दिवालिया पाकिस्तान भारत के लिए ज्यादा खतरनाक क्यों? क्या सच में तबाह हो जाएगा जिन्ना के सपनों का देश

Updated on 20-02-2023 06:37 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। इतने पैसे बमुश्किल कुछ हफ्तों के आयात के लिए पर्याप्त है। पाकिस्तान अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के अलावा गेहूं का भी आयात करता है। यूक्रेन युद्ध के कारण इन आयातित वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इस बीच पाकिस्तानी रुपया भी अपने निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है। वर्तमान में 1 डॉलर की कीमत 260 पाकिस्तानी रुपये है। मुद्रा गिरने के कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान को अपनी मल्टीपल एक्सचेंज पॉलिसी को बदलने के लिए कहा है। इसके बाद पाकिस्तान ने डॉलर के मूल्य निर्धारण को मॉर्केट के भरोसे छोड़ दिया है।

    इस बार IMF भी मदद को तुरंत राजी नहीं


    पाकिस्तान को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष हर बार आगे आया है। 1952 के बाद आईएमएफ ने 23 बार पाकिस्तान की सहायता की है। लेकिन, इस बार आईएमएफ ने भी पाकिस्तान को कर्ज देने के पहले मुश्किल शर्तों का पुलिंदा सौंप दिया है। पाकिस्तान आईएमएफ के साथ 7 बिलियन डॉलर के कर्ज पर बातचीत करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, आईएमएफ ने दो टूक कहा है कि अगर उसकी शर्तों को माना जाता है, उसके बाद ही वह मदद का ऐलान करेगा। उनकी शर्तों में पाकिस्तान सरकार के लिए आय के नए साधनों का निर्माण करना शामिल है। ऐसे में पाकिस्तानी अवाम के ऊपर टैक्स का नया बोझ बढ़ सकता है।

    पाकिस्तान में आसमान छू रही कीमतें


    पाकिस्तान में भोजन, ईंधन और बिजली की कीमतें आसमान छू रही हैं। पाकिस्तान उन सभी बड़े संकटों से जूझ रहा है जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। पाकिस्तान में प्राकृतिक आपदाओं, राजनीति, आतंकवाद, सांप्रदायिक संघर्ष और तबाह अर्थव्यवस्था एक साथ मुश्किलें बढ़ा रही हैं। पिछले साल, पाकिस्तान के इतिहास में सबसे भयानक बाढ़ ने देश के दसवें हिस्से को जलमग्न कर दिया। सिंध और बलूचिस्तान जैसे प्रांतों में सामान्य से 500-700 फीसदी अधिक वर्षा हुई थी।

    बाढ़ के कारण कुपोषण झेल रहे 40 लाख पाकिस्तानी बच्चे


    यूनिसेफ के अनुमान के अनुसार, जनवरी के मध्य तक, 4 मिलियन से अधिक बच्चे अभी भी दूषित और स्थिर बाढ़ के पानी के पास रह रहे थे, जिससे उनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया था। इससे न केवल कुपोषण बल्कि मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और त्वचा संक्रमण जैसी बीमारियों का प्रकोप हो सकता है। जलवायु संकट के अलावा, पाकिस्तान को राजनीतिक संकट का भी सामना करना पड़ा था। तब पाकिस्तानी संसद में अविश्वास प्रस्ताव के बाद इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था। वोट से पहले, डिप्टी स्पीकर ने नेशनल असेंबली को भंग करने की कोशिश की थी, लेकिन उनके फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था।

    बढ़ते आतंकवाद ने पाकिस्तान का जीना मुहाल किया


    जलवायु और राजनीतिक संकट के अलावा, पाकिस्तान बढ़ते आतंकवाद और सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में है। पाकिस्तान में तालिबान समर्थक तत्वों को मदद मिल रही है। ऐसे में आत्मघाती बम धमाकों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। इससे पाकिस्तान में असुरक्षा के हालात काफी बढ़ गए हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को खराब हो चुकी है। हाल में ही पेशावर में पुलिस लाइन की मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे। वहीं, चंद दिनों पहले कराची में पुलिस मुख्यालय के ऊपर आतंकवादी हमला किया गया था। इसके अलावा पाकिस्तानी सेना और पुलिस पर आए दिन हमले हो रहे हैं।

    पाकिस्तान तबाह हुआ तो भारत के लिए बढ़ेगी मुश्किलें


    परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान का पतन भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। एक अस्थिर पाकिस्तान का मतलब कट्टरपंथी चरमपंथी इस्लाम का उदय होगा। इससे पाकिस्तान में भारत विरोधी लहर के और ज्यादा तेज होने की आशंका है। इसका मतलब है कि भारत को अपनी पश्चिमी सीमा की रक्षा के लिए अधिक संसाधन लगाने होंगे, जो चीनी सीमा पर भारत की सैन्य तैनाती को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्तान में अशिक्षित और गरीब अवाम को आतंकवादी समूह चंद पैसों के लिए खरीद सकते हैं। इनका इस्तेमाल भारत में आतंकी हमले करने के लिए किया जा सकता है। 26/11 मुंबई हमले के सभी आतंकी गरीब परिवार से ताल्लुकात रखते थे और कुछ पैसों के लिए इमान बेचकर जिहाद के नाम पर बरगलाए गए थे।

    व्यापार के मोर्चे पर भी होगा बड़ा नुकसान


    इसका मतलब यह भी है कि दक्षिण एशिया के दो सबसे बड़े देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य संबंध बनाने का अवसर फिर से गर्त में चला जाएगा। भारत का बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ मुक्त व्यापार समझौता है लेकिन पाकिस्तान के साथ कुछ भी नहीं है। दक्षिण एशिया दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां 95% व्यापार बाहरी देशों के साथ होता है, आंतरिक क्षेत्र के साथ नहीं। ढहते पाकिस्तान के साथ अंतर-क्षेत्रीय आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं और कम हो जाएंगी।

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