कासिम सुलेमानी कौन थे? डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा- वो ईरानी कमांडर जिंदा होता तो हम कुछ और बात कर रहे होते

Updated on 02-04-2026 12:51 PM
तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान युद्ध पर कई ऐलान किए हैं। इस युद्ध में उन्होंने अमेरिका की जीत का दावा करते हुए कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को खत्म कर दिया गया है। इस दौरान उन्होंने विशेष तौर पर ईरान के ताकतवर सैन्य कमांडर रहे कासिम सुलेमानी का जिक्र किया। सुलेमानी की मौत छह साल पहले हो चुकी है लेकिन ट्रंप ने उनका जिक्र किया है। ट्रंप का कहना है कि सुलेमानी को ना मारा जाता तो शायद अमेरिका के लिए चीजें अलग होतीं। आइए जानते हैं कि कासिम सुलेमानी कौन थे।

डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम अपने संबोधन में पिछले 47 सालों में ईरान और उसके समर्थित गुटों के हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने दुनिया में लगातार अशांति फैलाई है। मैं यह भी बताना चाहता हूं कि मैंने अपने पहले कार्यकाल में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। 'रोडसाइड बम का जनक' सुलेमानी अगर जिंदा होता तो शायद आज रात हमारी बातचीत कुछ और होती।

कासिम सुलेमानी कौन थे

कासिम सुलेमानी को एक वक्त ईरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बाद सबसे ताकतवर लोगों में गिना जाता था। सुलेमानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स एलीट कुद्स फोर्स के प्रमुख थे। इस फोर्स को विदेशों में, खासतौर से अरब जगत में अमेरिकी सेना को निशाना बनाने के लिए जाना जाता है। इसके चलते कासिम सुलेमानी को अमेरिका आतंकी कहता था। वहीं ईरान में कासिम सुलेमानी एक नेशनल हीरो की तरह हैं।
ईरान के किरमान प्रांत में 1957 में पैदा हुए कासिम सुलेमानी बहुत पढ़े लिखे नहीं थे। गरीबी की वजह से पढ़ाई नहीं हो पाई तो वह कामकाज में लग गए लेकिन मजबूत कद काठी, वेटलिफ्टिंग का शौक और 1979 की इस्लामिक क्रान्ति से लगाव ने उनको सेना तक पहुंचा दिया। सुलेमानी 1979 में ईरान की सेना में शामिल हुए और छह हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद लड़ाई में कूद गए।

कासिम सुलेमानी की कैसे बढ़ी ताकत

ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराक बॉर्डर पर उनके शानदार काम ने ईरान के सर्वोच्च नेता को प्रभावित किया और वह देश के एक ताकतवर शख्स बन गए। सुलेमानी ने 1988 में कुद्स फोर्स का नेतृत्व संभालने के बाद इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के मुकाबले कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट करने का काम किया। हिजबुल्लाह, हमास और सीरिया की बशर अल-असद सरकार को सुलेमानी ने काफी मदद की।
एक तरफ ईरान में सुलेमानी की शान में गीत गाए जाते थे तो दूसरी तरफ सुलेमानी को अमरीका अपने सबसे बड़े दुश्मनों में से एक मानता था।अमरीका ने कुद्स फोर्स को 25 अक्तूबर 2007 को ही आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था। अमेरिका और इजरायल ने दशकों तक लगातार कासिम सुलेमानी को निशाना बनाने की कोशिश की।

अमेरिका की आंख में चढ़े सुलेमानी

जनरल कासिम सुलेमानी ने पूरे अरब जगत में ईरान के प्रभाव को बढ़ाया और इराक से लेकर सीरिया तक बार-बार अमेरिका और इजरायल को परेशान किया। इसके चलते ना सिर्फ अमरीका और इजरायल बल्कि सऊदी अरब और यूएई जैसे देश भी सुलेमानी को नापसंद करते थे।
अमरीका ने कासिम सुलेमानी को आतंकवादी घोषित कर रखा था। अमेरिका को आखिरकार 2020 में कासिम सुलेमानी को मारने में सफलता मिली। बगदाद एयरपोर्ट पर उनकी कार को काफिले पर ड्रोन से निशाना लगाया गया। इस हमले में जनरल सुलेमानी की मौत हो गई। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि सुलेमानी रहते हुए ईरान का प्रभाव अरब जगत से कम नहीं होता।

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