'बलूचों का कातिल, आर्मी का मोहरा है तू', पाकिस्‍तान के पूर्व PM की नार्वे में बलूचों ने की बेइज्जती

Updated on 17-02-2026 12:27 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक काकर को बलूचों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा है। काकर को नॉर्वे के ओस्लो में बलूच लोगों ने रोका और उनसे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी आर्मी के अभियानों को लेकर सवाल किया। बलूच प्रदर्शनकारियों ने काकर को बलूचिस्तान का कातिल और आर्मी का मोहरा कहते हुए जमकर सुनाया। इन्होंने काकर को बलूचिस्तान के लोगों की तरह की सुकून से ना रहने की बद्दुआ तक दी डाली लेकिन पाक नेता ने इनका कोई जवाब नहीं दिया। खुद बलूचिस्तान से आने वाले काकर सिर्फ लोगों की बात सुनते रहे और किसी तरह से यहां से निकलने का रास्ता तलाशते रहे।

बलूचिस्तान के अलगाववादी नेता मीर यार बलूचने एक्स पर काकर का वीडियो शेयर किया है। इसमें कुछ लोग काकर को भला-बुरा कहते हुए सुने जा सकते हैं। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि नॉर्वे में बलूच देशभक्तों ने 2023 में पाकिस्तान के केयरटेकर प्राइम मिनिस्टर रहे अनवार-उल-हक काकरके ओस्लो दौरे के दौरान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया और दुनिया को बलूचिस्तान के लोगों की मुश्किलों का ध्यान दिलाया।

हम अपनी मांग उठाते रहेंगे: बलूच

मीर यार ने लिखा कि लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से हमारे बलूच प्रतिनिधि यूरोप और दुनिया में पाकिस्तान की कुचलने वाली नीतियों, युद्ध अपराधों, बलूच नरसंहार और बलूच राष्ट्र के खिलाफ सिस्टमैटिक अन्याय को उजागर करते रहते हैं। ओस्लो में भी यही काम शांतिपूर्वक तरीके से किया गया है।
मीर यार ने आगे लिखा, 'हम नॉर्वे सरकार और इंटरनेशनल समुदाय से अपील करते हैं कि वे पाकिस्तानी आर्मी के बलूचिस्तान गणराज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन के भरोसेमंद सबूतों और रिकॉर्ड पर गंभीरता से ध्यान दें। दुनिया यहां लोगों के गायब होने, न्यायेतर हत्याओं और दूसरे आरोपों की स्वतंत्र जांच का समर्थन करें।

नॉर्वे सरकार से मीर यार की अपील

बलूचिस्तान को अलग देश बनाने की मांग करने वाले मीर ने नॉर्वे सरकार से काकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा, 'हम नॉर्वे सरकार से अपील करते हैं कि अनवर उल हक काकर और कठपुतली सीएम सरफराज की जांच करे, जिनके हाथ हजारों बेगुनाह बलूच नागरिकों के खून से सने हुए हैं।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लंबे समय से अलगाववाद की मजबूत भावना रही है। बलूचों लोगों में बड़ा तबका पाकिस्तान से अलग होने की मांग करता रहा है। पाकिस्तानी की आर्मी के अत्याचार और पाक सरकार की भेदभाव वाली नीतियों ने इस भावना को बढ़ाया है। बलूचिस्तान में सशस्त्र गुट पाक आर्मी से लड़ रहे हैं।

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