक संगठन गठित करवा दिए जिससे कर्मचारी यूनियन सरकार के हाथों की कठपुतली मात्र रह गए और संगठन नेता स्वयं को स्थापित करने में रह गए बाकी कर्मचारियों का उपयोग करते करते समय नष्ट कर शोषित होते रहे। यही कारण है कि हमारी मांगों का निराकरण आज दिनांक तक नहीं हो पाया।
स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारी महासंघ के आव्हान पर प्रदेश के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, आयुष विभाग के सभी संवर्ग के अधिकारी, कर्मचारी एक दिन भी हड़ताल पर चले जाते है तो क्या हालत होगी, सरकार शाम होने से पहले आपकी मांगों के निराकरण वाले पत्रों के पालन प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर कर देगी। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसियेशन भी इस आंदोलन का भागीदार है क्योंकि जब फार्मासिस्ट हड़ताल पर जाएंगे तो अब उसका काम कोई अन्य संवर्गो से नहीं कराया जा सकेगा, क्योंकि अब सभी संवर्ग एक साथ है।
स्वास्थ अधिकारी कर्मचारी महासंघ के प्रवक्ता अंबर चौहान ने प्रदेश के समस्त कर्मचारियों से अपील की है कि महासंघ के आव्हान पर होने वाले चरण बद्ध आंदोलन के भागीदार बने और अपनी मांगों का निराकरण करवाये।