होम लोन की बढ़ती EMI से कब मिलेगी राहत ? अभी थोड़ा इंतजार, दिसंबर तक मिल सकती है खुशखबरी

Updated on 08-05-2023 07:13 PM
नई दिल्ली : जिन लोगों ने होम लोन ले रखा है, उन्हें इंतजार है कि ब्याज दरों में निकट भविष्य में कमी कब आएगी। पिछले कुछ समय के दौरान इनकी ईएमआई या लोन की अवधि बढ़ा दी गई है। पिछले साल मई के बाद से अब तक रिजर्व बैंक ने आम बैंकों के लिए अपनी पॉलिसी ब्याज दरों में 250 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है। आम आदमी यूं समझे कि उसके लिए यह बढ़ोतरी ढाई फीसदी है। इससे फिक्स्ड डिपॉजिट कराने वाले लोगों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन जिन लोगों ने लोन ले रखा है, उनके लिए मुश्किल बढ़ चुकी है।

क्यों हुई बढ़ोतरी : ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पीछे रिजर्व बैंक का मकसद था महंगाई पर काबू पाना। 2022 में महंगाई दर छह फीसदी के पार चली गई थी। रिजर्व बैंक चाहता है कि महंगाई दर ज्यादा से ज्यादा छह फीसदी रहे। लगातार ब्याज दर बढ़ाने से बाजार में मनी सप्लाई कम होती है, जिससे महंगाई पर काबू की उम्मीद रहती है। मार्च में रिटेल सेक्टर में महंगाई दर 5.66 फीसदी पर आ गई। 2023 में यह स्थिति पहली बार आई।
कटौती कब होगी : अप्रैल में जब रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग हुई, तो उसने ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोकने का फैसला कर लिया। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि इस साल महंगाई दर 5.2 फीसदी के करीब रह जाएगी। कई अर्थशास्त्रियों ने भी अनुमान लगाया है कि आगे चलकर महंगाई नरम होगी। साथ ही ग्रोथ में कुछ गिरावट आएगी। इन हालात में दिसंबर के अंत तक रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ब्याज दरों में कमी कर सकती है।

महंगाई अकेली नहीं :
 भारत के सामने सिर्फ महंगाई की चुनौती नहीं हैं। अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग सेक्टर में उथल-पुथल मची है। मामला गंभीर निकला तो भारत की इकॉनमी पर भी इसकी आंच आ सकती है। कच्चे तेल के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अगर कच्चे तेल के भाव बढ़े तो महंगाई फिर आग लगा सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर भले ही दुनिया के मुकाबले काफी तेज दिख रही है, लेकिन अब बढ़ोतरी थमने के संकेत मिलने लगे हैं।

साइड इफेक्ट देखें : महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने का फॉर्म्युला हमेशा के लिए नहीं लागू किया जा सकता है। ब्याज दरें बढ़ाने पर खपत में कमी आएगी और इससे देश की इकॉनमी में मंदी का खतरा होता है। भारत में भी खपत घटने के संकेत मिल रहे हैं और निजी सेक्टर के निवेश की स्थिति कमजोर दिख रही है। अमेरिकी इकॉनमी की हालत कुछ मोर्चों पर कमजोर दिख रही है। रिटेल बिक्री और इंडस्ट्री के उत्पादन में कमी साफ दिख रही है। खुद फेडरल रिजर्व के दस्तावेजों से इस साल अमेरिका में मंदी आने के संकेत मिल रहे हैं।

मिसाल सामने है :
 हाल में सबसे खतरनाक संकेत तब दिखा, जब अमेरिका में सिलिकॉन वैली बैंक का कारोबार चौपट हो गया। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बाजार में जो नए बॉण्ड आए, उन पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगा। इससे बैंक के पुराने बॉण्ड्स में निवेश की वैल्यू कम हो गई। इसी दौर में सिलिकॉन वैली बैंक को जमाकर्ताओं को रकम लौटाने के लिए अपना निवेश भुनाना पड़ गया, जो उसके लिए नुकसानदेह साबित हुआ। अमेरिका के कुछ और बैंक कमजोर ग्राउंड पर खड़े दिख रहे हैं।

रुकने का वक्त : सिर्फ रिजर्व बैंक ने ही नहीं, दुनिया भर में सेंट्रल बैंकों ने ब्याज दरों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है, लेकिन अब वे भी थोड़ा रुकने के संकेत देने लगे हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने अपने यहां ब्याज दरों को 16 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। उसने मई में भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, लेकिन साथ ही संकेत दिया कि वह आगे चलकर इस तरह के कदम उठाने से परहेज भी कर सकता है। भारत में रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी क्या फैसला करती है, यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी निर्भर करता है।

थोड़ा वक्त लगेगा :
 ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि भारत में अगले साल जनवरी से ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत हो सकती है। अगर महंगाई दर की स्थिति बेहतर रही तो कटौती उससे पहले भी हो सकती है। गोल्डमैन सैक्स कंपनी ने भी जनवरी से ब्याज दरों में कटौती का अनुमान लगाया है। एक अनुमान ये है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जब ये फैसला कर लेगा कि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी नहीं करनी, उसके पांच छह महीने के बाद रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटोती का फैसला ले सकता है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 14 September 2026
नई दिल्ली: देश में पैसों की बचत और इनके निवेश के कई सारे विकल्प हैं। इनमें से एक है म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना। मार्केट एक्सपर्ट शेयर बाजार में निवेश…
 14 September 2026
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 10 सितंबर को फूड रेगुलेटर FSSAI को आदेश दिया था कि वह 10 दिनों के भीतर अपने प्रस्तावित 'फ्रंट-ऑफ-पैक' चेतावनी लेबल को लागू करने के…
 14 September 2026
नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन रद्द…
 14 September 2026
नई दिल्ली: भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को लेकर रूस ने एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। रूसी रोलिंग स्टॉक निर्माता ट्रांसमैशहोल्डिंग (TMH) ने भारत में अपनी Ivolga FG हाई-स्पीड ट्रेन…
 08 September 2026
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, बिकवाली समेत अन्य वजहों से घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है। आज मंगलवार को…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत में घरेलू कोयले से गैस और औद्योगिक ईंधन बनाने की योजना को लेकर कंपनियों की दिलचस्पी सामने आई है। केंद्र सरकार की कोयला गैसीकरण योजना के पहले…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल कब होगा, इसकी जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को दी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि…
 08 September 2026
नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने की दिशा में बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के रेलवे अधिकारियों…
 05 September 2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। शुक्रवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क…
Advt.