बंगाल में SIR से हटे 37 लाख वोटर, अपील पर फैसले में लग सकते हैं 12 साल; ECI ने सुप्रीम कोर्ट से की बड़ी मांग

Updated on 21-09-2026 12:07 PM
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ( SIR ) के बाद मतदाता सूची से हटाए गए अनगिनत वोटर शायद एक दशक तक वोट न दे पाएं। ऐसा इसलिए हो सकता है कि क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित की गई अपीलीय ट्रिब्यूनलों को उनके नाम दोबारा शामिल करने की अपील पर फैसला लेने में 12 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। यह अनुमान मौजूदा फैसलों की रफ्तार पर सामने आए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में ट्रिब्यूनलों की संख्या को बढ़ाने की मांग की है।

चुनाव आयोग द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, अप्रैल के बीच में काम शुरू होने के बाद से पिछले पांच महीनों में ट्रिब्यूनल ने 1,26,194 आवेदनों पर फैसला किया है। यानी शनिवार और रविवार समेत सभी दिन काम करने के बावजूद हर महीने औसतन करीब 25,238 मामलों का निपटारा हुआ है।

37 लाख से ज्यादा मामले लंबित

16 सितंबर को जब हलफनामा दायक किया गया था, तब ट्रिब्यूनलों के सामने 37,05,235 मामले लंबित थे। मौजूदा रफ्तार से, अगर ट्रिब्यूनल हफ्ते के सातों दिन काम करें, तो सभी मामलों पर फैसला लेने में 146 महीने लगेंगे।

चुनाव आयोग ने माना है कि 37 लाख मामलों के निपटारे का बहुत बड़ा काम करने के लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रिब्यूनल की संख्या काफी नहीं है। आयोग ने कोर्ट से गुजारिश की कि राज्य में ट्रिब्यूनल की संख्या 24 से बढ़ाकर 42 (मौजूदा संख्या से लगभग दोगुनी) कर दी जाए और ज्यूडिशियल अधिकारियों को घर से काम करने की इजाजत दी जाए।

लोकसभा सीटों के बराबर ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव

टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की याचिका के जवाब में दाखिल हलफनामे में कहा गया, 'लंबित अपीलों के निपटारे को और बेहतर और तेज बनाने के मकसद से, यह प्रस्ताव है कि पश्चिम बंगाल राज्य में अपीलेट ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाए ताकि यह राज्य में संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या के बराबर हो सके और लंबित अपीलों का तेजी से निपटारा हो सके।' इसमें कहा गया कि ज्यूडिशियल अधिकारियों को घर से सुनवाई करने और अन्य कार्यवाही करने की इजाजत देने से 'आने-जाने में लगने वाले समय को कम करके लंबित अपीलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिलेगी।'

ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली SOP के तहत

ट्रिब्यूनल के कामकाज को लेकर दायर एक याचिका के जवाब में आयोग ने एक और हलफनामा दाखिल किया। इसमें कहा गया कि ट्रिब्यूनल का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर किया गया था। इनके कामकाज के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) उस कमेटी ने तैयार किया है जिसे इसी मकसद से बनाया गया था। इस कमेटी में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज भी शामिल थे।

आयोग ने कहा कि ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली, प्रक्रिया और लोगों की पहुंच से जुड़े मुद्दे SOP और संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इनसे जुड़ी व्यवहारिकता, तौर-तरीके और क्रियान्वयन पर फैसला संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाना उचित होगा।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 22 September 2026
पूनम पाण्डे: पेपर लीक के खिलाफ युवाओं ने जंतर-मंतर पर आंदोलन किया, सरकार से सवाल पूछे और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का छात्र संगठन,…
 22 September 2026
नई दिल्ली: एक इमारत गिरी और 7 लोगों की जान चली गई... इस हादसे ने सिर्फ दिल्ली के सत्य निकेतन को नहीं, बल्कि देश के तेजी से फैलते शहरों में…
 22 September 2026
नई दिल्ली: राजस्थान का जोधपुर एयरबेस जल्द ही दुनिया की कई प्रमुख वायु सेनाओं की ताकत का गवाह बनने वाला है। यहां 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक मल्टीनेशनल एयर…
 22 September 2026
नई दिल्ली: क्या कानूनी प्रक्रिया पूरी कर गोद लिए गए बच्चे को सालों बाद वापस किसी संस्था को सौंपा जा सकता है? अगर बच्चा बड़ा होने के साथ इतना आक्रामक…
 22 September 2026
नई दिल्ली: सिंधु जल समझौता रुकने से पाकिस्तान में बहुत ही छटपटाहट है। उसने इस समझौते को फिर से शुरू करवाने के लिए भारत पर दबाव बनाने के अपने सारे…
 22 September 2026
सी.आर. पाटिल, नई दिल्ली: जल हमें उन तरीकों से जोड़ता है, जिनमें बहुत कम दूसरे संसाधन जोड़ पाते हैं। नदियां प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानतीं। भूजल के स्रोत कई समुदायों…
 22 September 2026
नई दिल्ली: दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पुरानी दिल्ली के 125 साल के वोटर श्याम मुखिजा…
 21 September 2026
BRICS के बढ़ते प्रभाव, भारत-चीन संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा और UNSC में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया की नजर है। ऐसे में भारत के लिए इस मंच की बदलती भूमिका कितनी…
 21 September 2026
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ( SIR ) के बाद मतदाता सूची से हटाए गए अनगिनत वोटर शायद एक दशक तक वोट न दे पाएं। ऐसा इसलिए…
Advt.