औद्योगिक विकास के नाम पर पांच-साल में 539 करोड़ खर्च:काम क्या हुआ, पता नहीं

Updated on 15-05-2025 01:06 PM

मप्र के 54 औद्योगिक क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर पिछले पांच साल में करीब 539 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन इस राशि से कहां, कितना और क्या काम हुआ, इसकी जानकारी सरकार को नहीं दी गई। यह राशि लघु उद्योग निगम (एलयूएन) को दी गई थी, जो उद्योग विभाग की नोडल एजेंसी है।

औद्योगिक क्षेत्रों में क्या काम हुआ, विभाग को इसका उपयोगिता प्रमाण-पत्र सरकार को देना होता है लेकिन, यहां न तो उद्योग विभाग ने उपयोगिता प्रमाण-पत्र मांगा और न ही लघु उद्योग निगम ने देने की जरूरत समझी।

नतीजा यह कि करोड़ों की राशि खर्च होने के बावजूद कई जिलों में जमीन तक खाली पड़ी है और आधारभूत सुविधाओं की भारी कमी है। छतरपुर, श्योपुर, टीकमगढ़, रायसेन, दतिया, बैतूल जिले ऐसे हैं, जहां औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए राशि तो जारी हुई, लेकिन काम नहीं हुआ, फिर भी बजट की मांग लगातार जारी रही।

बुनियादी सुविधाएं नहीं

  • जिला उद्योग केंद्र रायसेन के अंतर्गत आने वाले औबेदुल्लागंज और बिलखिरिया में सड़क, सीवरेज और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।
  • टीकमगढ़, दतिया, श्योपुर और छतरपुर जिला उद्योग केंद्रों के अंतर्गत आने वाले औद्योगिक क्षेत्रों की भी यही स्थिति है।

यहां सिर्फ जमीन उपलब्ध कराई, इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम कुछ नहीं

  • 2024-25 में ग्वालियर (मोहना), मंदसौर (सेमलनीकनकड़), मुरैना (मुवई), धार (लालबाग) समेत रीवा, उज्जैन एवं रायसेन में 7 नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 762 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है। इनमें रीवा और उज्जैन में 2-2 आईटी पार्क के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है।
  • नर्मदा एक्सप्रेस-वे के अंतर्गत 47.82 करोड़ रुपए की लागत से नरसिंहपुर की 132.58 हेक्टेयर भूमि में विकास किया जाना है।

देश के टाॅप टेन औद्योगिक क्षेत्रों में मप्र के सिर्फ पीथमपुर व मंडीदीप देश भर में रैंकिंग में टाप टेन में मप्र के दो ही औद्योगिक क्षेत्र जगह बना पाए हैं। आधारभूत संरचना के मामले में पीथमपुर नंबर वन और गुजरात का औद्योगिक क्षेत्र दूसरे नंबर पर रहा। इसी कड़ी में मंडीदीप 9वें नंबर पर आया।

जिलों से जानकारी जल्द मंगवाएंगे

जिला उद्योग केंद्रों के जरिये टेंडर जारी कर औद्योगिक विकास के काम करवाए जाते हैं। वहां से कभी जानकारी एलयूएन को भेज देते हैं तो कभी सीधे उद्योग विभाग को भेज दी जाती है। जिन जिलों से उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं आए हैं, वहां से मंगवाए जाएंगे।

-दिलीप कुमार, एमडी, एलयूएन और कमिश्नर एमएसएमई



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