ईरानी तेल साम्राज्‍य को आगे बढ़ा रहे दुनिया के 27 देश, भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी बैन से कुछ नहीं बिगड़ेगा

Updated on 01-08-2025 01:59 PM
नई द‍िल्‍ली: अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अगर यह सोच रहे हैं कि वह 6 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर ईरान के ऊर्जा व्यापार और शिपिंग नेटवर्क को ध्वस्त कर देंगे, तो उनका अंदाजा बिल्कुल गलत है। ईरान के अवैध तेल साम्राज्य को आगे बढ़ाने में दुनिया के 27 देश शामिल है। इसमें अमेरिका के मध्यपूर्व में रणनीतिक भागीदार से लेकर अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन चीन भी शामिल है। यहीं कारण है की जब भी ईरान पर प्रतिबंध लगाया या बढ़ाया जाता है तो तेल का अवैध व्यापार और ज्यादा बढ़ जाता है। ईरान के तेल व्यापार के प्रमुख केन्द्रों को ही ले तो पता चलता है कि दुनिया की कई बड़ी ताकतें ईरान को बढ़ावा दे रही हैं और उन्हें ट्रंप या अमेरिकी प्रतिबंधों की कोई परवाह नहीं है। जून 2025 के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि फुजैरा,जेबेल अली, झोउशान, ताइकांग, क़िंगदाओ और चांगझोउ जैसे दुनिया के नामचीन और अत्याधुनिक 6 बंदरगाह इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।

दुनिया संयुक्त अरब अमीरात को अमेरिका का दोस्त और ईरान का दुश्मन समझती है लेकिन तेल के अवैध व्यापार को लेकर बिल्कुल ऐसा नहीं है। ईरान के अवैध तेल व्यापार को बढ़ाने में यूएई किसी से पीछे नहीं है। जेबेल अली संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अमीरात के भीतर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह शहर है, जो दुबई शहर से लगभग 35 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में है। फारस की खाड़ी के दक्षिणी तट पर स्थित, यह संयुक्त अरब अमीरात के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और रसद केंद्रों में से एक है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित बंदरगाह और कंटेनर मात्रा के हिसाब से मध्य पूर्व का सबसे व्यस्त बंदरगाह है। फुजैराह बंदरगाह यूएई के प्रमुख बंदरगाहों में से एक है जिसमें कई उल्लेखनीय सुविधाएं हैं। फुजैराह बंदरगाह या अल फुजैराह बंदरगाह के रूप में भी जाना जाता है, यह बंदरगाह सिंगापुर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बंकरिंग केंद्र है। यह यूएई के पूर्वी तट पर रणनीतिक रूप से स्थित एक बहुउद्देशीय बंदरगाह है।

यूएई से कैसे होता है ईरानी तेल का व्‍यापार ?


फ़ुजैरा बंदरगाह संयुक्त अरब अमीरात का एकमात्र समुद्री केंद्र है जो संयुक्त अरब अमीरात के पूर्वी तट पर स्थित है और यह विशिष्ट विशेषता इसके सामरिक महत्व को और बढ़ा देती है। यह बंदरगाह पूर्व और पश्चिम के बीच नौवहन मार्गों को जोड़ता है। यह संयुक्त अरब अमीरात के सभी अमीरातों के सड़क नेटवर्क से त्वरित संपर्क भी प्रदान करता है। बंदरगाह और सात अमीरातों के बीच की दूरी 110 किमी से 300 किमी के बीच है। इसके अलावा, यह बंदरगाह दुबई के जेबेल अली बंदरगाह और मीना राशिद बंदरगाह सहित संयुक्त अरब अमीरात के अन्य बंदरगाहों से भी जुड़ा हुआ है। ये विशेषताएं फ़ुजैरा बंदरगाह के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यापार को काफ़ी बढ़ावा देती हैं।
झोउशान बंदरगाह कार्गो टन भार के हिसाब से दुनिया का सबसे व्यस्त बंदरगाह है। यह चीन के झेजियांग प्रांत में स्थित है और कच्चे तेल, बल्क कार्गो, कंटेनरों, एलएनजी और अयस्क को संभालने का एक प्रमुख केंद्र है। बंदरगाह अपने गहरे पानी के बर्थ और रणनीतिक स्थान के लिए जाना जाता है। क़िंगदाओ न्यू कियानवान कंटेनर टर्मिनल एशिया का पहला पूर्ण स्वचालित कंटेनर टर्मिनल और दुनिया के सबसे उन्नत टर्मिनलों में से एक बना हुआ है। यह क़िंगदाओ कियानवान बंदरगाह क्षेत्र के दक्षिणी तट पर स्थित है और यह दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर जहाजों को समायोजित कर सकता है। चांगझोउ बंदरगाह, चीन के जिआंगसू प्रांत में यांग्त्ज़ी नदी पर स्थित एक अंतर्देशीय बंदरगाह है। चांगझोउ बंदरगाह समूह द्वारा संचालित,यह क्षेत्र के विनिर्माण उद्योगों के लिए एक रसद केंद्र के रूप में कार्य करता है।

चीन खरीदता है सबसे ज्‍यादा ईरानी तेल


यहीं कारण है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में तेहरान का दर्ज तेल निर्यात जनवरी 2025 में बाइडेन प्रशासन के अंत में दर्ज किए गए स्तरों से लगातार अधिक रहा है। फरवरी से जून 2025 तक, ईरान का कच्चे तेल का निर्यात औसतन 16.7 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो जनवरी 2025 के आंकड़े से 37 फीसद अधिक है। हाल के महीनों में ईरान ने कुल 50 मिलियन बैरल तेल, लगभग 1.7 एमबीपीडी का निर्यात किया। जिसमें 88 फीसद कच्चा तेल, 10 फीसद ईंधन तेल और 2 फीसद कंडेनसेट थे। इनमें से 92 प्रतिशत से ज़्यादा निर्यात चीन को और 6 फीसद संयुक्त अरब अमीरात को हुआ।

यह भी बड़ा रहस्य है कि ईरान के तेल बेचने की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण स्थल खर्ग द्वीप को निशाना बनाने को लेकर इजराइल ने भी सावधानी दिखाई। इसका एक प्रमुख कारण चीन का दबाव भी हो सकता है क्योंकि यहां से सबसे ज्यादा तेल चीन तक पहुंचता है। इन निर्यातों के मुख्य गंतव्य स्‍थल चीन और संयुक्त अरब अमीरात हैं। दोनों ही ऐसे क्षेत्राधिकार थे जहां ट्रंप के पहले कार्यकाल में प्रतिबंधों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन हुआ था। इस्लामी गणराज्य ईरान ने ईरानी तेल उत्पादों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए शिपिंग उद्योग में कई तरह की भ्रामक गतिविधियां अपनाई हैं। साल 2023 में ईरान ओपेक देशों में कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक था और साल 2022 में यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा शुष्क गैस का उत्पादक था।

ईरान से चीन तक यूं चलता है तेल का खेल


हालांकि ईरान पर कई वर्षों से प्रतिबंध लगे हुए हैं, फिर भी इसने उसे तेल निर्यात करने से नहीं रोका है। ख़ास तौर पर इसका फायदा चीन को हुआ है: साल 2023 में, ईरान द्वारा निर्यात किए गए तेल का लगभग 90 फीसद हिस्सा चीन के पास चला गया। मार्च 2024 में फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने ईरान के तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री जावेद ओवजी के हवाले से कहा था कि ईरान के तेल निर्यात से 2023 में 35 अरब डॉलर से ज़्यादा की आय हुई। लंदन स्थित टीवी स्टेशन ईरान इंटरनेशनल का अनुमान है कि तेहरान अपना तेल विश्व बाजार मूल्य से 20 फीसद कम कीमत पर बेचता है जिससे वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ग्राहक ढूंढ सके, यहीं कारण है कि चीनी रिफाइनरियां ईरान के अवैध तेल खेपों की सबसे बड़ी खरीदार हैं। बिचौलिए इसे अन्य देशों से आने वाले तेल के साथ मिला देते हैं और फिर चीन में तेल को सिंगापुर या अन्य मूल देशों से आयातित घोषित कर दिया जाता है।

चीन और ईरान को समुद्र में खुफियां रास्ता देने वाले देशों में सिंगापुर, इंडोनेशिया, मलेशिया और मालदीव शामिल हैं। ईरान और चीन के व्यापारिक जहाज मालदीव होते हुए पूर्व की ओर बढ़ते हैं और इंडोनेशिया के सुमात्रा तथा जोहोर जलसन्धि से होते हुए सिंगापुर के बाद आसानी से दक्षिण चीन सागर पहुंच जाते हैं। जोहोर जलडमरूमध्य सिंगापुर और प्रायद्वीपीय मलेशिया के बीच दक्षिण पूर्व एशिया में एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है। यह जलडमरूमध्य उत्तर में मुख्य भूमि मलय प्रायद्वीप पर मलेशियाई राज्य जोहोर को सिंगापुर और दक्षिण में उसके द्वीपों से अलग करता है।

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